न्योता स्वीकार ही नहीं किया तो जाने का सवाल ही नहीं, NALSAR विवाद पर बोले CJI सूर्यकांत

नालसर दीक्षांत समारोह विवाद पर CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि उन्होंने विश्वविद्यालय का निमंत्रण कभी स्वीकार ही नहीं किया था. 450 से अधिक छात्रों के विरोध के बाद BCI की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से विवाद बढ़ा था.

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नालसर दीक्षांत समारोह विवाद पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान.(File Photo- ITG) नालसर दीक्षांत समारोह विवाद पर CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान.(File Photo- ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:18 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यानी नालसर (NALSAR) लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह से जुड़े विवाद पर बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय का आमंत्रण कभी स्वीकार ही नहीं किया था. इसलिए वहां जाने या छात्रों के विरोध का अब कोई सवाल ही नहीं उठता.

जोधपुर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को संबोधित करने के बाद अनौपचारिक बातचीत में CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब मैंने निमंत्रण पर कभी सहमति ही नहीं दी थी, तो मेरे दीक्षांत समारोह में शामिल होने का प्रश्न ही नहीं उठता.

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दरअसल, नालसर विश्वविद्यालय में 2026 बैच के 450 से अधिक छात्रों ने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में CJI सूर्यकांत को आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी. छात्रों की यह आपत्ति संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI की मौखिक टिप्पणियों को लेकर थी. इसके बाद विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI भी कूद पड़ी.

जारी की थी चेतावनी

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने एक कड़ा आदेश जारी कर दिया था, जिसमें नालसर के ताजा बैच के छात्रों के वकील के रूप में पंजीयन, यानी एनरोलमेंट, पर रोक लगाने की चेतावनी दी गई थी. हालांकि, इसके चौतरफा विरोध और आलोचना के बाद कुछ ही घंटों में इसे वापस ले लिया गया. लेकिन तब तक किरकिरी हो चुकी थी. अगले दिन रही-सही कसर सुप्रीम कोर्ट ने अपने कड़े रुख से पूरी कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए BCI की कार्रवाई को पूरी तरह से अनावश्यक बताया.

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आदेश वापस लिया था

CJI ने कहा कि ये मामला उनके और छात्रों के बीच का था, तो BCI को अनावश्यक रूप से बीच में कूदने की जरूरत क्या थी! कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है. इसके बाद BCI ने अपना विवादित आदेश वापस ले लिया. CJI के इस बयान के बाद कि उन्होंने कभी आमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था, विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को लेकर चल रहा यह विवाद अब शांत हो गया है.

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