दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित टेंडर घोटाले और भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार आप के पूर्व मंत्री को बड़ा झटका लगा है. अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. इसके बाद सत्येंद्र जैन और अन्य आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.
कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर नोटिस जारी कर दिया है. अब इन सभी जमानत अर्जियों पर आगामी 25 अगस्त को सुनवाई की जाएगी. अदालत तय तारीख पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी.
इस मामले में एक राहत सिर्फ आईएएस अधिकारी उदित के लिए है. चूंकि उदित मिजोरम सरकार में तैनात एक आईएएस अधिकारी हैं, इसलिए उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई कल ही की जाएगी. अदालत ने इसके लिए कल का समय तय किया है.
दरअसल, एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से की गई कार्रवाई के बाद इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. कोर्ट ने बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया गै. इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ने अदालत और मीडिया के सामने खुलकर अपना पक्ष रखा है.
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. जब उन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जा रहा था, तब उन्होंने मीडिया से बातचीत की.
उन्होंने कहा कि उनकी यह गिरफ्तारी पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. सत्येंद्र जैन, जो पंजाब में पार्टी के सह-इन-चार्ज भी हैं, उन्होंने दावा किया कि यह सब आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.
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एसीबी ने पूर्व आप मंत्री समेत 6 को किया गिरफ्तार
एसीबी के मुताबिक, इस मामले में सत्येंद्र जैन और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में अंकित श्रीवास्तव, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुरा और पंकज वर्मा को भी आरोपी बनाया गया है.
यह पूरा मामला 11 मई 2024 को सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में पूर्व मंत्री समेत 6 लोगों पर अनियमितताओं के आरोप हैं.
जांच एजेंसी एसीबी ने अदालत में अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में लगभग 5 करोड़ रुपये के हवाला और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन किए गए हैं. एसीबी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर फेरबदल किया गया था. नियमों के मुताबिक टेंडर को अखबारों में प्रकाशित किया जाना अनिवार्य था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. उसे केवल दिल्ली जल बोर्ड की वेबसाइट पर ही अपलोड किया गया.
एसीबी ने यह भी दावा किया है कि 'एएन एंटरप्राइजेस' नाम की संस्था के जरिए दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन सीईओ उदित प्रकाश राय के बैंक खाते में 61 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे. इसके अलावा उनकी सास के खाते में 91 लाख रुपये भेजे जाने का भी आरोप है.
जांच एजेंसी का कहना है कि इस अवैध पैसे का इस्तेमाल संपत्ति की खरीद-फरोख्त में किया गया था. साथ ही, इस मामले में विनोद चौहान की भूमिका की जांच भी लगातार जारी है.
आरोपी पर सत्येंद्र जैन ने कोर्ट में दी सफाई
सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन ने अदालत के सामने अपनी सफाई पेश की. उन्होंने कहा कि एसीबी के अधिकारियों ने उनसे ऐसे तकनीकी सवाल पूछे जिनकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.
जैन ने साफ किया कि जब वे मंत्री थे, तब वे पूरी तरह से इंजीनियरों और विभाग के अधिकारियों की सलाह पर काम करते थे. एक मंत्री को यह कभी पता नहीं होता है कि किसी टेंडर के अंदर तकनीकी रूप से क्या चल रहा है?
सत्येंद्र जैन ने कोर्ट को समझाया कि यमुना नदी को साफ करना और उसमें सीवेज का पानी जाने से रोकना उनकी सरकार की बड़ी राजनीतिक प्रतिबद्धता थी. नए प्लांट बनाने में बहुत समय लगता है, इसलिए मौजूदा एसटीपी की क्षमता को डेढ़ से दो गुना बढ़ाने का निर्णय लिया गया ताकि काम एक साल में पूरा हो सके.
जैन ने कहा कि उनके पास आठ मंत्रालय थे और उनके पास कोई तकनीकी ज्ञान नहीं था. शुरुआती टेंडर की फाइल कभी उनके पास आई ही नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि 30 मई 2022 को उन्हें मंत्रालय से हटा दिया गया था.उसके महीनों बाद दिसंबर में टेंडर निकाला गया था, जबकि उस दौरान वे जेल में थे.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया. यह गिरफ्तारी दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच यानी एसीबी ने मंगलवार की है. यह उनके ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत पर बाहर आने के करीब 22 महीने बाद हुई है.
सत्येंद्र जैन अक्टूबर 2024 में जमानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से बाहर आए थे, जहां वे पहले वाले डिसप्रोपोर्शनेट एसेट्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब 18 महीने तक बंद रहे थे. अब उन पर दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर से जुड़ा भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है.
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एसीबी की प्रेस रिलीज के मुताबिक यह नया मामला 11 मई 2024 को दर्ज एफआईआर नंबर 10/2024 से जुड़ा है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (जैसा 2018 में संशोधित हुआ) की धारा 7, 7ए, 9 और 13 के साथ-साथ आईपीसी की धारा 420, 409, 418 और 120-बी के तहत दर्ज है.
यह मामला दिल्ली सरकार के विजिलेंस डायरेक्टोरेट की शिकायत पर दर्ज हुआ था. आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई, टेंडर की शर्तों में जानबूझकर हेराफेरी की गई और इसके पीछे आपराधिक साजिश रची गई.
सृष्टि ओझा