दिल्ली में कारोबार करना हुआ आसान,'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' बिल को मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को मुख्यमंत्री गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली कैबिनेट ने इस बिल को पास कर दिया है, अब इसे अंतिम रूप देने और कानून बनाने के लिए आगे की प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है.

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तय समय में फैसला नहीं तो अर्जी अपने आप मंजूर तय समय में फैसला नहीं तो अर्जी अपने आप मंजूर

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:24 AM IST

दिल्ली कैबिनेट ने 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026' के मसौदे को मंजूरी दे दी है, इसके तहत कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए स्व-प्रमाणन का प्रस्ताव रखा गया है और पंजीकरण के बाद तीन वर्षों तक नियमित निरीक्षणों पर रोक लगाई गई है. इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य देरी को कम करना और व्यवसायों द्वारा विभिन्न विभागों से ली जाने वाली स्वीकृतियों, पंजीकरणों, लाइसेंसों, एनओसी और अन्य अनुमतियों की आवश्यकता को घटाना है.

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अगर किसी सरकारी विभाग को दिए गए आपके आवेदन पर तय समय के अंदर कोई फैसला नहीं होता है, तो उसे रिजेक्ट नहीं माना जाएगा. वह आवेदन अपने आप मंजूर मान लिया जाएगा. मंजूरी मिलते ही आवेदक को किसी सरकारी दफ्तर जाने या चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वे सीधे पोर्टल से अपना अप्रूवल या एनओसी डाउनलोड कर सकेंगे. दिल्ली कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे अंतिम कानून का रूप देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा गया है.

एक ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रमुख व्यावसायिक स्वीकृतियां, पंजीकरण, एनओसी और यूटिलिटी कनेक्शन प्रदान करने के लिए एक 'सिंगल विंडो सिस्टम' स्थापित किया जाएगा. तय समय सीमा के भीतर इस पोर्टल के जरिए दी जाने वाली सेवाओं में बिल्डिंग प्लान की मंजूरी, फैक्ट्री लाइसेंस, फायर क्लीयरेंस, पानी, सीवर व बिजली के कनेक्शन, रेरा (RERA) पंजीकरण और सहकारी समिति पंजीकरण शामिल होंगे. रेखा गुप्ता ने बताया कि यह विधेयक भारत सरकार की 'कंप्लायंस रिडक्शन एंड डिग्यूलेशन इनिशिएटिव, फेज II' के तहत तैयार किया गया है और यह 'जन विश्वास अधिनियम, 2023' की भावना के अनुरूप है.

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उन्होंने कहा, "सरकार एक ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है जहां स्वीकृतियां प्राप्त करना आसान हो, प्रक्रियाएं स्पष्ट हों, निर्णय निश्चित समय सीमा में लिए जाएं और अनावश्यक अनुपालन के बोझ को समाप्त किया जाए." आवेदन प्राप्त करने से लेकर अंतिम स्वीकृति देने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (DSIIDC) नोडल एजेंसी होगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक में औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR), ग्राउंड कवरेज, सेटबैक और इमारत की ऊंचाई से संबंधित प्रतिबंधों को हटाकर कई विकास नियंत्रण मानदंडों में ढील देने का भी प्रस्ताव है.

कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए स्व-प्रमाणन प्रणाली शुरू की जाएगी, जिसके तहत अग्निशमन सुरक्षा, बिल्डिंग प्लान मंजूरी, प्रदूषण संबंधी अनुमतियों और कम तनाव वाले बिजली कनेक्शनों से जुड़ी प्रक्रियाएं स्व-घोषणा के आधार पर पूरी की जाएंगी. बयान में कहा गया कि इससे छोटे, कम जोखिम और कम खतरे वाले उद्यम बिना किसी अनावश्यक देरी के अपना संचालन शुरू कर सकेंगे.

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