दिल्ली में हुए धमाके की जांच के दौरान एक नया और गंभीर पहलू सामने आया है. केंद्रीय जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आतंकी मॉड्यूल ने राजधानी दिल्ली समेत देश के बड़े महानगरों में एक वैश्विक कॉफी चेन के आउटलेट्स को निशाना बनाने की योजना बनाई थी. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों का मानना था कि यह ब्रांड यहूदी प्रभाव का प्रतीक है, क्योंकि इसके वैश्विक विस्तार के दौर में कंपनी का नेतृत्व एक यहूदी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के हाथों में था.
सूत्रों के अनुसार, यह संभावित हमला इजरायल के गाजा में सैन्य अभियानों के खिलाफ एक राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से प्लान किया गया था. यह जानकारी आठ आरोपियों से लंबी पूछताछ के दौरान सामने आई है, जिनमें तीन मेडिकल प्रोफेशनल भी शामिल हैं. इनमें जम्मू-कश्मीर के मुजामिल अहमद गनई और आदिल अहमद राथर, और उत्तर प्रदेश के शाहीन सईद शामिल हैं.
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पूछताछ में इन डॉक्टरों ने बताया कि आतंकी समूह के भीतर ही टारगेट को लेकर गहरा मतभेद था. कुछ सदस्य नागरिक ठिकानों पर हमला करने के खिलाफ थे और चाहते थे कि साजिश को केवल जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों तक सीमित रखा जाए. हालांकि, जांच एजेंसियों के अनुसार, कार बम हमलावर उमर-उन-नबी, जो धमाके में मारा गया, घाटी के बाहर बड़े और हाई-प्रोफाइल ठिकानों को निशाना बनाने पर जोर दे रहा था ताकि हमले का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस हो.
मेट्रो शहरों में कॉफी चेन के आउटलेट्स को बनाना चाहते थे निशाना
एजेंसियों का मानना है कि उमर-उन-नबी और उसके सहयोगी मेट्रो शहरों में कॉफी चेन के आउटलेट्स पर हमले को अपने कथित संदेश को वैश्विक बनाने का जरिया मानते थे. धमाके के सात दिन बाद एनआईए ने जासिर वानी को गिरफ्तार किया, जिसे उसकी तकनीकी विशेषज्ञता के चलते नेटवर्क में शामिल किया गया था. वानी पर ड्रोन को हथियार में बदलने और हमास-शैली के हमलों की योजना में शामिल होने का आरोप है.
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अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे आतंकी
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे और स्थानीय आतंकी गतिविधियों को वैश्विक संघर्षों से जोड़ने वाली कट्टरपंथी सोच से प्रेरित थे. एनआईए अब यह जांच कर रही है कि कॉफी चेन पर हमले की योजना केवल चर्चा तक सीमित थी या इसके लिए रेकी और ठोस तैयारी भी की गई थी. जांच अभी जारी है.
श्रेया चटर्जी