दिल्ली ब्लास्ट: अफगानिस्तान में छिपे इस 'आतंकी डॉक्टर' तक पहुंची NIA, इंटरपोल से मांगी मदद

Delhi Red Fort Blast: लाल किले के बाहर हुए धमाके की साजिश से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है. इस हमले के पीछे सिर्फ एक आत्मघाती हमलावर नहीं, बल्कि विदेश से ऑपरेट किया जा रहा एक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल था. इसी कड़ी में अब अफगानिस्तान में छिपे डॉ. मुजफ्फर राथर पर शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है.

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दक्षिण कश्मीर का रहने वाला डॉ. मुजफ्फर राथर उमर नबी का हैंडलर था. (Photo: ITG) दक्षिण कश्मीर का रहने वाला डॉ. मुजफ्फर राथर उमर नबी का हैंडलर था. (Photo: ITG)

aajtak.in

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  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:25 PM IST

दिल्ली के लाल किला के पास हुए भीषण धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों ने इस हमले के लिए लॉजिस्टिकल मदद और फंडिंग देने के आरोपी डॉ. मुजफ्फर राथर को पकड़ने के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है. उसके खिलाफ जल्द ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा सकता है. वो पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ है. दक्षिण कश्मीर का रहने वाला है.

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डॉ. मुजफ्फर राथर को एनआईए कोर्ट भगोड़ा अपराधी घोषित कर चुका है. एनआईए की जांच में सामने आया है कि उसने अफगानिस्तान से दिल्ली हमले की साजिश को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी. वो लॉजिस्टिक्स, फंडिंग, कम्युनिकेशन और प्लानिंग से लेकर आतंकियों के बीच समन्वय तक में सक्रिय था. आत्मघाती हमला करने वाले डॉ. उमर उन नबी के सीधे संपर्क में था.

इतना ही नहीं उसे लगातार निर्देश दे रहा था. उमर नबी ने अफगानिस्तान स्थित हैंडलर्स और मुजफ्फर राथर के समर्थन से आत्मघाती हमला किया. इस नेटवर्क ने न सिर्फ फंडिंग मुहैया कराई, बल्कि एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के जरिए बम बनाने और ऑपरेशनल रणनीति से जुड़ी जानकारियां भी साझा की थी. मुजफ्फर राथर अगस्त में भारत छोड़कर दुबई होते हुए अफगानिस्तान चला गया. 

जांच अधिकारियों को शक है कि वो वहां सुरक्षित ठिकानों में छिपा हुआ है. विदेश से ही आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि उसने टेरर मॉड्यूल के लिए फंड जुटाने में मदद की थी. करीब 6 लाख रुपए का योगदान आतंकी फाइनेंशियल पूल में दिया. साल 2021 में वह डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई और उमर के साथ तुर्की भी गया था.

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वहां से बाहरी हैंडलर्स से संपर्क साधने की कोशिश की गई. हालांकि, उस वक्त वे अफगानिस्तान नहीं पहुंच पाए, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि यह यात्रा उनके कट्टरपंथी बनने और नेटवर्क तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा थी. इसके बाद फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी के आरोपियों ने भारी मात्रा में केमिकल जमा किए. इनमें अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल था.

यह साजिश तब बेनकाब हुई जब श्रीनगर पुलिस ने बानपोरा, नौगाम इलाके में जैश के पोस्टर लगाए जाने के मामले की जांच शुरू की थी. सीसीटीवी फुटेज के जरिए स्थानीय आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और फिर पूरा अंतर-राज्यीय आतंकी नेटवर्क सामने आ गया. जांच के दौरान हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी तक तार जुड़े, जहां से गनई और शाहीन सईद की गिरफ्तारी हुई.

वहां से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई. उस समय तत्काल कार्रवाई नहीं होती तो नुकसान बड़ा हो सकता था. हालांकि, पुलिस की सक्रियता को देखकर उमर नबी डर गया. वो विस्फोटक से लदी कार को लेकर फरीदाबाद से दिल्ली पहुंच गया. इसके बाद लाल किला के पास धमाका कर दिया. इंटरपोल के जरिए राथर को भारत लाने की तैयारी इस केस में बड़ा कदम माना जा रहा है.

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