हमने कैंसर को हराया! भावुक कर गया हेल्थ वेल्थ समिट का ये सेशन, डॉक्टर ने बताया क‍ितनी कठिन है जंग? 

HealthWealth Summit 2026 के समापन सत्र में वरिष्ठ पत्रकार और कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेशाई ने एक कैंसर सर्वाइवर के रूप में अपने संघर्ष और जीत की कहानी बयां की. अपोलो अस्पताल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशुमन अग्रवाल के साथ इस प्रेरणादायक चर्चा में उन्होंने बताया कि कैसे शुरुआती जांच, परिवार का साथ और सकारात्मक सोच ने उन्हें इस बीमारी से जंग जीतने में मदद की.  

Advertisement
HealthWealth Summit में वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने साझा किया अपना कैंसर सर्वाइवर सफर HealthWealth Summit में वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने साझा किया अपना कैंसर सर्वाइवर सफर

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई द‍िल्ली ,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:20 PM IST

जिंदगी कब कौन सा मोड़ ले ले, यह कोई नहीं जानता. जिस पत्रकार ने अपनी पूरी जिंदगी देश और दुनिया के कठिन सवाल पूछते हुए बिता दी, जब उसे खुद डॉक्टर से यह सुनना पड़ा कि 'आपको कैंसर है", तो एक पल के लिए पूरी दुनिया ठहर जाती है.' 

आजतक हेल्थ वेल्थ समिट के बेहद खास और भावनात्मक समापन सत्र '#CANCERSURVIVOR - हमने कैंसर को हराया' में जाने-माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशुमन अग्रवाल ने शिरकत की.

Advertisement

राजदीप सरदेसाई ने इस मंच पर पहली बार खुलकर अपने प्रोस्टेट कैंसर के निदान, इलाज और उससे उबरने के सफर को साझा किया.  आइए जानते हैं इस दिल को छू लेने वाली बातचीत से आम लोगों के काम की कौन-कौन सी बड़ी और अहम बातें सामने आईं. 

जब डॉक्टर ने कहा कैंसर है... 

अपने अनुभव को साझा करते हुए राजदीप ने बताया कि पिछले साल जून में जब उन्हें बायोप्सी रिपोर्ट के बाद डॉक्टर का फोन आया कि ट्यूमर बिनाइन (सौम्य) नहीं है और उन्हें शुरुआती लेकिन हाई-ग्रेड कैंसर है, तो उनका पहला रिएक्शन हैरान करने वाला था. वे उस समय इंग्लैंड जाने और लॉर्ड्स में भारत बनाम इंग्लैंड का मैच देखने की तैयारी कर रहे थे, पासपोर्ट और वीजा सब तैयार था.

जब उन्होंने अपने डॉक्टर बेटे से इस बारे में बात की, तो बेटे ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा, 'पापा, अगर आपको कैंसर होना ही था, तो यह सबसे बेहतरीन किस्म का कैंसर है, जो ठीक हो सकता है.' इस बात ने उन्हें बहुत हिम्मत दी. राजदीप सरदेसाई ने कहा कि 'राजेश कुमार की फिल्म 'आनंद' वाला दौर अब पीछे छूट चुका है'. राजदीप ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि सत्तर के दशक में जब वे बड़े हो रहे थे, तो राजेश कुमार की फिल्म 'आनंद' देखकर यही लगता था कि कैंसर का मतलब सीधा मौत या जीवन का अंत है. लेकिन आज का दौर डिजिटल और मेडिकल एडवांसमेंट का है.

Advertisement

उन्होंने कहा कि बीमारी का पता चलते ही उन्होंने 'ग्लीसन स्कोर' और पीएसए टेस्ट के बारे में पढ़ना शुरू किया और डॉक्टर से सबसे पहला सवाल यही पूछा था कि वे कितने हफ्तों में वापस अपने ऑफिस और स्टूडियो लौट पाएंगे.

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण और समय पर जांच की जरूरत

डॉ. अंशुमन अग्रवाल ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक आम कैंसर है, जिसके शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई लक्षण नजर नहीं आते. डॉक्टर ने कहा कि पीएसए (PSA - Prostate Specific Antigen) टेस्ट एक ऐसा ब्लड टेस्ट है, जो इस खतरे का समय रहते पता लगाने में मदद करता है.

डॉ. अग्रवाल ने सलाह दी कि 50 वर्ष की आयु के बाद (या यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो तो 40-50 की उम्र के बीच) पुरुषों को नियमित रूप से अपनी स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. राजदीप ने भी माना कि वे तो एक रूटीन हर्निया के ऑपरेशन के लिए अस्पताल गए थे, जहां ब्लड टेस्ट और एमआरआई के दौरान इत्तेफाक से इसका पता चल गया. उन्होंने वकालत की कि आयुष्मान भारत या बीमा योजनाओं के तहत हर व्यक्ति के लिए नियमित कैंसर चेकअप अनिवार्य होना चाहिए.

अस्पताल के वो 5 दिन और कॉमेडी फिल्मों का सहारा

Advertisement

ऑपरेशन के बाद अस्पताल के उन 5 दिनों को याद करते हुए राजदीप ने बताया कि उन्होंने दर्द और तनाव से दूर रहने के लिए केवल कॉमेडी फिल्में देखीं और किशोर कुमार के गाने सुने. उन्होंने कहा कि जिंदगी एक सफर है, और अगर आपका माइंडसेट पॉजिटिव है, तो आप दुनिया की किसी भी बड़ी बीमारी को मात दे सकते हैं.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डॉक्टर आपके लिए भगवान का रूप होते हैं, लेकिन जंग जीतने के लिए आपका अपना 'माइंड ओवर बॉडी' (मन की ताकत) सबसे बड़ा हथियार है.

परिवार और दोस्तों का साथ ही असली दौलत

इस मुश्किल दौर से उबरने के बाद जीवन को देखने का नजरिया कैसे बदला, इस पर राजदीप ने बहुत ही खूबसूरत बात कही, 'जिंदगी को कभी भी ग्रांटेड (हल्के में) मत लीजिए. हर पल को पूरी तरह से जिएं.'  उन्होंने अपनी इस जंग में अपनी पत्नी, बच्चों, दोस्तों और अपने असिस्टेंट सुरिंदर नागर का विशेष रूप से धन्यवाद किया, जिन्होंने हर कदम पर साये की तरह उनका साथ दिया. उन्होंने कहा कि बैंक बैलेंस या दौलत मायने नहीं रखती, असल ताकत अपनों का बेहिसाब प्यार और साथ होता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »