बच्चा साल में कई बार सर्दी, खांसी या बुखार की चपेट में आ जाता है तो माता-पिता परेशान हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर है और उसे किसी ऐसी दवा या टॉनिक की जरूरत है, जिससे शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ जाए. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों का साल में छह से आठ बार वायरल संक्रमण की चपेट में आना सामान्य हो सकता है. खासकर तब, जब बच्चा स्कूल या डे-केयर जाना शुरू करता है. आजतक के हेल्थवेल्थ समिट में डॉक्टर रवि मलिक ने ये कहा. उन्होंने बच्चों की परवरिश में किन गलतियों को नहीं करना चाहिए इस बारे में भी बताया.
मलिक रेडिक्स हेल्थ केयर के सीएमडी व वरिष्ठ पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने बताया कि छोटे बच्चे आसपास के लोगों और दूसरे बच्चों के संपर्क में आने से कई तरह के वायरस के संपर्क में आते हैं. इससे बार-बार संक्रमण हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि हर बार बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर है.
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कब बुखार को हल्के में न लें?
सामान्य वायरल संक्रमण में बुखार, खांसी और सर्दी जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, शरीर में पानी की कमी, लगातार दस्त या रैशेज दिखाई दें तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. बच्चा बहुत सुस्त हो, पानी न पी रहा हो या उसकी हालत बिगड़ रही हो तो भी इंतजार न करें.
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बच्चों की परवरिश में ये गलतियां न करें
माता-पिता की पांच ऐसी आदतों की ओर ध्यान दिलाया, जिनसे बच्चों के व्यवहार और विकास पर असर पड़ सकता है.
हर बात में छूट देना: खाने, सोने और स्क्रीन देखने का समय तय न करना बच्चे में अनुशासन की कमी पैदा कर सकता है. उम्र के हिसाब से नियम बनाएं.
दूसरे बच्चों से तुलना: हर बच्चे की सीखने की क्षमता अलग होती है. मात- पिता के लिए जरूरी है कि तुलना करने के बजाय बच्चे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहें.
खुद उदाहरण न बनना: बच्चे माता-पिता को देखकर ज्यादा सीखते हैं. उनसे अच्छी आदतों की उम्मीद करने से पहले खुद उन्हें अपनाएं. बच्चों के सामने खुद एक उदाहरण बनें.
वादे तोड़ना: बार-बार वादा पूरा न करने से बच्चे का भरोसा कमजोर हो सकता है. इसलिए सोच-समझकर वादा करें और उसे निभाएं.
चिल्लाना या मारना: गुस्से में बच्चे को डराना या शारीरिक सजा देना सही तरीका नहीं है. प्यार के साथ नियम समझाना ज्यादा बेहतर है.
आजतक हेल्थ डेस्क