Healthwealth Summit: क्या जिंदगी में हर समय खुश रहना जरूरी है? न्यूरोसाइंटिस्ट ने दिया सफल जीवन का मंत्र

न्यूरोसाइंटिस्ट कुमार बागरोडिया ने बताया कि हमारी सोच, जीवन का मकसद और मानसिक मजबूती ही हमें मुश्किल समय में संभालती है. उन्होंने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार के साहस का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने गंभीर चोटों के बावजूद यात्रियों की जान बचाई.

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अपने विचार रखते कुमार बागरोडिया अपने विचार रखते कुमार बागरोडिया

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:40 PM IST

नौकरी में प्रमोशन न मिलना या किसी अपने का साथ छूट जाना जैसी घटनाएं किसी का भी मन खराब कर सकती है, लेकिन एक ही परिस्थिति में कुछ लोग टूट जाते हैं, जबकि कुछ लोग खुद को संभालकर आगे बढ़ते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है? इसका एक जवाब हमारी सोच, जीवन का मकसद और मानसिक मजबूती में छिपा है. आजतक की हेल्थ वेल्थ समिट में ये बातें न्यूरोसाइंटिस्ट कुमार बागरोडिया ने कही. 

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कुमार बागरोडिया ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके को-पायलट ने कॉकपिट में उन पर हमला कर दिया. सिर और हाथों पर गंभीर चोटें आईं. विमान तेजी से नीचे जा रहा था. ऐसे स्थिति में उनके सामाने दो ऑप्शन थे. पहला की हालात के सामने हार मान जाएं और दूसरा की इस स्थिति का सामने करें. उन्होंने दूसरे ऑप्शन पर काम किया और अपने को- पायलट के हमले में घायल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, उनकी कोशिश से यात्रियों को बचाने में मदद मिली.य ह घटना सिर्फ साहस की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी बताती है कि बेहद मुश्किल परिस्थिति में हमारी सोच, जीवन का मकसद और मानसिक मजबूती कितना जरूरी है. 

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एक जैसी परेशानी, लेकिन सबकी प्रतिक्रिया अलग क्यों?

कुमार बागरोडिया ने कहा कि हमारी मनोदशा यह बताती है कि आप इस समय कैसा महसूस कर रहे हैं, जबकि मानसिकता यह तय करने में भूमिका निभाती है कि आप किसी परिस्थिति को किस नजरिये से देखते हैं. मान लीजिए, आप ट्रैफिक में फंस गए हैं और आपकी फ्लाइट छूटने वाली है. कोई व्यक्ति घबराने लगता है, तो दूसरा सोचता है कि जो मेरे कंट्रोल में नहीं है उसके बारे में परेशान होने से क्या फायदा. अब देखिए एक से हालत में दो अलग- अलग लोगों के रिएकशन भी अलग हैं. अब जो चीजें कंट्रोल में नहीं है उनको लेकर परेशान होना ठीक नहीं है. 

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जीवन में सेंस ऑफ पर्पज 'जरूरी

कुमार बागरोडिया ने कहा कि जीवन में 'सेंस ऑफ पर्पज' यानी जीवन का उद्देश्य जरूरी है.  जब व्यक्ति के पास कोई बड़ा लक्ष्य होता है तो वह रोजमर्रा की परेशानियों को उसी नजरिये से देखना सीख सकता है. यह उद्देश्य डॉक्टर बनना, अपने परिवार को बेहतर जीवन देना, देश की सेवा करना या अपने काम में कुछ हासिल करना हो सकता है. इसलिए जिंदगी में हमेशा अपने ऊपर खुश रहने का दबाव न बनाएं. अपने लक्ष्य के लिए भी काम करते रहें. 

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