'समय' की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह कभी एक जैसा नहीं रहता. कुछ वक्त पहले तक स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना विवादों के ऐसे दौर से गुजर रहे थे, जहां उनके हर एक कदम पर तमाम उंगलियां उठ रही थीं. उनका चर्चित शो इंडियाज गॉट लेटेंट सोशल मीडिया के गलियारों से निकलकर सीधे पुलिस थानों और अदालत की चौखट तक पहुंच गया. चारों तरफ आलोचनाओं का दौर था, शिकायतें दर्ज हो रही थीं. उनके करियर पर संकट के बादल मंडरा रहे थे. लेकिन 'समय' ने करवट ली और आज वही समय रैना महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ मंच साझा करते हुए सम्मानित हो रहे हैं. यह पूरा घटनाक्रम इस बात की मिसाल है कि कैसे एक कलाकार ने विवादों की आंधी से लड़कर अपने दम पर समय का पहिया अपनी ओर घुमा लिया है.
सब कुछ ठीक ही चल रहा था. इंडियाज गॉट लेटेंट खूब देखा जा रहा था. पर शो के दौरान रणवीर इलाहाबादिया की विवादित टिप्पणी से विवाद खड़ा हुआ. मामला इतना बढ़ा कि शो के खिलाफ शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते समय रैना खुद कानूनी शिकंजे में फंस गए. अलग-अलग शहरों की पुलिस से लेकर अदालत तक मामला पहुंचा. पूछताछ हुई, तीखी प्रतिक्रियाएं आईं और हालात इतने बिगड़ गए कि रैना को अपना शो तक हटाना पड़ा. डिजिटल दुनिया की यही विडंबना है कि यहां लोकप्रियता जितनी तेजी से मिलती है, विवाद उतनी ही तेजी से किसी कलाकार की बनाई हुई पहचान को हिलाकर रख सकते हैं. उस दौर में यह सवाल उठना लाजिमी था कि क्या समय रैना इस विवाद के बाद फिर उसी मुकाम पर लौट पाएंगे?
लेकिन हार मान लेना समय रैना की फितरत में नहीं था. कुछ 'समय' की खामोशी के बाद उन्होंने अपने अंदाज में वापसी की और सोशल मीडिया पर I’m Still Here का मैसेज देकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. ये समय के मुंह से निकला महज एक वाक्य नहीं था बल्कि उन अटकलों का जवाब था, जब उनके करियर को लेकर तमाम अटकलें लग रही थीं. कानूनी लड़ाइयों और मानसिक दबाव के बीच उन्होंने अपने काम से दूरी नहीं बनाई. वापसी के इसी सफर में उन्होंने असम में आई भीषण बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री राहत कोष में 10 लाख रुपये डोनेट किए.
दिलचस्प बात यह है कि इंडियाज गॉट लेटेंट विवाद के बाद असम पुलिस ने भी रैना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. पुलिस की टीम उन्हें नोटिस देने उनके पुणे स्थित घर पहुंची थी. लेकिन बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए रैना की पहल सामने आई तो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद सोशल मीडिया पर उनके योगदान को साझा किया. यानी जिस राज्य की पुलिस कभी रैना के घर नोटिस लेकर पहुंची थी, उसी राज्य के मुख्यमंत्री बाद में उनके मदद भरे कदम की सार्वजनिक तौर पर सराहना करते नजर आए.
लेकिन 'समय' की कहानी का सबसे दिलचस्प पड़ाव अभी बाकी था. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों उनका सम्मानित होना किसी फिल्म की कहानी जैसा जरूर लगा, लेकिन यह उनके सफर की हकीकत थी. फडणवीस के साथ मंच पर उनकी मौजूदगी महज एक कार्यक्रम की तस्वीर नहीं थी, बल्कि उस कलाकार की वापसी का एक अहम पड़ाव थी, जिसके करियर पर कुछ वक्त पहले सवालिया निशान लगा दिए गए थे. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि रैना ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए अपनी पहचान बदलने की कोशिश नहीं की. वह उसी नाम, उसी अंदाज और उसी पहचान के साथ लौटे, जिसके साथ विवाद भी जुड़ा था.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस ने जब समय रैना को सम्मानित किया, तो मंच पर एक ऐसा पल भी आया जिसने पूरी महफिल लूट ली. मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रैना ने अपने चिर-परिचित मजाकिया और बेबाक अंदाज में पुलिस और सिस्टम पर ही तंज कस दिया. 'पहली बार साइबर सेल का अधिकारी किसी कॉमेडियन के घर पहुंचा है...' रैना की इस बात पर वहां मौजूद लोग खिलखिलाकर हंस पड़े. यह वही रैना थे, जिनके लिए कुछ वक्त पहले पुलिस की जांच परेशानी की वजह बनी हुई थी. अब वही अनुभव उनकी कॉमेडी का हिस्सा बनकर मंच पर लौट आया था. शायद यही उनकी वापसी की सबसे खास बात थी कि उन्होंने मुश्किल दौर के बाद अपनी आवाज और अपना अंदाज नहीं बदला.
यही शायद समय रैना के कमबैक की पूरी तस्वीर है. यह सिर्फ दोबारा मंच पर लौटने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस कलाकार की कहानी है, जिसके लिए एक समय में पुलिस केस और कोर्ट-कचहरी के पचड़े सबसे बड़ी खबर बन गए थे. शायद इसी वजह से आज समय रैना का जिक्र सिर्फ उस शो के संदर्भ में करना अधूरा होगा, जिसने उन्हें मुश्किल में डाला था. उनकी कहानी में अब वह कमबैक भी शामिल है, जब उन्होंने मंच पर खड़े होकर कहा था I am Still Here. वह भावुक पल भी शामिल है, जब वापसी के दौरान उनकी आंखें नम हो गई थीं. असम बाढ़ के वक्त की गई मदद भी इसी कहानी का हिस्सा है और अब फडणवीस के साथ मंच पर मिला सम्मान भी.
कुछ वक्त पहले सवाल था कि समय रैना का क्या होगा? क्या उनकी बनाई हुई पहचान दोबारा लौट पाएगी? आज इन सवालों का जवाब किसी बयान में नहीं, बल्कि हाल की तस्वीरों में दिखाई दे रहा है. वह फिर मंच पर हैं, फिर काम कर रहे हैं और फिर सुर्खियों में हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार खबर का केंद्र विवाद नहीं, बल्कि उन्हें मिला सम्मान है. कल जिस 'समय' के आगे सवाल खड़े थे, आज वही 'समय' जवाब बनकर सामने है. यही तो ‘समय’ की सबसे बड़ी खूबी है. बस समय-समय की बात है...
रितु तोमर