जिस घड़ी का हम सभी को बेसब्री से इंतजार था, वो अब फाइनली आ चुकी है. इंडिया की सबसे बड़ी फिल्म रामायण आज सिनेमाघरों में लग गई है. इसे दुनियाभर में बड़े स्तर पर प्रमोट किया गया. बाहर की ऑडियंस ने तो इसे देखकर कई बातें कहीं. लेकिन असल रिव्यू इंडिया के लोगों की तरफ से बनता है, क्योंकि रामायण की गाथा से हम सभी के भाव जुड़े हैं. बचपन से हम इसे देखते आए हैं, और पूरी कहानी हमें मालूम है. फिल्मों और टीवी पर भी रामायण को कई बार लाया जा चुका है. इनमें से कुछ ही लोगों के दिलों में उतरी है, जिसमें से एक टीवी पर रामानंद सागर की रामायण है और एक एनिमेटेड रामायण जो 90 के दशक में रिलीज हुई थी.
रामायण के हालिया वर्जन आदिपुरुष था, जिसने ऑडियंस को बहुत दुख दिए. उस फिल्म का खराब VFX, डायलॉग और किरदारों को प्रस्तुत करने का तरीका आज भी कई लोगों को बुरे सपने जैसा एहसास दिलाता है. ऐसे में जब नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी ने अपनी रामायण की घोषणा की, तो सब इसपर भी संदेह करने लगे. ऊपर से इसका बजट 4000 करोड़ रुपये जानकर लोगों को और हैरानी हुई कि ऐसा भी क्या बनाया जा रहा है. रामायण की कहानी हम सभी को पता है. लेकिन क्या डायरेक्टर नितेश तिवारी जो हमें दंगल, छिछोरे जैसी फिल्में दे चुके हैं, वो इस रामायण से कुछ अलग कर पाए हैं? आइए, विस्तार से बात करते हैं.
रामायण में क्या दिखाते हैं नमित मल्होत्रा?
आमतौर पर हमने जितनी भी रामायण की कहानी देखी है, वो भगवान राम से ही शुरू हो जाती है. लेकिन नितेश तिवारी ने अपनी वाली रामायण को रावण से शुरू किया है. रावण का क्या कुल है, और वो कैसे ब्रह्म देव और भगवान शिव को अपनी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न करता है, यही सब हम इस रामायण में देखते हैं. रावण लंका का राजा बनने के बाद आगे चलकर कई राज्यों पर विजय पाता है. इस दौरान उसके अधर्म की सीमा अपने चरम पर होती है. तभी देवराज इंद्र भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं, जिसके बाद वो भगवान राम के रूप में धरती पर अपना सांतवा अवतार लेते हैं. राजा दशरथ अपने चारों बेटों से बहुत प्रेम करते हैं, लेकिन राम उनके लिए सबसे प्यारे हैं.
राम और लक्ष्मण बड़े होकर गुरु विष्वमित्र से शिक्षा और शौर्य प्राप्त करते हैं. ताड़का-सुबाहू के वध से कहानी सीता के स्वयंवर तक चलती है. अयोध्या में सुख-समृद्धि का माहौल है क्योंकि राम का राज्याभिषेक है. लेकिन माता कैकयी राजा दशरथ से वादे मुताबिक दो वचन मांग लेती हैं, जिसके बाद राम-सीता और लक्ष्मण को वनवास जाना पड़ता है. वन में तीनों वास कर रहे हैं लेकिन तभी जनस्थान की राजकुमारी और रावण की बहन शूर्पणखा उनके पास आ जाती है.
वो राम से विवाह की जिद करती है, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम सीता को दिए वचन के कारण शूर्पणखा को मना कर देते हैं. इसके बाद लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं, और वो रोती हुई अपने भाइयों खर-दूषण और रावण के पास जाती है. इसके बाद राम, सीता और लक्ष्मण का सामना खर-दूषण और उसकी 14 हजार राक्षसों की सेना से होता है. फिल्म की कहानी सीता के हरण और रावण-जटायु के भीषण युद्ध तक दिखाई जाती है.
भरोसे पर खरे उतरे नितेश तिवारी
अभी तक हमने रामायण से जुड़े जितने क्लिप्स या प्रमोशन वीडियो देखे हैं, या कहें फिल्म की कास्ट अभी तक जहां भी प्रमोट करने पहुंची हैं वहां डायरेक्टर नितेश तिवारी का जिक्र बहुत कम हुआ है. मानो वो बैकसीट लिए बैठे थे, और रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और नमित मल्होत्रा के हाथों इसका प्रचार सौंप चुके थे. इस कारण से उनकी ज्यादा बात नहीं हुई. लेकिन नितेश तिवारी ने सही समय पर अपनी काबिलियत दिखाई और हमारे भरोसे पर खरे उतरे.
जिन भी लोगों ने नितेश तिवारी की पुरानी फिल्में देखी होंगी, उन्हें पता होगा कि उनकी फिल्मों में इमोशन कितने तगड़े और असरदार होते हैं. रामायण भी विजुअल्स से ज्यादा भावों की कहानी है. इस फिल्म में आपको भगवान राम के वो सभी भाव असरदार लगेंगे, जो उन्होंने अपने जीवन में महसूस किए. अपने राज्य को छोड़कर सालों तक वन में रहने का आदेश, पिता के अंतिम पलों में उनके साथ ना होना, पत्नी सीता का हरण हो जाना- ये सभी चीजें डायरेक्टर नितेश तिवारी आपको महसूस कराते हैं. यही नहीं जटायु की मौत का भी आपको काफी दुख पहुंचता है. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी शानदार है. कई मौकों पर ऐसा लगता नहीं है कि ये कोई इंडियन फिल्म है.
नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी ने इसे दुनिया के सामने पेश करने का फैसला किया, और फिल्म देखने के बाद वैसा लगता भी है. ये फिल्म का पहला हाल्फ काफी जबरदस्त है. रावण के राज से लेकर राम के वनवास जाने तक का सफर डायरेक्टर ने बड़ी खूबसूरती के साथ दर्शाया है. सेकेंड हाल्फ उसके मुकाबले थोड़ा हल्का महसूस होता है. कहानी में काफी कुछ दिखाने की कोशिश की गई, जिससे ये थोड़ी खिंची हुई सी लगने लगती है. लेकिन अंत आते-आते फिल्म खुद को संभाल भी लेती है.
क्या है बढ़िया, कहां रही कमी?
फिल्म की सबसे अच्छी और थोड़ी बुरी बात इसके विजुअल्स ही हैं. पूरी फिल्म ग्रीन स्क्रीन, स्टूडियो और स्टेज पर शूट की गई है, जो कभी-कभी थोड़ी फोटोजैनिक लगने लगती है. बुरे विजुअल्स में जितने भी दानव दिखाए गए हैं, वो थोड़े अनफिनिश्ड लगते हैं. ऐसा लगता है कि उनपर थोड़ा और काम बाकी था. लेकिन इसके अलावा जितने भी विजुअल्स दिखाए गए, चाहे वो लंका हो, मिथिला, आयोध्या, वन, देवलोक या पाताल लोक- सभी के विजुअल्स शानदार थे.
कहा जा सकता है कि ये रामायण का सबसे भव्य वर्जन है. अगर आपको उन दानवों के वीएफएक्स से कोई तकलीफ नहीं, तो पूरी फिल्म आपके लिए सही जाने वाली है क्योंकि वो चीज कहीं भी फिल्म का एक्सपीरियंस खराब नहीं करती. शायद यही वो बढ़िया बात भी है. आजकल की इंडियन फिल्मों के मुकाबले देखा जाए, तो नमित मल्होत्रा की रामायण के विजुअल्स काफी मजबूत और शानदार हैं. इसके अलावा फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर काफी जबरदस्त है. प्रोड्यूसर ने अपनी फिल्म के लिए हॉलीवुड के दिग्गज हांस जिमर और इंडियन लेजेंड ए आर रहमान को म्यूजिक कंपोज करने के लिए चुना, और उनका ये फैसला सही साबित हुआ है.
हांस जिमर और रहमान के दिए हुए बैकग्राउंड स्कोर काफी दमदार है, और सीन को काफी ऊपर उठाते हैं. खासतौर पर भगवान राम के वनवास जाने वाला सीन, उसमें दोनों ने साबित किया कि क्यों उन्हें ऑस्कर से सम्मानित किया गया. कई मौकों पर उनका म्यूजिक सीन में भारीपन लेकर आता है, जो फिल्म का एक्सपीरियंस और बढ़िया बनाता है. फिल्म में कई ऐसे मोमेंट्स हैं, जो आपको थिएटर से बाहर निकलकर याद रहने वाले हैं. यही चीज नितेश तिवारी की रामायण को खास बनाता है.
यहां देखें फिल्म का ट्रेलर:
कैसा है एक्टर्स का काम?
भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर को कास्ट किया गया, जिनका काम देखने में अच्छा है. उन्होंने राम की सादगी और चेहरे पर शांति लाने की अच्छी कोशिश की. अब अगर आप उनकी तुलना टीवी वाले राम यानी अरुण गोविल से करेंगे, तो उस मायने में उनका काम आपको फीका लग सकता है. मगर रणबीर ने भगवान के किरदार को पर्दे पर उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. उन्होंने काफी मेहनत की, जो फिल्म में दिखाई भी देती है.
बस वो जिस लेवल के एक्टर हैं, उस लिहाज से देखें तो रणबीर कपूर और बेहतर काम कर सकते थे. पार्ट 2 में उनसे उम्मीदें और बढ़ने वाली हैं. वहीं, माता सीता के रूप में साउथ की एक्ट्रेस साई पल्लवी को कास्ट किया गया. इस किरदार में उनकी आंखों में मासूमियत और चेहरे पर खूबसूरती साफ झलकी. कुछ-कुछ सीन्स में वो आपको मोहित भी करेंगी. लेकिन साई का काम आपको याद रह जाए, ऐसा नहीं हो सकेगा. सीता के रूप में उनके इमोशन्स ज्यादा हिट नहीं हो पाते हैं. रणबीर और साई के बीच वो केमिस्ट्री कहीं मिसिंग लगी है.
फिर बात अगर रवि दुबे की करें, तो लक्ष्मण के रोल में उनका काम काफी बढ़िया था. फिल्म में वो थोड़ा हंसी-मजाक करते नजर आए, लेकिन जब उनका गुस्सा दिखाई देता है तो आप उनके लिए चियर करते हैं. रकुल प्रीत सिंह भी इसमें शूर्पणखा बनी हैं, और सच कहें तो उम्मीद के मुकाबले उनका काम फिल्म में काफी अच्छा था. स्क्रीन पर उन्होंने अपनी खूबसूरती अच्छे से बिखेरी. अरुण गोविल भी राजा दशरथ के रोल में दिखे, और इसमें उन्हें देखकर काफी अच्छा महसूस हुआ. कई सालों पहले राम बनकर वो लोगों के दिलों पर छाए थे, अब दशरथ के किरदार में वो छाए हैं.
बाकी कास्ट में लारा दत्ता, अजिंक्य देव, शिशिर शर्मा, आदिनाथ कोठारे, विवेक ओबेरॉय, सौरभ सचदेवा, कुणाल कपूर, मुकेश तिवारी, शीबा चड्ढा, शोभना, हरीश उथमन भी हैं, जिन्होंने अपने दिए गए रोल को बखूबी निभाया. कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने फिर तारीफ के काबिल काम किया है.
लेकिन अगर कोई एक्टर इस फिल्म में सबसे ज्यादा छाया है, तो वो यश हैं. सबसे पहले उनकी स्क्रीन-प्रेजेंस की दाद देनी पड़ेगी. वो जब भी स्क्रीन पर आते हैं, आप उन्हें देखकर हैरान रह जाते हैं. रावण के रोल में उन्होंने जितनी बुराई थी, वो सब दिखाई और उसमें वाहवाही भी लूट गए. रावण का किरदार बुरा था, मगर यश ने अपने काम से उसे भी तारीफ दिलाई. फिल्म में कई ऐसे मौके मिलेंगे जब आप उनकी एक्टिंग रेंज देख पाएंगे और सोचेंगे कि अगर पहले पार्ट में रावण ऐसा है, तो दूसरे पार्ट में उसे हराने का मजा और भी ज्यादा आएगा.
कुल मिलाकर अगर आप एक अच्छी रामायण देखना चाहते हैं, और कुछ भव्य विजुअल्स के साथ इसका मजा उठाना चाहते हैं तो नितेश तिवारी की इस फिल्म को एक मौका जरूर दीजिए.
पर्व जैन