'डी कंपनी' से रामू की डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एंट्री, जल्द गाना गाते आएंगे नजर

सस्पेंस, थ्रिलर और गैंगस्टर फिल्मों के बादशाह कहे जाने वाले राम गोपाल वर्मा या कहें रामू जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म स्पार्क ओटीटी पर अपनी फिल्म 'डी कंपनी' लेकर आ रहे हैं.

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राम गोपाल वर्मा राम गोपाल वर्मा

जयदीप शुक्ला

  • मुंबई,
  • 13 मई 2021,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

सस्पेंस, थ्रिलर और गैंगस्टर फिल्मों के बादशाह कहे जाने वाले राम गोपाल वर्मा या कहें रामू जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म स्पार्क ओटीटी पर अपनी फिल्म 'डी कंपनी' लेकर आ रहे हैं. 

1990 में फिल्म 'शिवा' के साथ राइटर-प्रोड्यूसर और डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने हिंदी फिल्मों में कदम रखा. इस इंडस्ट्री में हिंदी फिल्मों के जरिए कुछ अच्छा करने की कोशिश की. रामू फिल्म 'सत्या', 'शूल', 'रंगीला', 'कंपनी', 'भूत' और 'सरकार' समेत ढेर सारी सुपरहिट हिंदी और तेलुगु फिल्में बना चुके हैं और अब जल्द ही एक और नई फिल्म 'डी कंपनी' के साथ अपने ही डिजिटल प्लेटफॉर्म स्पार्क ओटीटी पर एंट्री करने जा रहे हैं. आजतक के साथ खास बातचीत में रामू ने डिजिटल दुनिया में अपने नए प्रयोग के बारे में जानकारी दी.

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फिल्म को लेकर दी राम गोपाल वर्मा ने जानकारी
रामू कहते हैं कि जैसा कि आप जानते हैं कि मैं सस्पेंस, थ्रिलर, गैंगस्टर पर बेस्ड हार्डकोर सिनेमा बनाना पसंद करता हूं और मुझे लगता है कि इस तरह की फिल्मों के लिए ओटीटी सबसे उचित प्लेटफॉर्म है. दूसरा अगर मैं अपनी अपकमिंग फिल्म 'डी कंपनी' की बात करूं तो यह भारतीय इतिहास की सबसे बदनाम टेररिस्ट संस्था है और यह फिल्म उसी की बायोपिक है, क्योंकि इसे किसी सीमित समय सीमा में बांधना मुमकिन नहीं था, इसलिए मैंने इसकी वेब सीरीज बना दी और इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर रहा हूं. 

यह है फिल्म की कहानी
अपनी नई फिल्म 'डी कंपनी' की कहानी के बारे में बात करते हुए रामू कहते हैं कि हम सब लोगों ने दाऊद इब्राहिम का नाम सुना है, लेकिन हम यह नहीं जानते है कि कैसे एक गली का गुंडा, इंटरनेशनल गुंडा बन गय. कैसे इस 'डी कंपनी' का नाम पड़ा और पहली बार कब दाऊद के साथ इस नाम को जोड़ा गया तो यह सब चीजें मेरा ध्यान अपनी तरफ खींचती हैं. मैं इस प्रोजेक्ट पर काफी समय से रिसर्च कर रहा था और उसी दौरान मैं कुछ ऐसे लोगों से मिला जो 1980 में इस गैंग का हिस्सा रह चुके थे और जिन्हें इस 'डी कंपनी' के बारे में लगभग सभी कुछ पता था. तो इस तरह से मैंने यह रिसर्च बेस्ड फिल्म बनाई है. यह पहली बार नहीं है. इस थीम पर पहले भी फिल्में बनाई गई हैं. सत्या और कंपनी को काफी लोकप्रियता मिली, 20 साल पहले आई सत्या मेरे लिए इस थीम का सबसे उम्दा प्रस्तुति थी.  

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ढेर सारी फिल्मों के राइटर, प्रोड्यूसर और डारेक्टर रह चुके है रामू जल्द ही अब सिंगिंग की फील्ड में भी हाथ आजमाने जा रहे हैं और इस बारे में बात करते हुए रामू हंसते हुए कहते हैं कि हां यह सच है कि मैं इस वेब सीरीज में सिंगिंग कर रहा हूं. पर फिलहाल, मैं उसे अपना टैलेंट नहीं कह सकता हूं, जबतक दर्शक उसे सुनकर पसंद नहीं कर लेते हैं. 

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अपकमिंग प्रोजेक्ट की बात करते हुए रामू कहते हैं कि मैं एक ऐसी फिल्म पर काम कर रहा हूं, जिसका नाम 'टैबलेट' है, जैसा की हम जानते हैं कि हर इंसान बूढ़ा होकर मरने से डरता है तो इस फिल्म में मैं एक ऐसे समय को दिखाऊंगा जहां एक ऐसी दवा बन जाती है, जिसको खाने से न तो कई बूढ़ा होता है और न ही कोई मरता है. तो एक दवा जो लोगों को अमर बना रही है वह कैसे दुनिया के लिए अभिशाप बन जाती है, उसी की कहानी है मेरी फिल्म 'टैबलेट'. 

 

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