नेटफ्लिक्स की नई सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ इन दिनों दर्शकों को खूब भा रही है. 1999 के करगिल युद्ध की घटनाओं को भारतीय वायुसेना के नजरिए से दिखाने वाली यह सीरीज युद्ध शुरू होने से कुछ महीने पहले की घटनाओं से शुरू होती है. कहानी उस दौर में पहुंचती है, जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी दोनों देशों के बीच शांति की पहल के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के निमंत्रण पर लाहौर गए थे.
वाजपेयी की यह यात्रा ऐतिहासिक थी. वह विशेष बस से दिल्ली से लाहौर थे और उनके साथ कई नामचीन हस्तियां भी पाकिस्तान पहुंची थीं, जिनमें शामिल थे हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता देव आनंद. लेकिन खास बात यह थी कि खुद नवाज शरीफ की इच्छा थी कि इस दौरान देव आनंद भी पाकिस्तान आएं.
ऑपरेशन सफेद सागर में नवाज शरीफ का किरदार विनय पाठक ने निभाया है. एक सीन में वह देव आनंद से अपनी मुलाकात और उनके प्रति अपने लगाव की बात करते नजर आते हैं. पर्दे पर दिखाई गई यह घटना केवल कल्पना नहीं थी. असल जिंदगी में भी नवाज शरीफ, देव आनंद के बहुत बड़े प्रशंसक थे.
बता दें कि ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’, ‘सीआईडी’, ‘टैक्सी ड्राइवर’ और ‘जॉनी मेरा नाम’ जैसी फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ने वाले देव आनंद का जन्म लाहौर के पास हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई भी लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से की थी. बंटवारे से पहले ही वह मुंबई आ गए थे और उसके बाद उन्हें अपने शहर लौटने का मौका सीधे 1999 में मिला.
‘अगर संभव हो तो देव आनंद को भी साथ ले आइए...’
पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी के मुताबिक, नवाज शरीफ ने ही वाजपेयी से देव आनंद को अपने साथ लाने का अनुरोध किया था. 2024 में प्रकाशित एक लेख में पुण्य प्रसून बाजपेयी ने इस किस्से का जिक्र किया था. बताया जाता है कि वाजपेयी ने पाकिस्तान रवाना होने से महज एक दिन पहले देव आनंद को फोन कर अपनी यात्रा के बारे में बताया था.
उन्होंने अभिनेता से कहा था कि कल तैयार रहिए. कुछ अधिकारी आपके घर आएंगे. दिल्ली आइए. हां, अपना पासपोर्ट रखना मत भूलिएगा. आपको मेरे साथ लाहौर चलना है. पड़ोसी मुल्क में आपके बहुत से प्रशंसक भी हैं.
दरअसल, वाजपेयी ने नवाज शरीफ से पूछा था कि वह भारत से अपने लिए क्या चाहते हैं. इसके जवाब में नवाज ने कथित तौर पर कहा था कि अगर संभव हो तो देव आनंद को भी अपने साथ ले आइए. यही वह आग्रह था, जिसने देव आनंद की उस ऐतिहासिक लाहौर यात्रा का रास्ता खोला.
देव आनंद ने कहा था- कि मैं दोनों मुल्कों को इसी तरह एक साथ करने आया हूं. देव आनंद और नवाज शरीफ की पहली मुलाकात भी बेहद दिलचस्प थी. एर रिपोर्ट में नवाज शरीफ ने उस मुलाकात को याद करते हुए बताया था कि जैसे ही बस वाघा पहुंची, देव आनंद बस से उतरकर सीधे उनकी ओर आए और दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया. इसके बाद देव आनंद ने नवाज शरीफ और वाजपेयी, दोनों का हाथ अपने हाथ में लिया और उन्हें एक-दूसरे के करीब लाते हुए कहा कि मैं दोनों मुल्कों को इसी तरह एक साथ करने आया हूं.
नवाज शरीफ ने देव आनंद की ऊर्जा और उत्साह को याद करते हुए कहा था कि उनमें उस समय भी किसी नौजवान जैसी ऊर्जा थी. वाजपेयी के साथ लाहौर पहुंचे देव आनंद ने वहां लाहौर किले और अपने पुराने कॉलेज गवर्नमेंट कॉलेज का दौरा किया था. नवाज के मुताबिक, उस दौरान देव आनंद बेहद भावुक थे. वह बार-बार कहते थे कि मैं अपने शहर आया हूं. मैं यहां फिल्म बनाना चाहता हूं. उनके लिए यह सिर्फ पाकिस्तान की यात्रा नहीं थी, बल्कि उस शहर में लौटना था जहां उनका बचपन और उनकी पढ़ाई की यादें जुड़ी थीं.
देव आनंद की फिल्मों के दीवाने थे नवाज शरीफ
देव आनंद और नवाज शरीफ की यह मुलाकात आगे चलकर एक लंबी दोस्ती में बदल गई. 1999 के बाद जब नवाज शरीफ निर्वासन में जेद्दा चले गए, तब भी देव आनंद उनसे संपर्क में रहे और उनका हालचाल पूछते थे.
2011 में देव आनंद के निधन के बाद नवाज शरीफ ने बताया था कि देव आनंद उनसे मिलने और उनका हाल जानने के लिए फोन किया करते थे. दोनों की लंदन में भी कई मुलाकातें हुईं. एक बार दोनों ने हाइड पार्क में साथ टहलने का भी जिक्र नवाज ने किया था. नवाज ने कहा था कि देव आनंद से मिलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था और वह अभिनेता को बेहद पसंद करते थे.
देव आनंद के निधन के बाद नवाज शरीफ ने बताया था कि अभिनेता से उनकी आखिरी बातचीत करीब दो साल पहले हुई थी. उस बातचीत में देव आनंद ने उनसे एक वादा किया था.उन्होंने कहा था कि मैं तुम्हें मिलने पाकिस्तान आऊंगा, नवाज लेकिन देव आनंद का यह वादा पूरा नहीं हो सका. 2011 में उनके निधन के साथ ही वह मुलाकात हमेशा के लिए अधूरी रह गई.
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