देव आनंद (Dev Anand) हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता, निर्माता और निर्देशक थे. उनका पूरा नाम धर्मदेव पिशोरीमल आनंद था. उनका जन्म 26 सितंबर 1923 को ब्रिटिश भारत के शकरगढ़, गुरदासपुर जिला (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था. उनके पिता पिशोरीमल आनंद पेशे से वकील थे. शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर (अब पाकिस्तान में) से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक किया. इसके बाद उन्होंने फिल्मों में करियर बनाने के लिए मुंबई का रुख किया.
देव आनंद ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1946 में फिल्म 'हम एक हैं' से की. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे हिंदी फिल्म उद्योग में अपनी पहचान बनाई. वर्ष 1949 में उन्होंने अपने बड़े भाई चेतन आनंद के साथ मिलकर नवकेतन फिल्म्स की स्थापना की. इस बैनर के तहत कई सफल फिल्मों का निर्माण किया गया.
1950 और 1960 के दशक में देव आनंद ने लगातार कई फिल्मों में अभिनय किया. उनकी प्रमुख फिल्मों में 'बाज़ी' (1951), 'टैक्सी ड्राइवर' (1954), 'सीआईडी' (1956), 'पेइंग गेस्ट' (1957), 'काला पानी' (1958), 'काला बाजार' (1960), 'हम दोनों' (1961), 'तेरे घर के सामने' (1963), 'गाइड' (1965), 'ज्वेल थीफ' (1967), 'जॉनी मेरा नाम' (1970), 'हरे रामा हरे कृष्णा' (1971), 'हीरा पन्ना' (1973) और 'देस परदेस' (1978) शामिल हैं.
देव आनंद ने अभिनय के साथ-साथ कई फिल्मों का निर्देशन और निर्माण भी किया. उन्होंने 'प्रेम पुजारी', 'हरे रामा हरे कृष्णा', 'इश्क इश्क इश्क', 'स्वामी दादा', 'अव्वल नंबर' और 'सेंसर' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. उनकी फिल्म 'गाइड' को भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है. यह फिल्म आर. के. नारायण के उपन्यास The Guide पर आधारित थी.
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो देव आनंद ने अभिनेत्री कल्पना कार्तिक (वास्तविक नाम मोना सिंह) से विवाह किया. उनके दो बच्चे हैं, सुनील आनंद और देविना आनंद.
सरकार ने भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2002 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया. इसके अलावा उन्हें कई फिल्म पुरस्कार भी मिले.
देव आनंद ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक फिल्मों में सक्रिय रहना जारी रखा. 3 दिसंबर 2011 को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. उस समय उनकी आयु 88 वर्ष थी.