सपा-कांग्रेस गठबंधन में क्या सब कुछ ठीक है! सभी सीटों पर लड़ने की तैयारी में क्यों जुटे दोनों दल

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 के मद्देनजर सपा और कांग्रेस में गठबंधन पर सहमति के बावजूद सीटों के बंटवारे को लेकर पेच फंसा हुआ है. ऐसे में दोनों ही दल सभी 403 सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस जहां अपनी बार्गेनिंग पावर बचाने के लिए जल्द सीट-शेयरिंग चाहती है, वहीं सपा जल्दबाजी के मूड में नहीं दिख रही है.

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यूपी में सपा और कांग्रेस में सीट शेयरिंग का पेच कहां फंसा (Photo: PTI) यूपी में सपा और कांग्रेस में सीट शेयरिंग का पेच कहां फंसा (Photo: PTI)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान दोनों ही पार्टियां कर चुकी हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव कई मौकों पर कह चुके हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनावी किस्मत आजमाएंगे. कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी यही मानता है कि एक साथ जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.

बसपा प्रमुख मायावती पहले ही कांग्रेस या समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के कयास खारिज कर चुकी हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी लगातार अखिलेश यादव से गठबंधन की गुहार लगा रहे हैं. आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद भी गठबंधन के लिए विकल्प खुला रखे हैं, लेकिन गठबंधन में जाएंगे या नहीं, इस पर अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं हैं.

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यूपी में चर्चा कांग्रेस और सपा की दोस्ती को लेकर है. क्या कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन में सब कुछ सामान्य है! क्या दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग आसानी से हो जाएगी या फिर कुछ ऐसा पेंच इस गठबंधन में फंस रहा है, जिससे यह गठबंधन अभी सियासी मझधार में है. सपा और कांग्रेस दोनों सभी सीटों पर अपनी-अपनी तैयारी में जुटी हुई हैं.

चंद्रशेखर-मायावती से कांग्रेस मिलाएगी हाथ?

उत्तर प्रदेश में भले ही सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हों, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं है. कांग्रेस पार्टी का एक वर्ग मायावती या चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए इच्छुक है. माना जा रहा है कि राहुल गांधी अखिलेश यादव के साथ ही गठबंधन में जाने का मन तय कर चुके हैं, इसलिए दूसरे दलों के लिए फिलहाल कोई दरवाजा नहीं खुला है.

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कांग्रेस का दावा है कि वह अखिलेश यादव के साथ ही गठबंधन में जाएगी, लेकिन अपनी शर्तों पर ही मिलकर चुनाव लड़ेगी. इस बार अखिलेश यादव यह नहीं तय करेंगे कि कांग्रेस किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बल्कि कांग्रेस खुद अपनी सीटें तय करेगी. कांग्रेस अपनी सीटें खुद तय करेगी और उम्मीदवार भी. वहीं सपा अपनी तैयारियों को लेकर बिल्कुल साफ कह चुकी है कि अगर गठबंधन में कोई पेंच फंसा तो वह सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार है.

कांग्रेस-सपा की कदमताल क्यों नहीं मिल रहे

कांग्रेस के भीतर जल्दबाजी का माहौल है. कांग्रेस यूपी में सपा के साथ गठबंधन करके ही चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन जल्द से जल्द सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय कर लेना चाहती है. कांग्रेस के नेता यह जानना चाहते हैं कि पार्टी को किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ना है, उन सीटों के समीकरण क्या हैं और किसे चुनाव लड़ाकर जीता जा सकता है.

वहीं, समाजवादी पार्टी सीट बंटवारे में कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही है. समाजवादी पार्टी यूपी में अपनी तैयारियों को मुकम्मल कर लेने के बाद सीटों के बंटवारे पर बात करना चाहती है, जबकि कांग्रेस पार्टी को लगता है कि अगर गठबंधन में सीटें फाइनल करने में देरी हुई तो फिर उसकी बार्गेनिंग पावर खत्म हो जाएगी और तब अखिलेश यादव की दया पर ही गठबंधन करना पड़ेगा.

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कांग्रेस पार्टी के नेता और पार्टी के मुस्लिम चेहरे सांसद इमरान मसूद अक्टूबर तक हर हाल में गठबंधन में सीटों की संख्या और सीटों के नाम तय कर लेना चाहते हैं. इमरान मसूद ने कहा कि अगर गठबंधन में देरी हुई तो कांग्रेस अपनी बढ़त खो देगी. उन्होंने कहा है कि अगर गठबंधन होना है, तो उसे तुरंत अंतिम रूप (फाइनल) दिया जाना चाहिए. सीटों के बंटवारे में हो रही देरी से जमीन पर नुकसान हो रहा है, इससे कोई फायदा नहीं मिलेगा.

सपा-कांग्रेस में शह-मात का खेल जारी

सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर तैयारी के दावे कर रही हैं, लेकिन सपा और कांग्रेस दोनों को मालूम है कि सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की क्षमता दोनों में से किसी पार्टी की नहीं है. पश्चिमी यूपी में सपा कमजोर है तो बाकी पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का संगठन न के बराबर है. इस तरह सपा और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी सियासी कमजोरियों को भी समझ रही हैं.

यूपी में सपा और कांग्रेस दोनों तरफ से दावे और प्रतिदावे हो रहे हैं, लेकिन दोनों को मालूम है कि बगैर एक साथ आए चुनाव में किसी की दाल गलने वाली नहीं है. सभी अपनी-अपनी बार्गेनिंग पावर को मजबूत रखकर गठबंधन की मेज पर बैठना चाहते हैं.

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इमरान मसूद ने दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी ने डेढ़ सौ से ज्यादा सीटों की सूची समाजवादी पार्टी को सौंप दी है, लेकिन समाजवादी पार्टी की तरफ से गठबंधन की बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है. अखिलेश यादव की तरफ से एक ही बात कही जा रही है कि हमारे लिए सीट शेयरिंग में सीटों की संख्या का मतलब नहीं है, बल्कि जीत की गारंटी मायने रखती है. जो जहां पर जीत सकता है, वहां पर वह चुनाव लड़ेगा.

सपा-कांग्रेस में अभी तक अनौपचारिक तौर पर भले ही गठबंधन को लेकर कोई सुगबुगाहट शुरू हुई हो, लेकिन औपचारिक तौर पर कोई बातचीत शुरू नहीं हुई है. समाजवादी पार्टी इसे चुनाव के ऐलान तक ले जाना चाहती है तो कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता गठबंधन के साथ सीट शेयरिंग सब कुछ जल्द तय कर लेना चाहते हैं.

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