उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों ने एक नए और प्रभावशाली वोट बैंक पर अपनी नजरें टिका दी हैं. ये वोट बैंक है Gen-Z यानी युवा मतदाता, जिनकी हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी मानी जा रही है. माना जा रहा है कि जेन-जी कई सीटों पर जीत-हार का अंतर तय करने की क्षमता रखता है.
यूपी की चुनावी राजनीति का इतिहास बताता है कि यहां कुछ फीसदी वोटों का बदलाव भी सीटों के आंकड़ों में बड़ा उलटफेर कर सकता है. यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल युवा मतदाताओं को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच वोट शेयर का अंतर बेहद कम था. समाजवादी पार्टी को 29.15 फीसदी वोट मिले थे, जबकि BSP का वोट शेयर 25.91 फीसदी रहा. दोनों दलों के बीच अंतर सिर्फ 3.24 प्रतिशत था.
लेकिन सीटों के नतीजों में ये अंतर काफी बड़ा दिखाई दिया. सपा ने 224 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, जबकि BSP 80 सीटों पर सिमट गई. वहीं बीजेपी करीब 15 फीसदी वोट शेयर के साथ 47 सीटें जीतने में सफल रही.
2022: 7% वोट बढ़त ने बदल दिया सीटों का गणित
2022 के विधानसभा चुनाव में भी वोट शेयर और सीटों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. बीजेपी नेतृत्व वाले NDA गठबंधन को 43.82 फीसदी वोट मिले और गठबंधन ने 273 सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं समाजवादी पार्टी गठबंधन को 36.60 फीसदी वोट मिले और उसे 125 सीटें हासिल हुईं. यानी करीब 7 फीसदी वोट शेयर का अंतर सीटों में 148 सीटों के बड़े फासले में बदल गया.
क्यों अहम हो गया है Gen-Z वोटर?
राजनीतिक दलों का मानना है कि पहली बार मतदान करने वाले और युवा मतदाता पारंपरिक चुनावी समीकरणों से अलग मुद्दों पर फैसला ले सकते हैं. रोजगार, शिक्षा, डिजिटल अवसर, महंगाई, विकास और बेहतर भविष्य जैसे मुद्दे इस वर्ग के लिए अहम माने जा रहे हैं.
इसी वजह से बीजेपी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत सभी दल युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें अपने पक्ष में जोड़ने की रणनीति तैयार कर रहे हैं.
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2027 में निर्णायक हो सकता है युवा वोट
उत्तर प्रदेश का अगला विधानसभा चुनाव पुराने जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के साथ-साथ नए युवा वोट बैंक के प्रभाव से भी तय हो सकता है. करीबी मुकाबले वाली सीटों पर Gen-Z मतदाताओं का रुझान चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है. यूपी की राजनीति में जहां कई बार कुछ प्रतिशत वोटों ने सरकारें बनाई और गिराई हैं, वहां 2027 में युवा वोटर सबसे बड़ा फैक्टर बन सकता है.
सिमर चावला