मां विंध्यवासिनी के धाम से चुनार के किले तक: मिर्जापुर जिले की ऐतिहासिक विरासत और बदलती सियासत

मिर्जापुर गंगा किनारे बसा विंध्य क्षेत्र का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व औद्योगिक केंद्र है. यह मां विंध्यवासिनी धाम, चुनार किले, कालीन-पीतल उद्योग और गुलाबी बलुआ पत्थर के लिए विश्वप्रसिद्ध है. राजनीतिक रूप से पटेल, बिंद व दलित बहुल इस जिले की मिर्जापुर लोकसभा सीट से अनुप्रिया पटेल सांसद हैं, जबकि 2022 के चुनाव में एनडीए ने सभी 5 विधानसभा सीटों पर क्लीन स्वीप किया था.

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मिर्जापुर जिले का सियासी हाल (Photo- ITG) मिर्जापुर जिले का सियासी हाल (Photo- ITG)

aajtak.in

  • मिर्जापुर ,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:16 PM IST

यूपी के विंध्य क्षेत्र में बसा मिर्जापुर जिला सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, औद्योगिक और राजनीतिक रूप से बेहद समृद्ध एवं अहम स्थान रखता है. विंध्याचल की गोद में बसा और मां विंध्यवासिनी के पावन धाम के लिए विश्व प्रसिद्ध यह जिला वाराणसी, प्रयागराज, भदोही, सोनभद्र व मध्य प्रदेश की सीमाओं को छूता है. गंगा नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र अपनी नेचुरल ब्यूटी, ऐतिहासिक विरासत, कालीन-पीतल उद्योग और राजनीतिक हलचल के लिए जाना जाता है. जिले की अर्थव्यवस्था कृषि, हस्तशिल्प, खनिज संसाधन और लघु उद्योगों पर निर्भर है. 

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आपको बता दें कि मिर्जापुर क्षेत्र का उल्लेख पौराणिक काल से लेकर मुगल और ब्रिटिश काल तक प्रमुखता से मिलता है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, विंध्याचल पर्वत श्रृंखला का यह क्षेत्र महर्षि गर्ग, अत्रि और जमदग्नि जैसे महान ऋषियों की तपोभूमि रहा है. इसके अलावा विंध्याचल में स्थित मां विंध्यवासिनी देवी का मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है. मान्यता है कि देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के बाद यहीं निवास किया था. विंध्याचल के पास स्थित अष्टभुजा देवी और कालीखोह मंदिर त्रिकोण यात्रा का प्रमुख हिस्सा हैं, जहां वर्ष भर लाखों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं।

चुनार का किला, उत्तर भारत की सत्ता का केंद्र 

मिर्जापुर की ऐतिहासिक पहचान चुनार के किले से भी जुड़ी है. एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला कई सदी उत्तर भारत की सत्ता का केंद्र रहा. इस किले का संबंध राजा विक्रमादित्य, शेरशाह सूरी, हुमायूं, सम्राट अकबर और अवध के नवाबों से रहा है. 

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स्वतंत्र जिले का दर्जा 

'मिर्जापुर' शब्द की उत्पत्ति 'मिर्जा' (अमीर या राजकुमार) और 'पुर' (नगर) से मिलकर हुई है. 18वीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल के दौरान व्यापार में आसानी के लिए मिर्जापुर को एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया. ब्रिटिश काल में 1830 के दशक में इसे एक स्वतंत्र जिले का दर्जा दिया गया था. 

कालीन, पीतल और बर्तन उद्योग

मिर्जापुर और इसका पड़ोसी जिला भदोही का कालीन उद्योग पूरी दुनिया में फेमस है. यहां हाथ से बुने गए ऊनी और रेशमी कालीनों अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के देशों में निर्यात किया जाता है. साथ ही पीतल के हस्तनिर्मित बर्तन और ढलाई का काम देश भर में जाना जाता है. 'मिर्जापुरी कलश' और पूजा-पाठ के पीतल के बर्तन यहां के व्यापार का मुख्य हिस्सा हैं. 

चुनार और विंध्याचल का गुलाबी व लाल बलुआ पत्थर ऐतिहासिक इमारतों और वाराणसी के घाटों की शान है. खनन उद्योग यहां गिट्टी, बोल्डर और बालू आपूर्ति का बड़ा जरिया है. औद्योगिक क्षेत्र में जेपी सीमेंट फैक्ट्री (चुनार) और कई इकाइयां स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा रोजगार को मजबूती देती हैं. 

मिर्जापुर का राजनीतिक समीकरण एवं सामाजिक ताना-बाना

गौरतलब है कि मिर्जापुर की सियासत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तुलना में बिल्कुल अलग है. यहां पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र का मिला-जुला राजनीतिक असर दिखता है. चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) की आबादी सबसे निर्णायक है. 

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मिर्जापुर जिले की राजनीति में पटेल समुदाय सबसे शक्तिशाली और निर्णायक वोट बैंक माना जाता है. अपना दल (सोनेलाल) और समाजवादी पार्टी दोनों ही इस वोट बैंक पर मजबूत पकड़ का दावा करते हैं. बिंद, निषाद, मौर्य/कुशवाहा और यादव मतदाताओं की आबादी भी कई सीटों पर हार-जीत का अंतर तय करती है. पठारी इलाकों में आदिवासी/दलित समुदाय (विशेषकर कोल और चेरू जनजाति) तथा मैदानी भागों में जाटव और पासी मतदाता बड़ी संख्या में हैं. विंध्याचल और शहरी क्षेत्रों में सवर्ण मतदाताओं का अच्छा-खासा प्रभाव है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा के कैडर वोट बैंक का हिस्सा रहे हैं. 

मिर्जापुर लोकसभा सीट 

वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल सांसद हैं. वह 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर हैट्रिक बना चुकी हैं. मिर्जापुर को अपना दल (एस) का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है. 

मिर्जापुर जिले की 5 विधानसभा सीटें: 2017 और 2022 का पूरा हाल

मालूम हो कि मिर्जापुर जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं- छानबे (SC), मझवां, मिर्जापुर सदर, चुनार, और मड़िहान. 2017 के चुनाव में एनडीए (भाजपा +अपना दल एस) गठबंधन ने जिले की सभी 5 सीटों पर क्लीन स्वीप किया था. 2022 में भी एनडीए गठबंधन ने अपना दबदबा बरकरार रखते हुए सभी 5 सीटों पर दोबारा परचम फहराया. 

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मिर्जापुर जिला विधानसभा चुनाव परिणाम 2022

छानबे (SC): राहुल प्रकाश कोल (अपना दल-एस) ने सपा की कीर्ति कोल को हराया. राहुल के निधन के बाद 2023 उपचुनाव में रिंकी कोल जीतीं. 

मझवां: डॉ. विनोद कुमार बिंद (निषाद पार्टी/भाजपा) ने सपा की डॉ. ज्योति बिंद को शिकस्त दी. 

मिर्जापुर (सदर): विंध्याचल मंदिर के पुजारी रत्नाकर मिश्र (भाजपा) ने सपा के कैलाश नाथ चौरसिया को हराया. 

चुनार: अनुराग सिंह (भाजपा) ने सपा के रामराज पटेल को जिले की सबसे बड़ी 48,071 वोटों की बढ़त से हराया.

मड़िहान: रमाशंकर सिंह पटेल (भाजपा) ने सपा के रविलाल पटेल को पराजित किया.

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