'राजनेता का चुनाव लड़ना आजीविका जैसा अधिकार', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी नंदलाल राय को दी जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी अदालत द्वारा अप्रैल 2025 में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की सजा निलंबित कर दी है. कोर्ट ने उसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए जमानत दे दी है.

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आनंद राज

  • प्रयागराज ,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:38 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वाराणसी की अदालत से अप्रैल 2025 में उम्रकैद की सजा पाए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की सजा निलंबित करके उसे  जमानत दे दी है. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने यह आदेश इसलिए दिया ताकि अपीलकर्ता 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक स्वतंत्र उम्मीदवार या भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ सके. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनेताओं का मतदाताओं के प्रति कर्तव्य होता है और दोषसिद्धि पर रोक न मिलने से वे चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित हो सकते हैं.

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परिस्थितियों और गवाही पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने दलील दी कि यह पूरा मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. बचाव पक्ष के अनुसार जांच में राय के नाम का देर से खुलासा हुआ था. इसके साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और कथित हत्या के हथियार की बरामदगी को भी संदिग्ध बताया गया. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत से राहत देने की मांग की गई थी.

राम जन्मभूमि आंदोलन और राजनीतिक पृष्ठभूमि

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नंदलाल राय राम जन्मभूमि आंदोलन के सक्रिय सदस्य प्रमोद कुमार निगम की हत्या का दोषी है. रिपोर्टों में उसका संबंध गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी से भी बताया गया है. हालांकि, वकील ने स्पष्ट किया कि राय सजा से पहले भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता था. वह 2027 में निर्दलीय या संभवतः भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में उतरना चाहता है.

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रोजी-रोटी और जीवन के अधिकार पर टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि एक आम आदमी का आजीविका का अधिकार किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है. अदालत ने माना कि अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए ताकि वह अपनी अपील पर अंतिम फैसला आने तक सम्मानपूर्वक जीवित रह सके. इस आधार पर पीठ ने नंदलाल राय की सजा को निलंबित कर दिया. 

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