'हम CM तब बनते हैं, जब चुनाव नहीं लड़ते हैं', वाराणसी से इलेक्शन लड़ने पर हंसकर बोले अखिलेश

वाराणसी पहुंचे अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर दिलचस्प बयान दिया. जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वे वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे तो अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि हम सीएम तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं, इसलिए शुभ काम करेंगे.

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अखिलेश 2012-18 तक विधान परिषद के सदस्य थे. (Photo: PTI) अखिलेश 2012-18 तक विधान परिषद के सदस्य थे. (Photo: PTI)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी,
  • 03 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:03 PM IST

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने उनके चुनाव लड़ने की अटकलों को और दिलचस्प बना दिया है. मंगलवार को वाराणसी में उनसे जब पूछा गया कि क्या वह आगामी विधानसभा चुनाव में यहां से मैदान में उतरेंगे, तो उन्होंने सीधे हां या ना में जवाब देने के बजाय अपने मुख्यमंत्री बनने के पुराने राजनीतिक सफर का हवाला दिया.

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अखिलेश यादव ने कहा, "हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं, इसलिए शुभ काम करेंगे." उन्होंने काशी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि उन्हें शुभ और खराब समय का ज्ञान है. उनके इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका और चुनाव लड़ने के फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है.

अखिलेश का यह जवाब इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो विधान परिषद के सदस्य थे. 2012 में जब समाजवादी पार्टी सत्ता में आई थी, तब अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उस समय वह लोकसभा सांसद थे. बाद में उन्होंने कन्नौज लोकसभा सीट छोड़कर विधान परिषद का रास्ता चुना था. यानी मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्होंने सीधे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था. अखिलेश यादव 2012 से 2018 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे थे.

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2027 में किस सीट से उतरेंगे अखिलेश?

अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे के दौरान उनके चुनाव लड़ने को लेकर सवाल इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है. समाजवादी पार्टी इस चुनाव में बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी कर रही है. ऐसे में अखिलेश किस सीट से चुनाव लड़ेंगे, यह पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है.

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और पूर्वांचल की राजनीति में इसकी अहम भूमिका है. अखिलेश ने अपने बयान में किसी सीट का नाम नहीं लिया और न ही यह साफ किया कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या नहीं.

अयोध्या से चुनाव लड़ने पर भी हुई थी चर्चा

बता दें कि इससे पहले अक्टूबर में अखिलेश यादव अयोध्या पहुंचे थे. उन्होंने सीएम योगी को सीधी चुनौती देते हुए कहा था कि बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री अगर इतने ही आश्वस्त हैं तो उन्हें अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाना चाहिए. 

अखिलेश के चैलेंज पर सीएम योगी ने जवाब देते हुए कहा था कि अखिलेश उनसे कहते हैं कि मुख्यमंत्री अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखा दें. अयोध्या हमारा पावन धाम है, मैं इसलिए जाता हूं कि जिससे अयोध्या के विकास में कोई कोताही न हो, उत्तरप्रदेश के पहचान पर कोई कलंक न लगे.

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सीएम योगी ने तब कहा था कि जो अयोध्या गंदगी का अंबार बन गई थी आज वह अयोध्या रामराज्य का उदाहरण बनकर त्रेतायुग का स्मरण करवा रही है. अखिलेश को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि वे उनको ऑफर करते हैं आप भी अयोध्या से नामांकन करिए, मैं भी करता हूं,चलिए एकबार किस्मत आजमा लिया जाए.

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष फरवरी-मार्च में चुनाव हो सकते हैं. 

यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के सबसे बड़ा गुंडा होने के बयान पर कहा अखिलेश यादव ने कहा कि सबसे बड़े माफिया जो अपने आप को कह रहे हैं वह अपने कैबिनेट में बैठे हुए माफियाओं को डराना चाहते हैं. 

अखिलेश ने कहा कि अभी बीजेपी के 100 विधायकों के सीट छीन जाएंगे, लेकिन 200 सीट जाएगी. जिसमे पहले मंत्रियों की जाएगी.

एमएलसी चुनाव के नतीजे से गदगद और खासकर बनारस की दोनों एमएलसी सीट हासिल कर लेने के पीछे कारण बताते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पाल समाज को लाठी मारने वाले का हिसाब हुआ है. मणिकर्णिका घाट पर ध्वस्तीकरण को लेकर पाल समाज हमारे साथ रहा. जिन लोगों को मां गंगा ने बुलाया था वह मां गंगा को भूल गए. बाबा विश्वनाथ में हम सभी को आशीर्वाद दिया है. मणिकर्णिका घाट को तोड़ने की सजा मिली है. देवी अहिल्याबाई राजमाता ने भी इन्हें सबक सिखाया है. 

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