Advertisement

कन्नौज विधानसभा चुनाव 2027 (Kannauj Assembly Election 2027)

कन्नौज उत्तर प्रदेश के मध्य भाग में स्थित एक शहर और इसी नाम वाले जिले का मुख्यालय है, जिसकी गहरी ऐतिहासिक जड़ें प्राचीन काल तक जाती हैं, जब यह उत्तर भारत के सबसे समृद्ध शहरों में से एक था. यह अपने जीआई-टैग प्राप्त इत्र और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है, जो आज भी शहर का मुख्य उद्योग है. यह आसपास के गांवों के लिए प्रमुख प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र के

रूप में काम करता है और पारंपरिक इत्र उद्योग का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है. सरकार के फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर ने उस उद्योग में आधुनिक औद्योगिक और शोध का आयाम जोड़ा है, जिसका संबंध सदियों से कन्नौज से रहा है.

स्वतंत्र भारत में हुए पहले आम चुनाव यानी 1952 के चुनाव से पहले स्थापित कन्नौज 1957 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र रहा है. 1952 में यह एक सामान्य, अनारक्षित सीट थी, जिसे कन्नौज नॉर्थ के नाम से जाना जाता था, जबकि दूसरी सीट छिबरामऊ साउथ-कम-कन्नौज साउथ थी. 1957 में यह दो विधायक वाली सीट बन गई और दोनों सीटें अनुसूचित जाति समुदाय के लिए आरक्षित थीं, जबकि 1962 में यह एक विधायक वाली सीट बन गई. यह कन्नौज लोकसभा सीट के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और 2008 के परिसीमन के तहत इसमें कन्नौज तहसील और तिर्वा तहसील का ठठिया कानूनगो सर्किल शामिल है. इसके कारण इसका स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है, जिसमें कन्नौज शहर के आसपास एक मजबूत शहरी घटक मौजूद है.

कन्नौज ने अब तक उत्तर प्रदेश में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में भाग लिया है. जहां कांग्रेस ने 1952 का पहला चुनाव जीता था, वहीं 1957 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने दोनों उपलब्ध सीटों पर जीत दर्ज की थी. कुल मिलाकर कांग्रेस ने यह सीट पांच बार जीती है, जबकि बीजेपी ने भी पांच चुनावों में जीत दर्ज की है, जिसमें 1974 की जीत उसकी पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ की थी. समाजवादी पार्टी ने यह सीट चार बार जीती है और उसकी सभी जीत लगातार 2002 से 2017 के बीच हुईं. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी और जनता दल ने एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की है. कांग्रेस चार दशक से अधिक समय से यह सीट नहीं जीत सकी है और उसकी आखिरी जीत 1985 में हुई थी.

2012 में अनिल कुमार दोहरे ने अपना दूसरा कार्यकाल जीता और समाजवादी पार्टी के लिए लगातार तीसरी जीत दर्ज की. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के महेंद्र निम दोहरे को 45,682 वोटों से हराया. बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे, जिन्होंने 1991, 1993 और 1996 में पार्टी के लिए लगातार तीन कार्यकाल जीते थे, तीसरे स्थान पर रहे. अनिल कुमार दोहरे ने 2017 में सीट बरकरार रखते हुए जीत की हैट्रिक पूरी की, जब उन्होंने बीजेपी के बनवारी लाल दोहरे को 2,454 वोटों के मामूली अंतर से हराया. समाजवादी पार्टी की लगातार चार जीत का सिलसिला 2022 में टूट गया, जब बीजेपी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण को मैदान में उतारा. अरुण को 120,876 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक अनिल कुमार दोहरे को 114,786 वोट मिले. इस तरह बीजेपी ने 6,090 वोटों से जीत दर्ज की और 1996 के बाद पहली बार इस सीट पर विजय हासिल की. बाद में असीम अरुण योगी आदित्यनाथ सरकार में शामिल हुए और राज्य सरकार में मंत्री हैं.

लोकसभा चुनावों के दौरान कन्नौज विधानसभा क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी की मजबूती दिखाई देती है. 2009 के बाद हुए सभी चार संसदीय चुनावों में उसने बीजेपी पर बढ़त बनाई है. 2009 में उसकी बढ़त 25,286 वोटों की थी, 2014 में 8,101 वोटों की और 2019 में 8,841 वोटों की. 2024 में समाजवादी पार्टी की बढ़त काफी बढ़ गई, जब उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. उन्हें 138,567 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार सुब्रत पाठक को 104,323 वोट मिले. इस तरह विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को 34,244 वोटों की बढ़त मिली.

तिर्वा की तरह कन्नौज में भी एक दिलचस्प पैटर्न दिखाई देता है, जिसमें विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की बढ़त तब अधिक रही जब अखिलेश यादव ने खुद 2009 और 2024 में कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, जबकि 2014 और 2019 में जब उनकी पत्नी डिंपल यादव समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार थीं, तब यह अंतर कम रहा. यह पैटर्न उल्लेखनीय है, हालांकि केवल विधानसभा क्षेत्र के नतीजे यह साबित नहीं कर सकते कि मतदाता विशेष रूप से उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहे थे या चुनाव के व्यापक राजनीतिक परिस्थितियों के कारण.

कन्नौज में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वर्षों के दौरान लगातार बढ़ी, लेकिन 2026 के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद इसमें अधिक तेज गिरावट देखी गई. यह संख्या 2012 में 362,326 से बढ़कर 2017 में 385,545 हो गई और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 400,921 थी. 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान यह आंकड़ा 429,420 था और 2024 में मामूली बढ़कर 430,766 हो गया. एसआईआर के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 362,346 मतदाता हैं. यह 2024 के आंकड़े से 68,420 कम है और इसमें 15.89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.

2012 में 57.28 प्रतिशत मतदान को छोड़कर मतदाता मतदान लगातार मजबूत रहा है. इसके बाद हुए सभी चुनावों में यह 60 प्रतिशत से अधिक रहा है. 2012 में 57.28 प्रतिशत से बढ़कर यह 2017 में 64.34 प्रतिशत हो गया, 2019 के लोकसभा चुनाव में थोड़ा घटकर 62.22 प्रतिशत रहा और 2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़कर 63.35 प्रतिशत हो गया, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह मामूली घटकर 62.16 प्रतिशत रहा.

कन्नौज एक हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी काफी संख्या में है. 2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी 19.30 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी 21.17 प्रतिशत है. अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों में यादव, ब्राह्मण, शाक्य या कुशवाहा और लोधी समुदाय शामिल हैं, साथ ही पाल और कुर्मी जैसे अन्य ओबीसी समूह भी हैं. हाल के एक विधानसभा क्षेत्र स्तरीय आकलन में व्यापक सामाजिक समूहों को लगभग इसी क्रम में रखा गया है, जिसमें अनुसूचित जाति सबसे बड़ा समूह है, उसके बाद मुस्लिम, यादव और ब्राह्मण हैं, जबकि शाक्य या कुशवाहा और लोधी समुदाय भी काफी संख्या में हैं. विधानसभा क्षेत्र की आबादी मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां 84.91 प्रतिशत लोग गांवों में रहते हैं और शेष 15.09 प्रतिशत कन्नौज शहर में रहते हैं.

प्राचीन काल में कन्याकुब्ज के नाम से जाना जाने वाला कन्नौज प्राचीन समय तक फैली अपनी जड़ों के लिए जाना जाता है. शहर के आसपास पुरातात्विक खोजों में पेंटेड ग्रे वेयर और नॉर्दर्न ब्लैक पॉलिश्ड वेयर के साथ-साथ बाद के ऐतिहासिक काल की सामग्री भी मिली है, जो यहां लंबे समय से लगातार बस्ती होने का प्रमाण देती है. किला टीले की खुदाई में भी प्रारंभिक ऐतिहासिक काल में यहां आबादी होने के प्रमाण मिले हैं. रामायण, महाभारत और पुराणों की पारंपरिक कथाओं में इस स्थान का संबंध अमावसु और ऋषि विश्वामित्र जैसे पौराणिक व्यक्तित्वों से जोड़ा गया है. हालांकि, ये महाकाव्य और पौराणिक परंपराओं का हिस्सा हैं और इन्हें निश्चित रूप से दिनांकित ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं माना जाता है.

गुप्त काल के बाद कन्नौज का महत्व और बढ़ा और सातवीं शताब्दी में वर्धन वंश के सम्राट हर्ष के शासन के दौरान यह उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक बन गया. कन्नौज हर्ष की साम्राज्यिक राजधानी और शिक्षा तथा धर्म का एक प्रमुख केंद्र था. चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 643 ईस्वी में शहर का दौरा किया और इसके महत्व तथा समृद्धि का वर्णन किया. हर्ष की मृत्यु के बाद कन्नौज गुर्जर-प्रतिहारों, पालों और राष्ट्रकूटों के बीच त्रिपक्षीय संघर्ष का केंद्र बन गया. बाद में गहड़वाल वंश के शासन में यह फिर समृद्ध हुआ, लेकिन 12वीं शताब्दी के अंत में मुहम्मद गोरी के अभियानों में इसके शासक जयचंद की हार हुई.

मध्यकाल में भी शहर ने अपना रणनीतिक महत्व बनाए रखा. 17 मई 1540 को कन्नौज की निर्णायक लड़ाई, जिसे बिलग्राम की लड़ाई के नाम से भी जाना जाता है, शहर के पास मुगल सम्राट हुमायूं और शेर शाह सूरी के बीच लड़ी गई थी. शेर शाह की जीत ने हुमायूं को निर्वासन में जाने के लिए मजबूर कर दिया और उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर सूर शासन को मजबूत किया. बाद के मुगल काल और अवध के नवाबों के शासन में कन्नौज एक प्रशासनिक केंद्र बना रहा. ब्रिटिश काल में यह फर्रुखाबाद जिले का हिस्सा बन गया और धीरे-धीरे अपनी पहले की साम्राज्यिक स्थिति से एक प्रांतीय शहर में बदल गया. हालांकि, इसका पारंपरिक इत्र उद्योग बना रहा और बाद में यही इसकी आधुनिक अर्थव्यवस्था की पहचान बन गया.

कन्नौज की अर्थव्यवस्था आज भी कृषि और इत्र उद्योग के इर्द-गिर्द घूमती है. यह जिला एसेंस, सुगंध, फ्लेवर और पारंपरिक इत्र के उत्पादन के लिए जाना जाता है, जबकि सुगंधित पौधों की खेती और उनका प्रसंस्करण कृषि और इत्र व्यापार के बीच एक कड़ी बनाते हैं. 1991 में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहायता से स्थापित फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर सुगंध और फ्लेवर उद्योग के लिए शोध, प्रशिक्षण और तकनीकी विकास का काम करता है. शहर में बीड़ी उद्योग भी है और यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लिए व्यापार तथा सेवा केंद्र के रूप में काम करता है.

कन्नौज सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यह शहर कानपुर और मथुरा के बीच ब्रॉडगेज रेलवे मार्ग पर स्थित है, जहां कन्नौज रेलवे स्टेशन शहर की सेवा करता है और नियमित यात्री तथा एक्सप्रेस सेवाएं इसे व्यापक रेलवे नेटवर्क से जोड़ती हैं. शहर सड़क मार्ग से कानपुर, फर्रुखाबाद, छिबरामऊ, तिर्वा और क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों से जुड़ा है. कानपुर सड़क मार्ग से लगभग 80 किलोमीटर और लखनऊ लगभग 120 किलोमीटर दूर है. फर्रुखाबाद लगभग 50 किलोमीटर दूर है, जबकि आगरा लगभग 275 से 280 किलोमीटर दूर है. अयोध्या लगभग 300 किलोमीटर, प्रयागराज लगभग 300 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 380 से 400 किलोमीटर सड़क मार्ग से दूर है.

कन्नौज का चुनावी स्कोरकार्ड समाजवादी पार्टी के पक्ष में झुका हुआ दिखाई दे सकता है, जिसने 2022 में बीजेपी की जीत से पहले लगातार चार विधानसभा चुनावों में सीट जीती थी और 2009 के बाद हुए सभी चार लोकसभा चुनावों में विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाई है. लेकिन विधानसभा रिकॉर्ड यह भी दिखाता है कि बीजेपी का यहां एक मजबूत आधार है. 2017 में बीजेपी समाजवादी पार्टी को हराने से केवल 2,454 वोट पीछे रह गई थी, जब दोनों पार्टियों के बीच अंतर केवल 0.99 प्रतिशत अंक था, और 2022 में उसने 6,090 वोटों या लगभग 2.24 प्रतिशत अंक के अंतर से सीट जीत ली. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव ने दिखाया कि समाजवादी पार्टी अभी भी विधानसभा क्षेत्र में काफी बड़ी बढ़त हासिल करने में सक्षम है.

आरक्षित सीट होने के कारण कन्नौज विधानसभा सीट से यादव परिवार के सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकते, जबकि कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में ऐसा नहीं है. इससे विधानसभा स्तर पर एक अलग चुनावी गतिशीलता बनती है, जहां समाजवादी पार्टी को अपने व्यापक यादव परिवार के प्रभाव और लोकसभा की ताकत को एक अनुसूचित जाति उम्मीदवार के समर्थन में बदलना पड़ता है. वहीं बीजेपी ने दिखाया है कि वह अपने गैर-यादव ओबीसी और ऊंची जातियों के समर्थन को अनुसूचित जाति के पर्याप्त वोटों के साथ जोड़कर सीट जीत सकती है.

2026 के एसआईआर ने एक और महत्वपूर्ण कारक जोड़ दिया है. 2024 के आंकड़े की तुलना में मतदाताओं की संख्या 68,420 कम हो गई है, जो 2022 में बीजेपी की 6,090 वोटों की जीत के अंतर से काफी अधिक है. हालांकि, ऐसा स्थापित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है कि मतदाता सूची से हटाए गए नाम किसी विशेष जाति या समुदाय को असमान रूप से प्रभावित करते हैं.

कन्नौज वास्तव में एक प्रतिस्पर्धी विधानसभा सीट है. बीजेपी 2027 के चुनाव में मौजूदा विधायक और सबसे हालिया विधानसभा जीत के आधार के साथ मैदान में उतरेगी, जबकि समाजवादी पार्टी के पास हाल के लोकसभा चुनावों का मजबूत रिकॉर्ड और विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से स्थापित राजनीतिक आधार है. बीजेपी की 2022 की जीत ने दिखाया कि समाजवादी पार्टी का इस सीट पर कब्जा अपरिवर्तनीय नहीं है, जबकि 2024 के नतीजे ने दिखाया कि बीजेपी समाजवादी पार्टी के समर्थन को हल्के में नहीं ले सकती. मुकाबला इस बात पर निर्भर कर सकता है कि दोनों पार्टियां अनुसूचित जाति के वोट को किस तरह मजबूत करती हैं और यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण, शाक्य या कुशवाहा, लोधी तथा अन्य ओबीसी मतदाताओं के बीच कितना समर्थन बनाए रखती हैं. विधानसभा रिकॉर्ड के आधार पर बीजेपी के पास फिलहाल बढ़त है, लेकिन कन्नौज अपने लोकसभा नतीजों से जितना दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक करीबी मुकाबले वाली सीट बनी हुई है.

(अजय झा)

और पढ़ें
छोटा करें
Advertisement

कन्नौज विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Asim Arun

BJP
वोट1,20,876
विजेता पार्टी का वोट %44.5 %
जीत अंतर %2.2 %

कन्नौज विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Anil Kumar Doharey

    SP

    1,14,786
  • Samar Jeet Dohare

    BSP

    26,239
  • Sunil Kumar

    AIMIM

    4,482
  • Vineeta Devi

    INC

    1,786
  • Nota

    NOTA

    1,674
  • Sunil

    IND

    909
  • Raj Katheria

    IND

    361
  • Manoj

    IND

    322
WINNER

Anil Kumar Dohare

SP
वोट99,635
विजेता पार्टी का वोट %40.2 %
जीत अंतर %1 %

कन्नौज विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Banwari Lal Dohare

    BJP

    97,181
  • Anurag Singh

    BSP

    44,182
  • Nota

    NOTA

    1,706
  • Kriparam

    BSRD

    1,160
  • Shrikant Singh

    IND

    946
  • Sunil

    IND

    860
  • Ram Prakash Singh

    JAM

    578
  • Raj Katheria

    IND

    562
  • Mukesh Kumar Jatav

    AD

    413
  • Neetu Singh

    BMUP

    304
  • Deepak Dohare

    VPI

    283
  • Birendra

    IND

    246
Advertisement

कन्नौज विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

कन्नौज विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में कन्नौज में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के कन्नौज विधानसभा चुनाव सीट पर Asim Arun को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

कन्नौज विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

Advertisement