उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच शह-मात का खेल शुरू हो चुका है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव की नजर बीजेपी के उस सबसे मजबूत वोट बैंक पर है, जो सालों से पार्टी की जीत की रीढ़ रहा है.
यह वोट बैंक ओबीसी वर्ग के अंतर्गत आने वाला 'लोधी समाज' है, जो भले ही राज्य में चार से पांच फीसदी है, लेकिन रुहेलखंड से लेकर ब्रज और बुंदेलखंड के क्षेत्र में सत्ता का समीकरण बनाने और बिगाड़ने की क्षमता रखता है.
लोधी समुदाय ओबीसी वर्ग की वह पहली प्रमुख जाति मानी जाती है, जो पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कल्याण सिंह और वरिष्ठ नेता उमा भारती के प्रभाव के कारण बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़ी थी.
मंडल आयोग के दौर से लेकर अब तक यह समाज पारंपरिक रूप से बीजेपी के पक्ष में मतदान करता रहा है. हालांकि, कल्याण सिंह के निधन के बाद अब सपा इस वोट बैंक को अपने सियासी पाले में लाने की कवायद में है, जिसके लिए अखिलेश यादव ने सियासी बिसात बिछानी भी शुरू कर दी है.
वीरांगना अवंती बाई लोधी के बहाने सपा का दांव
देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राण न्योछावर करने वाली वीरांगना अवंती बाई लोधी की 196वीं जयंती के अवसर पर अखिलेश यादव लोधी समुदाय को साधते नजर आए. अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित कैपिटल सिनेमा के पास उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. इसके बाद इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित लोधी समाज के सम्मेलन में शिरकत करते हुए उन्होंने दो बड़े ऐलान किए.
लखनऊ के गोमती रिवरफ्रंट पर वीरांगना अवंती बाई लोधी की सोने की तलवार के साथ भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी.
सपा सरकार बनने पर 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के साथ-साथ 16 अगस्त को अवंती बाई लोधी की जयंती पर शासकीय अवकाश घोषित किया जाएगा.
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है और एक-एक वोट जोड़ना जरूरी है. 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के तहत सभी वर्गों को शामिल कर एक गुलदस्ता बनाया जाएगा. इस रणनीति के जरिए सपा ने बीजेपी के इस कोर वोट बैंक में सेंधमारी का सीधा प्रयास किया है
बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है
राम मंदिर आंदोलन और कल्याण सिंह के दौर से ही लोधी समुदाय बीजेपी का अटूट आधार रहा है. 1990 के दशक में कल्याण सिंह लोधी समाज के सर्वमान्य नेता बनकर उभरे और उन्होंने गैर-यादव पिछड़ों को बीजेपी के पाले में लाने में केंद्रीय भूमिका निभाई.
इसके साथ ही, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के प्रभाव ने बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में लोधी मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखा. कल्याण सिंह के प्रभाव के अलावा साक्षी महाराज और गंगा चरण राजपूत जैसे नेताओं ने भी इस समाज में पार्टी की पैठ बनाई.
कल्याण सिंह का निधन हो चुका है और उमा भारती सक्रिय राजनीति में पहले की तरह प्रभाव में नहीं हैं, लोधी समुदाय भी अब बीजेपी की पकड़ से बाहर निकलकर नई राह पर आगे बढ़ रहा है. सपा इस स्थिति का फायदा उठाकर लोधी समाज में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है.
उत्तर प्रदेश में लोधी वोटरों का सियासी प्रभाव
उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में लोधी समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 4 से 5 प्रतिशत है, जो यादव और कुर्मी समाज के बाद ओबीसी वर्ग में तीसरे नंबर पर आती है. हालांकि, अवध, रुहेलखंड, बुंदेलखंड, ब्रज और पश्चिमी यूपी के करीब 23 जिलों में इनका प्रभाव काफी अधिक है.
राज्य की 65 से अधिक विधानसभा सीटों पर लोधी मतदाता हार-जीत तय करने की क्षमता रखते हैं. रामपुर, बुलंदशहर, अलीगढ़, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, पीलीभीत, लखीमपुर, उन्नाव, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा ऐसे जिले हैं
लोधी मतदाताओं की आबादी 10 प्रतिशत तक है. वर्तमान में राज्य में विभिन्न दलों को मिलाकर लोधी समाज के लगभग 15 विधायक हैं. ब्रज क्षेत्र में लोधी मतदाताओं के मजबूत समर्थन के कारण बीजेपी लगातार बढ़त बनाए रखती रही है, लेकिन अब सपा इस आधार को चुनौती दे रही है.
सपा के लिए क्यों अहम है लोधी वोट बैंक?
2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सपा अपने 'पीडीए' अभियान को और व्यापक बना रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मी और पासी समाज के समर्थन से सफलता हासिल करने के बाद सपा अब लोधी समाज को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश में है.
बीजेपी ने कल्याण सिंह के बाद धर्मपाल सिंह और बी.एल. वर्मा जैसे नेताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है, लेकिन सपा का मानना है कि इस वोट बैंक में बिखराव के संकेत मिल रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में एटा सीट पर कल्याण सिंह के बेटे की हार और फर्रुखाबाद सीट पर बेहद कड़ा मुकाबला इसके उदाहरण के रूप में देखे जा रहे हैं.
2024 में हमीरपुर-महोबा जैसे लोधी बहुल क्षेत्रों में मिले रुझानों से उत्साहित होकर सपा ने अलीगढ़ से उन्नाव तक दो दर्जन से अधिक जिलों में लोधी समाज के कार्यकर्ताओं को जमीन पर उतारा है.
सपा का भावी प्लान और बीजेपी अलर्ट
सपा न केवल सांस्कृतिक ऐलानों के जरिए संदेश दे रही है, बल्कि 2027 के चुनाव के लिए संभावित लोधी उम्मीदवारों की प्रोफाइल भी तैयार कर रही है, दूसरी तरफ, बीजेपी भी इस संभावित सेंधमारी को लेकर पूरी तरह सतर्क है.
पार्टी कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ वर्तमान सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के जरिए अपने इस मजबूत गढ़ को सुरक्षित रखने के प्रयासों में जुटी हुई है.
कुबूल अहमद