उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है. एक तरफ जहां सपा पीडीए (PDA) फॉर्मूले के जरिए सत्ता में वापसी का दांव चल रही है, वहीं बीजेपी ने अपने सबसे मजबूत किले यानी ओबीसी और अति-पिछड़ा वर्ग वोट बैंक पर अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए एक नए अभियान का प्लान बनाया है.
राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने और सत्ता की हैट्रिक बनाने के लिए बीजेपी एक बार फिर अपने सबसे बड़े सियासी अस्त्र यानी ओबीसी और अति-पिछड़ा वर्ग को साधने की कवायद शुरू कर रही है. इस तरह बीजेपी अपने बिगड़े सियासी समीकरण को फिर दुरुस्त करने की रणनीति बना रही है.
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ओबीसी मोर्चा ने पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए दोहरी रणनीति तैयार की है. पार्टी का पहला 'सबसे ऊंचे सरदार अभियान' और दूसरा 'प्लांन 403' है.
बीजेपी का यूपी में 'मिशन 403'
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और सत्ता की चाबी हमेशा से पिछड़ों और अति-पिछड़ों के हाथ में रही है. राज्य की आबादी में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाले ओबीसी वर्ग को साधने के लिए बीजेपी हर एक सीट पर माइक्रो-मैनेजमेंट करना शुरू कर रही है.
बीजेपी का मानना है कि सूबे की 403 सीटों के अधिकांश बूथों पर ओबीसी और अति-पिछड़ी जातियों का समर्थन एकजुट रहा, तो किसी भी विपक्षी समीकरण को आसानी से बेअसर किया जा सकता है.
'अखिलेश यादव जवाब दो' अभियान के जरिए पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर ओबीसी समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है. बीजेपी इसके साथ ही सपा के परिवारवाद को भी प्रमुख मुद्दा बनाएगी. प्लान 403 की जिम्मेदारी 4 लाख 3 हजार ओबीसी कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है.
सरदार पटेल के सहारे बीजेपी का दांव
बीजेपी ओबीसी वोटों को साधने के लिए सरदार पटेल के सहारे बड़ा दांव चलने जा रही है. बीजेपी सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर 31 अक्टूबर को सभी बूथों पर कार्यक्रम आयोजित करेगी. बीजेपी ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल के नेतृत्व में तैयार इस रणनीति के तहत 403 विधानसभा क्षेत्रों और 1,918 मंडलों में सम्मेलन होंगे.
बीजेपी इस रणनीति के तहत वैचारिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को आगे बढ़ा रही है. 'सबसे ऊंचे सरदार अभियान' और महापुरुषों की विरासत से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए पार्टी पिछड़ी जातियों, खासकर कुर्मी, पटेल और गंगवार समाज के बीच सीधा वैचारिक जुड़ाव पैदा कर रही है. इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचाना है कि बीजेपी ही उनके मान-सम्मान और विकास की सच्ची हितैषी है.
बीजेपी का 'अबकी बार बांके बिहारी'
बीजेपी उत्तर प्रदेश में यादव समुदाय के वोटों को साधने के लिए मथुरा को प्रमुख मुद्दा बनाने का प्लान कर रही है. 'अबकी बार बांके बिहारी' के नारे के साथ बीजेपी यादव समाज के बीच सपा के परिवारवाद का मुद्दा उठाएगी. पार्टी अखिलेश यादव को पत्र लिखकर सवाल करेगी कि यादवों के वोट से मिलने वाला राजनीतिक लाभ केवल उनके परिवार को ही क्यों मिलता है, क्या यूपी के बाकी यादव समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाना चाहिए?
बीजेपी ने हर एक विधानसभा सीट (403 सीटों) पर जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्लान बनाया है. जिलाध्यक्षों और स्थानीय नेतृत्व में भी ओबीसी और अति-पिछड़ी जातियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि हर वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके. बीजेपी का यह प्लान 'सोशल इंजीनियरिंग, माइक्रो मैनेजमेंट और विकास योजनाओं के लाभार्थियों के जुड़ाव' के फॉर्मूले पर आधारित है, जिसका एकमात्र लक्ष्य सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी जीत का रास्ता सुगम बनाना है.
आशीष श्रीवास्तव