World Theatre Day: आज भी दिल्ली की हवाओं में 'सांस' लेता है थिएटर

आज वर्ल्‍ड थियेटर डे है. इस मौके पर जानिए इससे जुड़ी कुछ खास बातें...  

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World theatre day World theatre day

आज रंगमंच का दिन है. 27 मार्च 1961 से वर्ल्ड थिएटर डे मनाया जाता है.  वो कहते हैं ना, हमारा जीवन एक रंगमंच है और उस रंगमंच के हम कलाकर. थिएटर (रंगमंच) एक ऐसी जगह है, जहां इंसान जिंदगी के कई किस्से अपनी कला के जरिए दुनिया के सामने लाता है. नुक्कड़ नाटक, स्टेज शो, फार्म थिएटर... तीनों ही रंगमंच के इर्द-गिर्द घूमते है. रंगमंच एक वो ताकत है, जिसमें अपनी कला के माध्यम से अभिनय की छाप एक कलाकार छोड़ देता है. एक लिखी हुई कहानी को लोगों के सामने लेकर आना ही रंगमंच है.

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भारत में रंगमंच का आगाज
1913 में दादा साहेब फाल्के द्वारा बनाई गई फिल्म राजा हरिश्चन्द्र में इंसान के अंदर छुपे हुनर की पहचान की. यह एक साइलेंट फिल्म थी. 1931 में पहली इंडियन साउंड फिल्म आई, जिसका निर्देशन अर्देशिर ईरानी ने किया. उस फिल्म का नाम था 'आलम आरा'.


दिल्ली में है थिएटर का अस्तित्व
ये कहा जाता है दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा(NSD) में थिएटर सांस लेता है. ये वही जगह है जहां कई दिग्गज थिएटर आर्टिस्ट्स तराशे गए है या यूं कहे कि उन्हें बनाया गया है.  यहां आपको एक से बढ़कर एक थिएटर ग्रुप मिल जाएगें.

आइये बताते है थिएटर से जुड़ी कुछ खास बातें

अस्मिता थिएटर ग्रुप

देश के इस थिएटर स्थापना 1993 में हूई.  युवाओं को रंगमंच से  निखारना और समाजिक मुद्दों पर दर्शकों को जागरूक बनाना इस नाट्य संस्था का मकसद है. पिछले 15 सालों से अस्मिता ने रंगमंच विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूल में आयोजन किया है. अस्मिता नाट्य संस्था ने नुक्कड़ नाटकों के साथ- साथ दो दशकों में 60 से अधिक मंच नाटक किये है.

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ये संस्था सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि से प्रासंगिक व समकालीन मुद्दों पर नाटक करने के लिए फेमस है. इन दिनों अरविन्द गौड़ अस्मिता थियेटर ग्रुप के निर्देशक है. बॉलीवुड फिल्म रांझना में अस्मिता थिएटर ग्रुप दिख चुका है.


मंटो की कहानियों के बिना अधुरा है रंगमंच

आज 'वर्ल्ड थिएटर डे' पर 'मंटो' का नाम ना आए ऐसा हो नहीं सकता . सआदत हसन मंटो की कहानियां अमर हैं और उनके लेखन पर सालों से नाटक, लघु फ़िल्में बनाई जाती रही हैं. जिसमें काली सलवार, मिर्जा गालिब , अपनी नगररियां , शिकारी, बदनाम जैसी कई फिल्में है जो मंटो ने रंगमंच के नाम दी है.

कुछ यादगार नाटक
सूरज का सातवां घोड़ा

आधे-अधुरे

टिटवाल का कुत्ता

रोमियो- जूलियट

मरचेंट ऑफ वेनिस

थिएटर के लिए जानी जाती है दिल्ली यूनिवर्सिटी

थिएटर को लेकर पागलपन और जुनून देखना हो तो दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक बार जरूर जाएं.


ये है दिल्ली यूनिवर्सिटी के फेमस थिएटर ग्रुप

1. संघर्ष (भगत सिंह इंवनिंग कॉलेज)

2. इब्दिता( हिंदू कॉलेज)

3. जज्बा (रामानुजन कॉलेज)

4. कहकक्षा (जीजस एंड मैरी कॉलेज)

5. अभिनय (महाराजा अग्रसेन कॉलेज)

6. अभिव्यक्ति (इंद्रप्रस्थ कॉलेज) 

रंगमंच ने दिए देश को दिग्गज अभिनेता

थिएटर ने भारत को ऐसे सितारे दिए है जिन्होनें अपनी एक्टिंग के दम पर रंगमंच की दुनिया में नाम कमाया है. जिसमें खास नाम नवाजुद्दीन सिद्दीकी,शारुख खान, मनोज बाजपेयी, पीयूष मिश्रा,स्वरा भास्कर ,कल्कि कोचलिन, अनुपम खेर समेत कई सितारे शामिल है. इन सितारों की जीवन में थिएटर ने एक अहम भूमिका निभाई है, जिसे लेकर ये सब अलग-अलग विचार रखते है. नवाजुद्दीन कहते है थिएटर ने हमेशा मेरे अंदर आत्मविश्वास का संचार किया है. वहीं पीयूष मिश्रा थिएटर को नशा मानते है.

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रंगमंच पर एक कविता
रंगमंच और इंसान की समानता की बात करें तो किसी के द्वारा लिखी यह पंक्तिया बहुत ही सही साबित होती है.

मैं इंसान था सच की राह का, आज एक अंश बन गया

जिंदगी के हर मोड़ पर, मैं रंगमंच बन गया

निभाए बहुत किरदार, हर किसी के लिए

मैं ही गुनहगार, और मैं ही पंच बन गया

आज भी देखता हू, कलाकार बने हर इंसान को

क्या खूब जीता है वो, दुनिया के इस रंगमंच को

 

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