डिटेंशन पॉलिसी के फेवर में ICSE बोर्ड, छठी से 10वीं के स्टूडेंट्स फेल होने पर नहीं बढ़ेंगे आगे

देश के बहुप्रतिष्ठित बोर्ड (ICSE) ने अपनी ओर से पेशकश की है कि क्लास 6 से 10 तक के फेल स्टूडेंट्स फिर से उन्हीं क्लासेस में रहें. उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाए...

Advertisement
Students Students

विष्णु नारायण

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:31 AM IST

देश के भीतर जारी राइट टू एजुकेशन एक्ट के भीतर क्लास 6 तक के बच्चों को फेल होने पर भी आगे बढ़ाने के क्रम में एक अड़ंगा आ गया है. इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (ICSE) इस कोशिश में है कि वे क्लास 6 से 10 तक के स्टूडेंट्स की क्षमताओं की मूल्यांकन प्रक्रिया को जारी रखेंगे.

क्या कहते हैं मुख्य सचिव...
ICSE बोर्ड काउंसिल के मुख्य सचिव गेरी अराथून कहते हैं कि कैबिनेट के CABE रिकमेंडेशन और संसद द्वारा शिक्षा के अधिकार में फेरबदल के बाद इसे काउंसिल के समक्ष अप्रूवल के लिए रखा जाएगा. यह काउंसिल सारे संबंधित स्कूलों को लागू करने के लिए कहेगा. वे चाहते हैं कि यह पूरे देश में समान रूप से लागू हो. इसके अलावा वे चाहते हैं कि वर्तमान में क्लास 8 तक के सभी स्टूडेंट्स को आगे बढ़ा देने की प्रक्रिया पर रोक लगे.

Advertisement

वे विभिन्न राज्यों द्वारा नो-डिटेंशन पॉलिसी के अलग-अलग इस्तेमाल पर भी चिंता जताते हैं. वे इसे के भीतर की चूक बताते हैं. साथ ही वे इसे स्टूडेंट्स की कार्यक्षमता को परखने और उसे इम्प्रूव करने की जरूरत बताते हैं.

काउंसिल के संविधान पर पूछे गए सवाल कि वे तो सिर्फ परीक्षाएं कराने और मान्यता देने का अधिकार रखते हैं पर वे कहते हैं कि शिक्षा व्यवस्था में समानता लाने के लिए वे सलाह तो दे ही सकते हैं.

Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »