पहली कमाई से पहले ही डिलीवरी पार्टनर का होता है इतना खर्च! आप भी रखें ध्यान

डिलीवरी पार्टनर या राइडर बनना मौजूदा वक्त में मेट्रो सिटीज़ में तुरंत और आसानी से कमाई का ज़रिया बन गया है. लेकिन पहली कमाई से पहले ही बहुत से प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है, जैसे कि जॉइनिंग फीस से लेकर सिक्योरिटी डिपोज़िट तक. आप भी इनके बारे में जानिए…

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पहली कमाई से पूर्व कुछ खर्च ज़रूर होता है. (AI Generated Image) पहली कमाई से पूर्व कुछ खर्च ज़रूर होता है. (AI Generated Image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:24 PM IST

अगर आप भी छोटी-मोटी कमाई के लिए या फिर तुरंत किसी काम के लिए डिलीवरी पार्टनर बनने का सोच रहे हैं तो ये इतना आसान भी नहीं है. क्यूंकि डिलीवरी पार्टनर बनने से पहले सिर्फ कमाई नहीं, उससे जुड़े खर्चों को भी समझना जरूरी है. किसी भी प्लेटफॉर्म से जुड़ने के दौरान फीस, जॉइनिंग किट, सिक्योरिटी डिपॉजिट, वाहन, स्मार्टफोन और बीमा जैसे कई खर्च सामने आ सकते हैं.

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इनमें कुछ रकम सीधे देनी पड़ सकती है, जबकि कुछ खर्च कमाई से किश्तों या कटौती के रूप में लिए जा सकते हैं. ऑर्डर से जुड़े नुकसान या पेनाल्टी भी आपकी कमाई पर असर डाल सकते हैं. इस प्रोसेस को हम यहां आसान भाषा में समझाने की कोशिश करते हैं. 

जॉइनिंग के वक्त किस तरह के खर्च?

जेप्टो, ब्लिंकिट, रेपिडो या बिग बास्केट जैसी कंपनियों में जुड़ते समय ऑनबोर्डिंग या ट्रेनिंग शुल्क लिया जा सकता है. उदाहरण के लिए, स्विगी में ये शुल्क शहर के आधार पर लगभग ₹1,500 तक हो सकता है, जिसे कमाई से किश्तों में काटा जाता है. ज़ेप्टो भी ऑनबोर्डिंग और ट्रेनिंग शुल्क लेती है. कुछ प्लेटफॉर्म में प्लेटफॉर्म एक्सेस के लिए सब्सक्रिप्शन फीस भी देनी हो सकती है.

आपने देखा होगा कि डिलीवरी पार्टनर अक्सर कंपनी की टीशर्ट, बैग या हेल्मेट का इस्तेमाल करते हैं. इस तरह की ब्रांडेड मर्चेंडाइज और जॉइनिंग किट का खर्च भी ध्यान में रखना होता है. कंपनी का बैग, टी-शर्ट या रेनकोट जैसे सामान लेने के लिए शुल्क लिया जा सकता है, या इसे आपकी कमाई से एडजस्ट किया जाता है.

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कुछ कंपनियां ऑनबोर्डिंग के समय रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट लेती हैं. ये रकम आपकी कमाई से किश्तों में काटी जाती है. जब आप उनके साथ अपना काम बंद करते हैं तो ये सिक्योरिटी वापस भी मिलती है.

इन खर्चों में वाहन से जुड़े खर्च भी बड़े होते हैं. अगर आपके पास अपना वाहन नहीं है, तो बाइक, ई-बाइक या साइकिल किराए पर लेने का खर्च जुड़ता है. अपने वाहन का रखरखाव और रनिंग कॉस्ट भी खुद उठाना होता है.

इसके साथ वैध ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाण पत्र का खर्च भी रहता है. कोई पुराना लंबित चालान हो, तो उसे क्लियर करने का खर्च भी अलग से उठाना पड़ सकता है.

कब होता है सबसे बड़ा नुकसान?

डिलीवरी पार्टनर ऐप चलाने के लिए स्मार्टफोन होना अनिवार्य है. उसके डेटा प्लान या इंटरनेट का खर्च भी आपको खुद उठाना होता है. बीमा और निजी खर्च भी इस काम का हिस्सा हैं. दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य बीमा की पॉलिसी का खर्च भी इसमें शामिल है.

किसी भी डिलीवरी पार्टनर के लिए सबसे बड़ा झटका लगता है जब कोई गलती हो जाए. क्यूंकि अगर कोई ऑर्डर गुम हो जाए, चोरी हो जाए, या आपकी लापरवाही के कारण क्षतिग्रस्त हो जाए, तो उसकी भरपाई या कटौती आपकी कमाई से हो सकती है. 

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कुल मिलाकर डिलीवरी पार्टनर बनने से पहले ऑनबोर्डिंग फीस, जॉइनिंग किट, सिक्योरिटी डिपॉजिट, वाहन, दस्तावेज़, स्मार्टफोन, बीमा और संभावित कटौतियों जैसे खर्चों पर पहले से विचार करना जरूरी है.

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