मेट्रो सिटीज़ में हमारे आसपास अक्सर हमें डिलीवरी पार्टनर से लेकर बाइक टैक्सी राइडर या कैब ड्राइवर मिल ही जाते हैं. मेट्रो सिटीज़ की ज़िंदगी का अब ये एक अहम हिस्सा बन चुके हैं. कहीं तुरंत जाना हो या फिर घर पर कुछ भी सामान मंगवाना हो हर मौके पर ये काम आते हैं. ऐसे में एक बात ये भी सोचने वाली है कि आखिर ये राइडर या डिलीवरी पार्टनर आखिर कमाई कितनी करते हैं.
स्विगी, जोमैटो, जेप्टो जैसे डिलीवरी ऐप और उबर, रैपिडो, ओला जैसे राइड ऐप पर काम करने वालों की एक महीने की अनुमानित कमाई, बचत और नियमों की तस्वीर अलग-अलग है. कई बार काम के घंटे बढ़ने के साथ कमाई भी बढ़ती है, लेकिन ईंधन और मेंटेनेंस के बाद हाथ में बचने वाली रकम अलग रहती है.
इन प्लेटफॉर्म्स पर कमाई को लेकर डिटेल्स दी गई हैं. डिलीवरी पार्टनर, बाइक-टैक्सी राइडर और ऑटो या कैब ड्राइवर के लिए कमाई का ढांचा, बोनस, भुगतान का तरीका, जुड़ने की शर्तें और सुरक्षा से जुड़े नियम पहले ही से तय रहते हैं. इसमें वीकली भुगतान, टार्गेट बोनस, सर्ज रेट, दस्तावेज, ऑनबोर्डिंग फीस और बीमा तक की जानकारी शामिल है.
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पार्ट टाइम या फुल टाइम किसमें ज्यादा कमाई?
उदाहरण के लिए, डिलीवरी में पार्ट-टाइम काम करने वाले पार्टनर अगर 4 - 5 घंटे/दिन काम करते हैं, तो उनकी अनुमानित कुल कमाई ₹9,000 - ₹15,000/महीना हो सकती है. इसमें पेट्रोल और मेंटेनेंस के बाद उनके हाथ में ₹7,000 - ₹11,000/महीना बच सकते हैं. वहीं फुल-टाइम यानी 8-10 घंटे/दिन काम करने पर अनुमानित कुल कमाई ₹20,000 - ₹30,000/महीना और शुद्ध बचत ₹15,000 - ₹22,000/महीना बताई गई है.
अगर बाइक-टैक्सी राइडर, जैसे रैपिडो या उबर से जुड़े लोगों की बात करेंगे तो 8-10 घंटे/दिन काम करते हैं तो उनकी अनुमानित कुल कमाई ₹18,000 - ₹28,000/महीना हो सकती है. पेट्रोल और मेंटेनेंस के बाद यह रकम ₹13,000 - ₹20,000/महीना रह सकती है.
ऑटो या कैब ड्राइवर, जैसे उबर या ओला से जुड़े लोग, 8 - 12 घंटे/दिन काम करके ₹30,000 - ₹50,000+/महीना तक की अनुमानित कुल कमाई कर सकते हैं. इनके लिए ईंधन और मेंटेनेंस के बाद ₹22,000 - ₹35,000/महीना की शुद्ध बचत बताई गई है.
किस हिसाब से मिलता है पेआउट?
यहां पर ये समझना ज़रूरी है कि कमाई के ढांचे में डिलीवरी ऐप्स प्रति ऑर्डर दूरी और लगने वाले समय के हिसाब से पेआउट देते हैं. राइड ऐप्स कुल किराये में से अपना प्लेटफॉर्म कमीशन या सर्विस चार्ज काटते हैं.
रैपिडो जैसे ऐप कुछ राज्यों में सब्स्क्रिप्शन मॉडल पर काम करते हैं, जहां कैप्टन सीधा किराया रखता है. तय संख्या में ऑर्डर या राइड पूरी करने पर डेली टार्गेट बोनस मिलता है. सुबह और शाम के ऑफिस आवर्स, बारिश या वीकेंड में सर्ज रेट बढ़ जाते हैं. स्विगी, जेप्टो और उबर जैसी ज्यादातर कंपनियां हफ्ते के आधार पर सीधे बैंक खाते में भुगतान करती हैं.
डिलीवरी पार्टनर बनने के लिए ये चीज़ें ज़रूरी!
हम पहले भी जानकारी दे चुके हैं कि इस तरह के प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए. ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी चलाने का कम से कम 1 से 2 साल का अनुभव अनिवार्य है.
इसके अलावा पिछले 3 सालों में शराब या ड्रग्स पीकर गाड़ी चलाने का रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए. कोई गंभीर आपराधिक मामला लंबित या सिद्ध नहीं होना चाहिए. जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड या वोटर आईडी, पैन कार्ड, बैंक खाता या कैंसिल्ड चेक शामिल हैं.
बाइक, स्कूटी या कार से जुड़े दस्तावेजों में डीएल, आरसी, वैध बीमा और पीयूसी सर्टिफिकेट जरूरी हैं. कैब या ऑटो के लिए कमर्शियल परमिट और फिटनेस भी अनिवार्य है. डिलीवरी ऐप्स में जुड़ते समय टी-शर्ट और बैग के लिए लगभग ₹1,000 - ₹1,500 की ऑनबोर्डिंग फीस लगती है, जो पेआउट से किस्तों में कटती है.
कुल मिलाकर डिलीवरी और राइड ऐप्स पर कमाई काम के घंटे, काम के प्रकार और पेआउट मॉडल पर निर्भर करती है. साथ ही, जुड़ने के लिए उम्र, अनुभव, दस्तावेज, रिकॉर्ड और प्लेटफॉर्म के नियमों का पालन जरूरी है. कमाई के साथ साप्ताहिक भुगतान, बोनस, बीमा और ई-श्रम के तहत पहचान जैसी सुविधाएं भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं.
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