छोटे शहरों और गांव में जहां रोजगार के बहुत ज्यादा मौके नहीं होते हैं, अक्सर वहां से लोग बड़े शहरों में आते हैं. क्यूंकि यहां काम और कमाई की संभावनाएं ज़्यादा हैं. इन्हीं में से एक अवसर आया है, जो पिछले कुछ सालों से ट्रेंड में है वो है डिलीवरी बॉय और बाइक टैक्सी राइडर का काम. जिसने कई लोगों को रोज़गार का मौका दिया है.
ऐसी ही एक कहानी बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले लक्ष्मण कुमार की है, जिन्होंने डिलीवरी का काम शुरू करने के बाद अपने परिवार की स्थिति बदल दी है. वह अब डिलीवरी से अच्छी कमाई कर रहे हैं, छोटे भाई को अपाचे बाइक दिला चुके हैं और अपनी बचत से गांव में परिवार के लिए किराने की दुकान भी खोल चुके हैं.
एक पॉडकास्ट में लक्ष्मण कुमार ने अपनी कहानी बताई है. कभी 30-35 हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाले लक्ष्मण करीब डेढ़ साल पहले तक तमिलनाडु में एक प्राइवेट कंपनी में एल्युमीनियम का काम करते थे. वहां काम के घंटे लंबे थे और उन्हें बॉस की बात मानकर काम करना पड़ता था. इसके बाद उन्होंने नोएडा आकर डिलीवरी का काम शुरू किया, और यहीं से उनकी कमाई और काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया.
क्लिक करें: पूरे 50 हज़ार… एक महीने में डिलीवरी पार्टनर की कितनी कमाई, कितना कटता है कमीशन?
लक्ष्मण बताते हैं कि डिलीवरी का काम शुरू करने के बाद उन्हें सबसे बड़ा फर्क अपनी आजादी में महसूस हुआ. यहां वह अपनी जरूरत और कमाई के हिसाब से काम के घंटे तय कर सकते हैं. अगर ज्यादा कमाना है तो ज्यादा घंटे काम करते हैं, और अगर किसी दिन घर जाना है तो काम रोक सकते हैं. उनका कहना है कि मेहनत जितनी ज्यादा, कमाई उतनी ज्यादा, और यही बात उन्हें इस काम में सबसे ज्यादा पसंद आई.
अभी लक्ष्मण रोज करीब 13-14 घंटे काम करते हैं. सुबह करीब 8 बजे उठने के बाद 8:30-9 बजे तक काम शुरू कर देते हैं. दोपहर में करीब एक घंटे का ब्रेक लेते हैं और फिर रात 10-11 बजे तक काम करते हैं. कई बार काम रात 12 बजे तक चलता है.
अगर कमाई की बात की जाए तो उनकी रोज की कमाई करीब 1800 रुपये रहती है और अच्छे दिन में 2000 रुपये से ज्यादा भी हो जाती है. उनकी मासिक कमाई 40-50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने एक हफ्ते में करीब 25 हजार रुपये तक कमाए.
छोटा भाई कर रहा आर्मी की तैयारी, गांव में खोला बिजनेस
अपनी फैमिली को लेकर गिग वर्कर लक्ष्मण ने बताया कि उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो छोटे भाई हैं. उनके पिता पहले ड्राइवर थे और खराब सेहत के कारण लक्ष्मण को परिवार की जिम्मेदारी जल्दी उठानी पड़ी. अब वह परिवार में सबसे ज्यादा कमाने वाले सदस्य हैं. उनका छोटा भाई सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा है.
लक्ष्मण चाहते हैं कि भाई बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी तैयारी करे. भाई को आने-जाने और पढ़ाई के लिए बाइक की जरूरत थी, तो लक्ष्मण ने अपनी कमाई से उसे अपाचे बाइक दिला दी. वह कहते हैं कि छोटे भाई को बस मेहनत करनी है, बाकी जरूरतें पूरी करने की जिम्मेदारी वह उठाएंगे.
लक्ष्मण ने गांव में परिवार की आमदनी का एक और जरिया भी तैयार किया. करीब 5-6 महीने पहले जब वह गांव गए, तो डिलीवरी से बचाए पैसों से किराने की दुकान खोल दी. उनका कहना है कि माता-पिता गांव में रहते हैं, इसलिए घर के पास दुकान होने से परिवार के पास कमाई का अपना एक साधन भी रहेगा. अब उनका अगला लक्ष्य अपने दोनों छोटे भाइयों को अपने पैरों पर खड़ा करना है. उन्होंने एक भाई को डिलीवरी के काम से भी जोड़ दिया है और उसे काम सिखा रहे हैं.
लक्ष्मण का कहना है कि जब दोनों भाई व्यवस्थित हो जाएंगे, तभी उन्हें लगेगा कि उनकी बड़ी जिम्मेदारी पूरी हुई. उनके लिए डिलीवरी सिर्फ रोज की कमाई का जरिया नहीं रही, बल्कि परिवार को आगे बढ़ाने का रास्ता बन चुकी है. एक तरफ छोटे भाई के पास बाइक है, दूसरी तरफ गांव में परिवार का अपना छोटा बिजनेस भी शुरू हो चुका है.
aajtak.in