UP: पशुपालन भर्ती घोटाले में रिटायर्ड IAS योगेश कुमार ग‍िरफ्तार, सपा सरकार में थे प्रमुख सच‍िव

उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान हुए पशुपालन विभाग के बहुचर्चित भर्ती घोटाले में EOW ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने 1980 बैच के रिटायर्ड IAS और तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है. साल 2014 में 1198 पदों पर हुई पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती में यह कार्रवाई हुई है.

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तत्कालीन प्रमुख सच‍िव और रिटायर्ड आईएएस योगेश कुमार तत्कालीन प्रमुख सच‍िव और रिटायर्ड आईएएस योगेश कुमार

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 14 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) की पिछली सरकार के दौरान चर्चा में आए पशुपालन विभाग के बड़े भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है. EOW की टीम ने इस मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव और 1980 बैच के रिटायर्ड डायरेक्ट आईएएस अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया है.

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उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में किसी डायरेक्ट आईएएस अधिकारी की इस तरह की यह एक बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है.आइए, जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और इस घोटाले के तार कहां-कहां जुड़े हुए हैं...

क्या था साल 2014 का पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाला?

यह पूरा मामला 2 फरवरी 2014 को आयोजित हुई भर्ती परीक्षा से जुड़ा है. उस दौरान उत्तर प्रदेश के 17 मंडलों में कुल 1,198 पदों पर पशुधन प्रसार अधिकारियों की भर्ती की गई थी. इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जिसके बाद इसकी जांच EOW को सौंपी गई थी.

जांच में यह बात सामने आई कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नियमों को ताक पर रखकर गड़बड़ियां की गईं. भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के कुछ समय बाद ही तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए थे. अब लंबी जांच और साक्ष्य मिलने के बाद EOW ने उन पर शिकंजा कसते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.

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तत्कालीन मंत्री की भूमिका और फाइल लंबित

सपा सरकार के कार्यकाल में हुए इस बहुचर्चित घोटाले के समय राज किशोर सिंह पशुपालन मंत्री के पद पर तैनात थे. जांच के दौरान पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह की संलिप्तता और उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) की फाइल फिलहाल शासन स्तर पर लंबित बताई जा रही है. गौरतलब है कि राजकिशोर सिंह मई 2024 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो चुके हैं. राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले में EOW की यह गिरफ्तारी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है.

प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप

चूंकि योगेश कुमार 1980 बैच के एक वरिष्ठ डायरेक्ट आईएएस अधिकारी रहे हैं और प्रमुख सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके हैं, इसलिए इस गिरफ्तारी ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है. EOW अब योगेश कुमार से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल थे और धांधली के तार कहां तक फैले हुए थे.

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