क्लास 6 के बच्चों पर भी नहीं लागू होगा थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों की तरह ही इस नीति के तहत छूट दी जाए. यानी इस बैच के छात्रों पर तीसरी भाषा को लेकर तुरंत उसी तरह का दबाव नहीं होगा, जैसा नई व्यवस्था के तहत लागू किया जा रहा था. 

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सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को भी दी राहत. सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को भी दी राहत.

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

क्लास 6 में पहुंचते ही बच्चों के लिए पढ़ाई का एक नया दौर शुरू होता है लेकिन इस बार कुछ छात्रों के सामने किताबों और नए विषयों के साथ भाषा बदलने की चिंता भी दिखाई दे रही है. CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर यही सवाल सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. अब कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए बड़ा निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वर्तमान कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों की तरह ही इस नीति के तहत छूट दी जाए. दरअसल, इसे लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब 2026-27 के सत्र से कक्षा 6 में तीन भाषाओं की व्यवस्था लागू की गई.

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कई स्कूलों और याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि कुछ छात्र पहले से दूसरी भाषाएं पढ़ रहे हैं और अब उनसे भाषा बदलने को कहा जा रहा है. ऐसे में नए सत्र के बीच भाषा बदलना बच्चों के लिए परेशानी की वजह बन सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इसी परेशानी पर ध्यान दिया.

कोर्ट ने कहा कि बच्चों को अनावश्यक कठिनाई में डालने के बजाय उन्हें सुविधा दी जानी चाहिए. सरकार की ओर से बताया गया कि करीब 99 फीसदी स्कूलों में तीसरी भाषा की नीति लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्था हो चुकी है, जबकि करीब 1.2 फीसदी स्कूलों में अभी भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. इसके बावजूद कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों के समान छूट देने का निर्देश दिया है. 

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आखिर क्या है थ्री लैंग्वेज पॉलिसी विवाद?

CBSE की नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के तहत तीन भाषाओं की पढ़ाई से जुड़ी है. कक्षा 6 से छात्रों के लिए R1, R2 और R3 के तहत तीन भाषाओं की व्यवस्था लागू की जा रही है. CBSE के दिशानिर्देशों में कम से कम दो भारतीय भाषाओं को शामिल करने की बात कही गई है. विवाद तब शुरू हुआ जब मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों के लिए यह व्यवस्था नए शैक्षणिक सत्र में लागू की गई. याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में कहा गया कि कई बच्चे चौथी कक्षा से ही अपनी पसंद की भाषाएं पढ़ रहे हैं. ऐसे में कक्षा 6 में अचानक भाषा बदलने से उन्हें परेशानी हो सकती है. 

कोर्ट ने पहले भी जताई थी चिंता

हालांकि, इसे लेकर कोर्ट ने पहले भी चिंता उठाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने की संभावना पर विचार करने को कहा था. सितंबर में कोर्ट ने CBSE से पूछा था कि क्या इस शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा 6 के छात्रों को कुछ छूट दी जा सकती है? कोर्ट की चिंता थी कि बच्चों और उनके परिवारों को बीच सत्र में नई व्यवस्था की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसके बाद 17 सितंबर की सुनवाई में भी कोर्ट ने तीन भाषा नीति को कक्षा 6 में अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने पर विचार करने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि बच्चों को बदलाव के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए. 

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सरकार का तर्क?

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है और वह मौजूदा कक्षा 6 को इस साल से छूट देने के पक्ष में नहीं है. सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि करीब 99 प्रतिशत स्कूलों में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने के लिए जरूरी व्यवस्था की जा चुकी है. सरकार के मुताबिक करीब 2,800 से अधिक स्कूलों में से लगभग 1.2 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं जहां इस व्यवस्था को लेकर समस्या बनी हुई है. हालांकि, कोर्ट ने केवल यह देखने पर जोर दिया कि जिन छात्रों के लिए व्यवस्था पहले ही बदल चुकी है, उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े.

बच्चों को सुविधा चाहिए

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाकर उन स्कूलों और याचिकाकर्ताओं से बात की जाए, जो इस व्यवस्था को लेकर अपनी परेशानियां बता रहे हैं. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि अब किसी और समिति की जरूरत नहीं है और इस मामले में स्पष्ट फैसला लिया जाना चाहिए. सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कोर्ट बच्चों को मुश्किल में डालने के बजाय उन्हें सुविधा देना चाहता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी वही राहत दी जानी चाहिए जो कक्षा 7 के छात्रों को मिली है. 

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कक्षा 6 के छात्रों को अब क्या राहत मिली?

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के मुताबिक मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों के समान छूट दी जाएगी. इसका मतलब यह नहीं है कि तीन भाषा की नीति खत्म हो गई है. राहत खास तौर पर वर्तमान कक्षा 6 बैच के लिए है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था को लेकर आगे का सुनवाई 1 अप्रैल 2027 से किया जा सकता है. यानी बच्चों को अचानक बीच सत्र में नई व्यवस्था में ढालने के बजाय बदलाव के लिए समय देने की बात कही गई है. 

किताबों को लेकर भी उठा सवाल

सुनवाई के दौरान किताबों का मुद्दा भी सामने आया है. सरकार की ओर से कहा गया कि किताबें उपलब्ध हैं लेकिन याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि किताबें ऑनलाइन उपलब्ध होने और बच्चों के पास उनकी भौतिक प्रतियां होने में अंतर है. CBSE ने अपने मई के आधिकारिक सत्र में कहा था कि निर्धारित भाषाओं की R3 पाठ्यपुस्तकें NCERT और CBSE की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की योजना है. जिन भाषाओं के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत है, उनके लिए स्कूलों को SCERT की किताबों या राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी. 

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अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए कहा है. आदेश के मुताबिक संबंधित पक्ष को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना होगा और उसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल किया जा सकेगा. फिलहाल सबसे बड़ी राहत मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को मिली है. उन्हें कक्षा 7 के छात्रों की तरह छूट देने का निर्देश दिया गया है, जबकि तीन भाषा की व्यवस्था को लेकर व्यापक मामला अभी अदालत के सामने विचाराधीन है. 

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