मिनटों में मेड, सिर्फ ₹29 में मिडिल क्लास की टेंशन दूर... कैसे काम करता है इस सस्ती सर्विस का इकोसिस्टम?

सस्ती सर्विस के पीछे सिर्फ ग्राहक और मेड नहीं हैं, इसके पीछे टेक्नोलॉजी, ऑन-डिमांड वर्कफोर्स, रेटिंग सिस्टम, प्रमोशनल प्राइसिंग और तेज डिस्पैच का पूरा इकोसिस्टम काम कर रहा है.

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कैसे चलता है पूरा बिजनेस मॉडल (Photo-ITG) कैसे चलता है पूरा बिजनेस मॉडल (Photo-ITG)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली ,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:33 PM IST

10 मिनट में ग्रॉसरी, 15 मिनट में कपड़े और आधे घंटे में खाना... अब शहरों की जिंदगी में 'फास्ट' सिर्फ डिलीवरी का तरीका नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है. इसी फास्ट लाइफस्टाइल का अगला पड़ाव अब हमारे घर की चौखट तक पहुंच गया है. सोचिए, सुबह ऑफिस जाने की जल्दी है और तभी काम वाली का मैसेज आता है “आज मैं नहीं आ पाऊंगी.” कभी पड़ोस में फोन, कभी रिश्तेदारों से मदद की तलाश और कभी खुद ही घर के काम में जुटने की मजबूरी, लेकिन अब इस परेशानी का समाधान भी बस कुछ क्लिक दूर है.

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मोबाइल खोलिए, घर का काम चुनिए और कुछ ही मिनटों में एक ट्रेंड हाउस हेल्प आपके दरवाजे पर. Snabbit, Urban Company की InstaHelp और Pronto जैसे प्लेटफॉर्म 'ऑन-डिमांड हाउस हेल्प' को उसी तरह आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिस तरह क्विक कॉमर्स ने किराने की खरीदारी को बनाया और सबसे दिलचस्प बात? शुरुआती ऑफर्स में यह सुविधा इतनी सस्ती है कि कई बार एक घंटे की मदद के लिए ₹100 से भी कम खर्च करना पड़ रहा है. प्रतिस्पर्धा के बीच कुछ कई ऐप ₹29 प्रति घंटे की सुविधा दे रहे हैं. सबसे राहत की बात ये है कि इसमें से कुछ प्लेटफॉर्म वक्त से पहले सर्विस देते हैं.

मान लीजिए आपने सुबह 8 बजे की बुकिंग की है तो आपके दरवाजे पर 15 मिनट पहले ही बेल बज जाएगी, मतलब आपकी रेगुलर मेड की तरह ऐसा बहाना नहीं चलता है कि आज बच्चा बीमार है, या ट्रैफिक में फंस गई. क्योंकि लेट होने पर कंपनी पैसे काट लेती है, इसलिए हाउस हेल्फ वक्त से पहले ही आपके दरवाजे पर हाजिर हो जाती हैं, और पूरा काम परफेक्शन के साथ करती हैं, जिसमें झाड़ू, पोछा, बर्तन, डस्टिंग से लेकर आपको खाने की प्रेपरेशन में भी मदद करती हैं.  

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ज्योति ने मेड को कहा बाय-बाय, अब ऐप से आती है मदद

नोएडा की रहने वाली ज्योति के लिए कभी घर की मेड की छुट्टी मतलब पूरा दिन अस्त-व्यस्त होना था, कभी अचानक छुट्टी, कभी घंटों की देरी और कभी काम अधूरा छोड़कर चले जाना, हर हफ्ते कोई न कोई नई परेशानी सामने रहती थी, लेकिन अब उन्होंने इस झंझट का अपना डिजिटल समाधान खोज लिया है, उनके फोन में शॉपिंग और ग्रॉसरी ऐप्स के साथ अब हाउस हेल्प बुक करने वाले कई ऐप्स भी मौजूद हैं.

aajtak.in से बातचीत में ज्योति बताती हैं, “मैं अपनी परमानेंट मेड की छुट्टियों और लेट आने की आदत से तंग आ चुकी थी, आखिरकार मैंने उसे हटा दिया. अब जब भी घर में मदद की जरूरत होती है, मैं अलग-अलग ऐप पर डील चेक करती हूं और जिस पर बेहतर कीमत मिलती है, वहीं से बुकिंग कर लेती हूं. सबसे अच्छी बात ये है कि काम मेरी सुविधा के हिसाब से होता है और मुझे क्वालिटी से भी समझौता नहीं करना पड़ता.”

खास बात ये है कि ये प्लेटफॉर्म सिर्फ लोगों को घर की जरूरत के वक्त मदद नहीं दे रहे, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के लिए रोजगार का नया जरिया भी बन रहे हैं. 30 साल की संगीता पहले पांच घरों में काम करके महीने के करीब 12-15 हजार रुपये कमाती थीं, लेकिन बीमारी की वजह से उन्हें गांव जाना पड़ा और जब वह वापस लौटीं तो उनके पुराने सारे काम छूट चुके थे. ऐसे में उन्होंने Snabbit के साथ काम शुरू किया.

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संगीता बताती हैं कि कंपनी की तरफ से उन्हें 6 लाख रुपये तक का हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है और हर दिन करीब 700 रुपये का भुगतान किया जाता है. हालांकि इस काम की अपनी चुनौतियां भी हैं, उनकी ड्यूटी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक यानी 12 घंटे की होती है. इस दौरान उन्हें कंपनी की तरफ से मिलने वाली बुकिंग करनी होती है, लेकिन कई बार दिन में सिर्फ 3-4 बुकिंग मिलती हैं या बुकिंग नहीं भी मिलती, फिर भी कंपनी की पॉलिसी के मुताबिक उन्हें अपने तय इलाके में 12 घंटे उपलब्ध रहना पड़ता है.

कुछ महीने पहले फरहाना ने Urban Company के साथ काम शुरू किया. इससे पहले वह फुलटाइम मेड के तौर पर काम करती थीं. सुबह किसी के घर पहुंचने से लेकर शाम तक वहीं रहना, घर के हर छोटे-बड़े काम में लगे रहना और कई बार तय समय से ज्यादा रुकना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था. काम के घंटे लंबे थे, लेकिन उसके हिसाब से कमाई उतनी नहीं थी. अब उनकी जिंदगी का यह हिस्सा बदल गया है. फरहाना बताती हैं कि Urban Company पर वह अपनी सुविधा और समय के हिसाब से बुकिंग स्वीकार करती हैं, उन्हें किसी एक घर में पूरा दिन बिताने की जरूरत नहीं पड़ती. जब काम करना होता है, वह अपनी उपलब्धता के मुताबिक बुकिंग लेती हैं और काम खत्म होने के बाद अपने समय की मालिक खुद होती हैं.

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वह बताती हैं कि इससे उनकी महीने की कमाई करीब ₹17,000 से ₹20,000 तक हो जाती है, जो पहले की कमाई से बेहतर है.

ऑन-डिमांड हाउस हेल्प का यह मॉडल सिर्फ ग्राहकों की सुविधा नहीं बदल रहा, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी काम का एक नया रास्ता खोल रहा है, जो कमाई के साथ अपने समय और जिंदगी पर थोड़ा ज्यादा नियंत्रण चाहती हैं.

Snabbit पहले ₹29 में एक घंटे की हाउस हेल्प

Snabbit का सबसे दिलचस्प खेल सिर्फ 10 मिनट में हाउस हेल्प पहुंचाने का नहीं है, बल्कि ग्राहक को पहली बार सर्विस इस्तेमाल करवाने का है. शुरुआत में बेहद कम कीमत ग्राहक के लिए वही काम करती है, जो क्विक-कॉमर्स में ₹10-20 की पहली डिलीवरी या फूड डिलीवरी में मिलने वाला डिस्काउंट करता है जोखिम खत्म और ट्रायल शुरू. मसलन, पहली बुकिंग में ग्राहक को एक घंटे की हाउस हेल्प सिर्फ ₹29 में मिलती है. इतनी कम कीमत देखकर ग्राहक के मन में यह सवाल कम हो जाता है कि क्या मुझे इसकी जरूरत है? और सवाल बदलकर हो जाता है “₹29 में मिल रहा है तो एक बार ट्राई करके देखते हैं.”

ग्राहक को 'ट्रायल' से 'आदत' तक...

पहली बुकिंग का ₹29 वाला ऑफर असल में सिर्फ डिस्काउंट नहीं है, यह ग्राहक को प्लेटफॉर्म के पूरे अनुभव से परिचित कराने का तरीका है, घर में मेड के अचानक छुट्टी पर जाने, मेहमान आने या ऑफिस के लिए निकलने की जल्दी जैसे मौके पर ग्राहक एक बार ऐप से मदद लेता है. अगर अनुभव अच्छा रहा तो अगली बार उसके लिए ऐप खोलना आसान हो जाता है. यानी कंपनी का पहला लक्ष्य उस एक बुकिंग से बड़ा है- ग्राहक को ऑन-डिमांड हाउस हेल्प की आदत डालना.

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इसके बाद ऑफर का दूसरा स्तर आता है, उदाहरण के तौर पर ग्राहक को ₹150 में तीन दिन की बुकिंग जैसा ऑफर मिलता है, यहां रणनीति बदल जाती है. पहली बुकिंग में ग्राहक को सिर्फ सर्विस का अनुभव कराया गया था, जबकि दूसरी बुकिंग में उसे बार-बार इस्तेमाल करने की आदत की डाली जाती है. तीन दिन की बुकिंग का फायदा ग्राहक को भी दिखता है. हर बार जरूरत पड़ने पर नई बुकिंग करने की झंझट नहीं. वहीं कंपनी के लिए इसका फायदा यह है कि ग्राहक एक बार नहीं, लगातार कई दिनों तक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है.

जब ग्राहक को ₹29 की पहली बुकिंग और ₹150 के पैकेज जैसी शुरुआती कीमतों पर सर्विस का अनुभव हो जाता है, तो अगली बुकिंग में ₹129 जैसी कीमत अचानक उतनी बड़ी नहीं लगती. यही इस मॉडल का सबसे अहम हिस्सा है. ग्राहक के दिमाग में तुलना ₹29 से ₹129 की नहीं होती, वह इसे इस तरह देखता है “मेरी मेड आज नहीं आई है, मुझे अभी मदद चाहिए और ₹129 देकर समस्या खत्म हो जाएगी.' यानी शुरुआत में कंपनी ग्राहक को कीमत से आकर्षित करती है, लेकिन धीरे-धीरे ग्राहक के लिए सबसे बड़ी वैल्यू कन्वीनियंस और समय की बचत बन जाती है.

Urban Company InstaHelp: 10-15 मिनट में मदद, कीमत ₹79 से शुरू

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Urban Company ने भी इस बाजार को गंभीरता से लिया है और अपनी InstaHelp सर्विस को तेजी से विस्तार दिया है. कंपनी के मुताबिक InstaHelp में सफाई, बर्तन धोने, कपड़े धोने और मील प्रेप जैसे रोजमर्रा के काम शामिल हैं और बुकिंग के बाद हेल्प आमतौर पर 10-15 मिनट में पहुंचने के लिए डिजाइन की गई है. Urban Company की InstaHelp की शुरुआती कीमत ₹79 प्रति घंटे है, हालांकि लोकेशन, स्लॉट और प्रमोशनल ऑफर के हिसाब से कीमत बदल सकती है. कंपनी की कुछ मौजूदा लिस्टिंग में 45 मिनट के स्लॉट ₹79 से और 60 मिनट के स्लॉट ₹99 से शुरू होते हैं.

यानी अगर किसी घर में अचानक मेहमान आने वाले हों और बर्तन, किचन और थोड़ा झाड़ू-पोंछा निपटाना हो, तो ग्राहक लंबी अवधि की मेड रखने के बजाय जरूरत के हिसाब से कुछ समय के लिए मदद बुला सकता है.

Pronto: यहां मॉडल थोड़ा अलग, काम के हिसाब से कीमत

Pronto इस मुकाबले में थोड़ा अलग मॉडल अपनाता है, यहां सिर्फ घंटे के हिसाब से हाउस हेल्प खरीदने के बजाय ग्राहक कई अलग-अलग सर्विस चुन सकता है, प्लेटफॉर्म पर hourly booking के साथ बर्तन, किचन प्रेप, डस्टिंग, स्वीपिंग-मॉपिंग, लॉन्ड्री, आयरनिंग, विंडो क्लीनिंग, बालकनी क्लीनिंग और दूसरे काम उपलब्ध हैं. hourly bookings 30 मिनट के स्लॉट से शुरू होती हैं, जबकि कई काम पर विजिट कीमत पर भी बुक किए जा सकते हैं. लाइव कीमत ग्राहक के पते और चुनी गई सर्विस के आधार पर ऐप में दिखाई जाती है.

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ध्यान रहे कि इन प्लेटफॉर्म की कीमतें शहर, माइक्रो-मार्केट, समय, उपलब्धता और प्रमोशनल ऑफर के हिसाब से बदल सकती हैं. खासकर अगस्त 2026 में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी तेज है और डिस्काउंट के कारण ग्राहक को मिलने वाली कीमत कई जगह सामान्य कीमत से काफी कम हो सकती है.

इस मॉडल की लोकप्रियता सिर्फ कीमत की वजह से नहीं है, असली आकर्षण है कंट्रोल. ग्राहक तय करता है कि मदद कब चाहिए, कितनी देर चाहिए और कौन-से काम करवाने हैं. यही वजह है कि यह बाजार तेजी से बढ़ रहा है. जुलाई 2026 में Urban Company की InstaHelp ने करीब 19 लाख ऑर्डर, Snabbit ने करीब 18.5 लाख और Pronto ने 12.5 लाख से ज्यादा बुकिंग की. तीनों मिलकर करीब 50 लाख ऑर्डर के स्तर तक पहुंच गए. अगस्त की शुरुआत में तो Snabbit और Urban Company InstaHelp दोनों ने एक दिन में 1 लाख से ज्यादा डेली ऑर्डर का आंकड़ा पार कर लिया.

लेकिन ₹29 में एक घंटे की मेड... आखिर बिजनेस कैसे चलेगा?

यहीं से कहानी का दूसरा पहलू शुरू होता है. ग्राहक के लिए ₹29 या ₹79 में एक घंटे की मदद शानदार डील लग सकती है, लेकिन कंपनी के लिए इसे लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Snabbit, Urban Company और Pronto के बीच प्रतिस्पर्धा इतनी तेज हो गई कि कुछ इलाकों में कीमतें करीब ₹29 प्रति घंटे तक करनी पड़ी. कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रमोशनल ऑफर और तेज डिस्पैच का सहारा ले रही हैं.

एक विश्लेषण के मुताबिक, इस मॉडल को मुनाफे में लाने के लिए कंपनियों को मौजूदा कीमतों से काफी ऊपर जाना पड़ सकता है, क्योंकि हर हेल्प को ग्राहक तक पहुंचाने में ट्रैवल टाइम, ट्रेनिंग, सप्लाई और न्यूनतम भुगतान जैसी लागत आती है.

असली लड़ाई 'मेड' की नहीं, समय की है

दरअसल Snabbit, InstaHelp और Pronto सिर्फ घरेलू काम करने वाली मेड को ऐप पर नहीं ला रहे हैं. वे समय को एक सर्विस की तरह बेच रहे हैं, आज ग्राहक को महीने की मेड रखने के लिए लंबे समय का कमिटमेंट करने की जरूरत नहीं, उसे सिर्फ तब भुगतान करना है जब उसे मदद चाहिए. यही वजह है कि जिस तरह कभी लोगों ने कहा था कि “10 मिनट में सामान कैसे आ सकता है?”, उसी तरह अब सवाल बदल गया है “10 मिनट में घर की मदद कैसे आ सकती है?

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