प्रिंसटन से PHD, 2,300 से ज्यादा जॉब एप्लिकेशन, फिर भी नौकरी नहीं, अब लॉ करने पर विचार

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से PHD कर चुके 30 साल के जैक वाइस साल 2024 से अब तक 2,300 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक स्थायी जॉब नहीं मिली है. उनका मामला अमेरिका में घटती भर्तियों, कम शुरुआती नौकरियों और एआई आधारित भर्ती टूल से बढ़ी मुश्किलों को सामने लाता है.

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PHD की डिग्र है लेकिन नौकरी नहीं. PHD की डिग्र है लेकिन नौकरी नहीं.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

अच्छी डिग्री, रिसर्च का अनुभव और लगातार नौकरी की तलाश के बाद भी अगर नौकरी न मिले, तो मुश्किल का अंदाजा लगाया जा सकता है. अमेरिका के जैक वाइस की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से PHD करने के बाद उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरी पाने की कई कोशिश की लेकिन बावजूद इसके उन्हें अब तक नौकरी नहीं मिल सकी है. अब वह कानून की पढ़ाई करने पर विचार कर रहे हैं और साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा एक प्रोजेक्ट भी विकसित कर रहे हैं. वाइस की कहानी ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में कंपनियां नई हायरिंग को लेकर सतर्क हैं. शुरुआती स्तर की नौकरियों में मौके कम होने और भर्ती प्रक्रिया में AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल ने नौकरी तलाशने वालों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. 

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प्रिंसटन से डॉक्टरेट, फिर भी नौकरी की तलाश

जो बात इसे और भी ज्यादा अजीब बनाती है वह यह है कि सियोल इकोनॉमिक डेली ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि वाइस ने राइस यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद 2018 में उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के PHD प्रोग्राम में एडमिशन लिया था.

वाइस ने बर्फ बनने की प्रोसेस पर भी रिसर्च किया था. उनकी इस रिसर्च का जिक्र साल 2024 के फिजिक्स नोबेल पुरस्कार के संदर्भ में मशीन लर्निंग के वैज्ञानिक इस्तेमाल के उदाहरण के तौर पर किया गया था. इतनी मजबूत एजुकेशन करियर होने के बाद भी उन्हें रिसर्च और पोस्टडॉक्टरल पदों पर सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कंसल्टिंग समेत कई क्षेत्रों में नौकरी तलाश की. उन्होंने एक ऐसी कंपनी में भी आवेदन किया, जहां फ्रोजन क्रैब केक तैयार किए जाते हैं.

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AI स्टार्टअप में मिला अस्थायी काम

जनवरी 2026 में वाइस को AI स्टार्टअप मरकोर में अस्थायी तौर पर काम मिला. वहां उन्हें AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के काम के लिए हर घंटे 70 डॉलर मिलते थे. हालांकि, यह काम लंबे समय तक नहीं चला. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, धीरे-धीरे उनके काम की मात्रा कम होती गई और मार्च के बीच में उनका ये काम भी खत्म हो गया. इसके बाद उन्होंने वापस से नौकरी की तलाश शुरू कर दी. 

अमेरिका में युवाओं के लिए नौकरी पाना क्यों हो रहा मुश्किल?

वाइस का अनुभव अमेरिका के रोजगार बाजार में मौजूद चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचता है. सियोल इकोनॉमिक डेली ने फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2026 की दूसरी तिमाही में हाल में कॉलेज से निकले 5.6 प्रतिशत युवा बेरोजगार थे. इसी अवधि में हाल में स्नातक हुए युवाओं के बीच कम योग्यता वाले पदों पर काम करने की दर 42 प्रतिशत तक पहुंच गई. यानी नौकरी कर रहे कई युवा ऐसे काम कर रहे थे, जिनके लिए आमतौर पर कॉलेज की डिग्री जरूरी नहीं मानी जाती. 

अमेरिकी रोजगार बाजार में कंपनियां भर्ती को लेकर सतर्क बनी हुई हैं. ऐसे माहौल में नौकरी बदलना या नई नौकरी हासिल करना उम्मीदवारों के लिए मुश्किल हो सकता है. AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल ने भी भर्ती प्रक्रिया को बदलना शुरू कर दिया है. कुछ कंपनियां नियमित और शुरुआती स्तर के कामों को AI से कराने की कोशिश कर रही हैं, हालांकि इसका असर सभी क्षेत्रों और नौकरियों पर एक जैसा नहीं है. 

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अब कानून की पढ़ाई पर विचार कर रहे वाइस

2,300 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन करने के बाद भी वाइस ने कोशिश करना नहीं छोड़ा है. वह अब कानून की पढ़ाई पूरी करने पर विचार कर रहे हैं. इसके साथ ही वह तेजी से फैलने वाले अवांछित पौधों से निपटने के लिए AI आधारित ड्रोन विकसित करने पर भी काम कर रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि मजबूत शैक्षणिक योग्यता और अलग-अलग क्षेत्रों में कोशिश करने के बावजूद नौकरी मिलने में अनिश्चितता बनी रह सकती है. हालांकि, वाइस का अनुभव अमेरिका के रोजगार बाजार की एक व्यक्तिगत मिसाल है.

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