'सच्चे कर्मचारी नहीं देखते घड़ी', बॉस की बात पर Gen Z एम्प्लॉय ने कैलकुलेटर से बता दिया हिसाब

जेन जी के बदलते वर्क कल्चर में नौकरी और ऑफिस को देखने का नजरिया भी अलग दिखाई देता है. सोशल मीडिया पर वायरल एक मामले में जेन जी कर्मचारी ने ऑफिस टाइमिंग और ज्यादा घंटे काम करने को लेकर बॉस के सामने अपनी बात बेझिझक रखी. यह किस्सा बताता है कि युवा कर्मचारी अब काम के घंटे, कमाई, जिम्मेदारियों और निजी समय के बीच संतुलन को भी महत्व देते हैं.

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जेन जी के वर्क कल्चर से क्या बॉसेज हो रहे है परेशान? जेन जी के वर्क कल्चर से क्या बॉसेज हो रहे है परेशान?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:06 PM IST

ऑफिस में हर दिन कुछ न कुछ नया होता रहता है. कभी कोई नया एम्प्लॉय टीम का हिस्सा बनता है, तो कभी कोई कंपनी छोड़ देता है. कभी काम का दबाव बढ़ जाता है, तो कभी ऑफिस के माहौल और काम करने के तरीके को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है. ऐसे में किसी नए एम्प्लॉय के लिए नई जगह, नए लोगों और काम करने के तरीके को समझना अपने आप में एक अलग अनुभव होता है.

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जब से जेन जी वर्क कल्चर का हिस्सा बनी है, सोशल मीडिया पर इस पीढ़ी के साथ काम करने के अलग-अलग अनुभव भी लगातार सामने आते रहते हैं. उनके काम करने के तरीके से लेकर ऑफिस और नौकरी को लेकर उनका नजरिया लोगों का ध्यान खींचता है.  ऐसा ही एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जहां एक जेन जी कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया.

X पर एक यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए अपने जेन जी इन्टर्न के बारे में चर्चा की. X यूजर ने बताया कि एक दिन उनके ऑफिस में नया इन्टर्न 9:07 मिनट पर ऑफिस पहुंचा. बॉस ऑफिस में थे. उन्होंने घड़ी की ओर देखा और कहा, 'आज देर से आए हो?' इन्टर्न ने बिना झिझके बॉस की तरफ देखा और कहा, 'मेरे काम का 'टाइम सुबह 9 बजे से है, लेकिन मेरे दिमाग की सबसे अच्छी काम करने की क्षमता सुबह 9:15 बजे से शुरू होती है.' ये सुनते ही पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया. आखिर ऐसे जवाब की कहां ही किसी ने कोई उम्मीद की होगी.

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बॉस पहले हल्का सा मुस्कुराए और फिर उन्होंने अपने एम्प्लॉय को टेस्ट करना चाहा. उसको परखने की कोशिश करते हुए कहा कि 'एक समर्पित कर्मचारी घड़ी देखकर काम नहीं करता.' और फिर जो हुआ वो करने की हिम्मत शायद कोई जेन जी ही रख सकता है. एम्प्लॉय ने कैलकुलेटर खोला और कहा,  'अगर मैं फिक्स्ड टाइम से ज्यादा काम करूंगा, तो ज्यादा घंटों की वजह से मेरी प्रति घंटे की अर्निंग कम हो जाएगी. मेरे लिए यहे फायदे का सौदा नहीं है.'

ऐसा जवाब की उस कमरे में सभी मौजूद लोगों ने शायद ही उम्मीद की होगी. बॉस करीब 10 सेकेंड तक वहीं खड़े रहे. उन्होनें पलकें झपकाईं, फिर चुपचाप पलटे और अपने कमरे में वापस चले गए. वो इन्टर्न सिर्फ जॉब  करने नहीं आया था, बल्कि अपने जवाबों से अनजाने में पूरे ऑफिस में सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला एम्प्लॉय बन गया.

जेन जी का बदला वर्क कल्चर

ये कहानी भले ही मजाकिया अंदाज में सोशल मीडिया पर शेयर की गई हो, लेकिन इसके पीछे जेन जी के बदलते वर्क कल्चर की झलक जरूर दिखाई देती है. आज की युवा पीढ़ी के लिए सिर्फ लंबे टाइम तक ऑफिस में बैठे रहना मेहनत का पैमाना नहीं है. वे अपने काम के घंटे, सैलरी, जिम्मेदारियों और पर्सनल टाइम के बीच बैलेंस को भी महत्व देती है. 

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