नौकरी बची रहे इसलिए नहीं करेंगे अप्रेजल! ZOHO फाउंडर ने कह दी बड़ी बात

जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इस बात को मान लिया है कि एआई के बढ़ते कीमत की वजह से कंपनी अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है. इसकी वजह से उन्होंने कर्मचारियों का अप्रेजल भी रद्द कर दिया जिसके पीछे श्रीधर ने बड़ी वजह बताई है.  

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जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने छंटनी को लेकर कही बड़ी बात. (File Photo) जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने छंटनी को लेकर कही बड़ी बात. (File Photo)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST

टेक इंटस्ट्री इस समय अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है, जिसकी  सबसे  बड़ी वजह है AI. एआई के बढ़ते लागत की वजह से कई बड़ी टेक कंपनियों  ने छंटनी की है इसमें गूगल, ओरेकल जैसे कंपनियों के नाम शामिल है. लेकिन इसका असर अब भी दिखाई दे रहा है.

सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) इस परेशानी से जूझ रहा है. कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लागत की वजह से कंपनी को खर्च संभालने में मुश्किल हो रही है. इसी वजह से जोहो ने इस साल कर्मचारियों के नियमित सैलरी मूल्यांकन और अप्रेजल की प्रक्रिया में बदलाव करने का फैसला किया जिससे छंटनी की नौबत न आ सके.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर श्रीधर वेम्बू ने एक पोस्ट में बताया कि कंपनी खर्च को कम करने के लिए कई कदम उठा रही है. इसके तहत मार्केटिंग बजट में भी कटौती की गई है. उन्होंने पोस्ट में यह भी बताया कि इस साल कंपनी कर्मचारियों का अप्रेजल भी नहीं कर पाएगी. 

वेम्बू ने कर्मचारियों से इस फैसले के लिए माफी भी मांगी. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि हमने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है. हमने अपने कर्मचारियों को यह भी बता दिया है कि इस साल हम हमेशा की तरह सैलरी नहीं बढ़ा पाएंगे. मैं इसके लिए माफी मांगता हूं. 

मुश्किल दौर से गुजर रही हैं कंपनियां

वेम्बू ने यह भी माना कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है. पोस्ट में उन्होंने ये भी बताया कि जोहो बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी से बचने की पूरी कोशिश कर रही है.  वेम्बू के मुताबिक, कंपनी पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ा रही है. टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरियों पर संकट के बीच माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, ओरेकल और टीसीएस जैसी कंपनियों में भी कर्मचारियों की छंटनी की खबरें सामने आई हैं. Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में अब तक 1.31 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं. ऐसे में जोहो का यह बयान टेक इंडस्ट्री में बढ़ती लागत और रोजगार को लेकर बनी चुनौतियों की ओर इशारा करता है. 

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बढ़ती लागत और नौकरी जाने का खतरा 

पिछले एक साल में जोहो का मैसेजिंग ऐप अरट्टाई काफी चर्चा में रहा. हालांकि, कंपनी को भी दूसरी टेक कंपनियों की तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है. जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, सॉफ्टवेयर कारोबार चलाना पहले के मुकाबले मुश्किल होता जा रहा है.

पोस्ट के जरिए उन्होंने आगे बताया किAI की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं. इसके अलावा, AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ने से कंपनी भी भारी दबाव में है. उन्होंने कहा कि कंपनी इन खर्चों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है. लेकिन इसके बाद जो परेशानी सबसे ज्यादा परेशान कर रही है, वह मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां है, जो कारोबार के लिए लगातार चुनौतियां पैदा कर रही हैं. 

श्रीधर वेम्बू बोले- हमारे लिए प्रार्थना करें

जोहो के संस्थापक के मुताबिक, कंपनी बदलती परिस्थितियों के हिसाब से अपने कारोबार को नए सिरे से तैयार कर रही है. हालांकि, इस बदलाव का असर कितना सफल रहेगा, इसका पता चलने में समय लगेगा. वेम्बू ने कहा कि अगले तीन से पांच साल में ही कंपनी के इस नए रूप की सफलता का अंदाजा लगाया जा सकेगा. उन्होंने अपने फॉलोअर्स से कंपनी की इस कोशिश की सफलता के लिए प्रार्थना करने की अपील भी की. 

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यह पहली बार नहीं है जब वेम्बू ने बढ़ती तकनीकी लागत को लेकर चिंता जताई है. अगस्त 2026 में उन्होंने बताया था कि पिछले एक साल में मेमोरी की कीमतों में 500 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. उस समय उन्होंने कहा था कि मेमोरी और AI टोकन की बढ़ती कीमतों ने कारोबार चलाना मुश्किल कर दिया है. उन्होंने यह भी बताया था कि कंपनी ने कीमतें बढ़ाने से परहेज किया है, लेकिन लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है. 

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