38 लाख की पक्की नौकरी छोड़ें या 57 लाख का US कॉन्ट्रैक्ट लें? 29 साल के युवा का सवाल वायरल

फुल-टाइम नौकरी छोड़कर 57 लाख रुपये सालाना US कॉन्ट्रैक्ट जॉब ऑफर स्वीकार कर लेना चाहिए? रेडिट पर शेयर की गई एक पोस्ट में, इस 29 वर्षीय प्रोफेशनल ने अपने पूरे फाइनेंस का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है और ऑनलाइन कम्युनिटी से करियर को लेकर सलाह मांगी है कि उन्हें पक्की नौकरी छोड़नी चाहिए या नहीं. 

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57 लाख के ऑफर को लेकर असमंजस में पड़ा ये शख्स, वजह है 35 साल की उम्र में रिटायर होने का सपना 57 लाख के ऑफर को लेकर असमंजस में पड़ा ये शख्स, वजह है 35 साल की उम्र में रिटायर होने का सपना

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

ज्यादातर प्रोफेशनल्स के लिए अगली नौकरी का मतलब होता है, एक बेहतर पद या फिर एक बड़ी सैलरी. लेकिन एक कर्मचारी के लिए इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उसका अगला कदम उसे एक बहुत बड़े लक्ष्य, यानी महज 35 साल की उम्र में रिटायर होने में मदद कर सकता है? रेडिट पर शेयर की गई एक पोस्ट में, इस 29 वर्षीय प्रोफेशनल ने अपने पूरे फाइनेंस का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है और ऑनलाइन कम्युनिटी से करियर को लेकर सलाह मांगी है.

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यह कर्मचारी वर्तमान में 38 लाख रुपये सालाना का पैकेज कमा रहा है. उन्हें हर महीने 2.32 लाख रुपये इन-हैंड मिलते हैं, जिसके साथ ही 27,000 रुपये प्रोविडेंट फंड (PF) और 11,000 रुपये नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में कंपनी की तरफ से कंट्रीब्यूट होते हैं.

पे-चेक तो बड़ा है, लेकिन बेनिफिट्स गायब हैं
इस प्रोफेशनल ने खुलासा किया कि उन्हें एक कॉन्ट्रैक्ट रोल के लिए 60,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 57 लाख रुपये) सालाना का ऑफर मिला है. हालांकि यह सैलरी देखने में बहुत आकर्षक है, लेकिन इस पद के साथ प्रोविडेंट फंड (PF), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), कॉर्पोरेट इंश्योरेंस या ग्रेच्युटी जैसी कोई भी सुविधाएं नहीं मिलेंगी.

पोस्ट में लिखा था कि मुझे एक और मौका मिल रहा है, एक कॉन्ट्रैक्ट रोल, जिसका सालाना पैकेज 60 हजार USD है, लेकिन इसमें कोई NPS/PF/इंश्योरेंस/ग्रेच्युटी आदि शामिल नहीं है.  इसके बावजूद, कर्मचारी ने बताया कि उनके पास पहले से ही एक 3 साल पुरानी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और परिवार को कवर करने वाला 5 साल पुराना टर्म इंश्योरेंस प्लान है.

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35 की उम्र में रिटायर होने का सपना
इस बड़े बदलाव पर विचार करने के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा 'फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस' है. कर्मचारी ने लिखा कि मैं हर हाल में 35 साल की उम्र में रिटायरमेंट लेना चाहता हूं. उन्होंने आगे जोड़ा कि उनकी पत्नी खुद इतना कमा लेती हैं कि वह अपना खर्च उठा सकें और परिवार के पास पहले से ही पर्याप्त इंश्योरेंस कवर मौजूद है.

इस पोस्ट से उनकी मजबूत वित्तीय स्थिति का भी पता चलता है. इस प्रोफेशनल के पास 75 लाख रुपये की सेविंग्स (बचत) है, 3 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड है और उनका मासिक खर्च 75,000 रुपये तक सीमित है. चूंकि यह एक रिमोट जॉब (Work from Home) है, इसलिए उन्हें कोई किराया भी नहीं देना पड़ता, क्योंकि वे फिलहाल अपने होमटाउन में माता-पिता के साथ रह रहे हैं.

दो सवाल, एक बड़ा फैसला
इस रेडिट यूजर ने अपनी पोस्ट के आखिर में दो सीधे सवाल पूछे कि क्या मुझे यह नया रोल ले लेना चाहिए? और क्या 35 साल की उम्र में रिटायरमेंट संभव है? कर्मचारी ने यह भी साफ किया कि उनके रिटायरमेंट प्लान में यह मानकर चला गया है कि फुल-टाइम काम छोड़ने के बाद शुरुआती सालों में कमाई का कोई दूसरा जरिया नहीं होगा.

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यह पोस्ट आज के प्रोफेशनल्स के बीच बढ़ते उस ट्रेंड को रेखांकित करती है, जो सिर्फ सैलरी हाइक से आगे बढ़कर लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल फ्रीडम (लंबे समय की वित्तीय आजादी) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. आज के कई कामकाजी लोगों के लिए करियर का असली माइलस्टोन सिर्फ ज्यादा कमाना नहीं है, बल्कि उस मुकाम पर पहुंचना है जहां काम करना एक मजबूरी नहीं, बल्कि एक चॉइस (पसंद) बन जाए.

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