होर्मुज में सुसाइड ड्रोन बोट की जंग... समुद्री वॉरफेयर में अमेरिका के सामने ईरान की कितनी ताकत बची है?

होर्मुज में सुसाइड ड्रोन बोट की जंग शुरू हो गई है. अमेरिका ने पहली बार Corsair USV ड्रोन नौकाओं से ईरान की घदीर पनडुब्बी को नष्ट किया. समुद्री युद्ध में ईरान की ताकत कम हो गई है.

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अमेरिका के सेंट्रल कमांड की ओर से जारी वीडियो से निकाली गई तस्वीर. (Photo: X/Centcom) अमेरिका के सेंट्रल कमांड की ओर से जारी वीडियो से निकाली गई तस्वीर. (Photo: X/Centcom)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:41 AM IST

13 जुलाई 2026 को सैन्य इतिहास में एक यादगार दिन बन गया. अमेरिका ने पहली बार अपने Corsair USV (Unmanned Surface Vessels) को हमले के लिए इस्तेमाल किया. इन ड्रोन बोट्स ने ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर घदीर क्लास पनडुब्बी को नष्ट कर दिया. 

CENTCOM के अनुसार, 12 जुलाई को अमेरिकी सेना ने कई टापगेट्स पर हमले किए. तीन कॉरसेयर ड्रोन बोट्स ने बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमला कर घदीर क्लास पनडुब्बी को तबाह कर दिया. यह अमेरिकी इतिहास में USV को हमले के हथियार के रूप में पहला इस्तेमाल था. इससे पहले जून में एक कॉरसेयर USV ने ओमान की खाड़ी में क्रैश हुए अपाचे हेलिकॉप्टर के क्रू को बचाया था.

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अमेरिका की नौसेना क्षमता

अमेरिका दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना रखता है. अमेरिकी नौसेना के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, 70+ परमाणु पनडुब्बियां, 90+ डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट्स हैं. फिफ्थ फ्लीट बहरीन में तैनात है. 2026 युद्ध में अमेरिका ने Task Force 59 के तहत AI और ड्रोन तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया. 

सारोनिक कॉरसेयर USV जैसी ऑटोनॉमस बोट्स अब हमले, बचाव और गश्त के लिए तैयार हैं. रैंड कॉर्पोरेशन और CSIS की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के पास होर्मुज में लगातार 20-30 युद्धपोत और सैकड़ों ड्रोन तैनात करने की क्षमता है.

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ईरान की नौसेना क्षमता

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ईरान की नौसेना दो हिस्सों में बंटी है - नियमित नौसेना और IRGC Navy. IRGC एसिमेट्रिक वॉरफेयर में माहिर है. ईरान के पास 20-25 घदीर और फतेह क्लास छोटी पनडुब्बियां, सैकड़ों स्पीड बोट्स, माइन्स और क्रूज मिसाइलें हैं. लेकिन आधुनिक युद्धपोतों की कमी है.

2026 युद्ध में ईरान ने कई जहाजों पर हमले किए, लेकिन अमेरिकी हमलों में उसकी कई सुविधाएं नष्ट हो चुकी हैं. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज -IISS के 2026 आंकड़ों के अनुसार, ईरान की नौसेना पहले से ही पुरानी है और युद्ध में और कमजोर हुई है.

ड्रोन बोट युद्ध का महत्व

ईरान और हूती विद्रोहियों ने पहले सुसाइड USV का इस्तेमाल किया था. अब अमेरिका ने इसे एडवांस रूप में अपनाया है. यूक्रेन और रूस के युद्ध में भी USV ने रूसी बेड़े को नुकसान पहुंचाया. सारोनिक कॉरसेयर की सफलता पूरे USV उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है.

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ईरान के पास अभी भी कुछ ताकत बची है - माइन्स, ड्रोन और स्पीड बोट स्वार्म हमले. लेकिन अमेरिका की एयर सुपीरियरिटी और ड्रोन तकनीक के आगे ईरान की पारंपरिक नौसेना काफी कमजोर पड़ गई है. CSIS की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े युद्ध में ईरान होर्मुज को कुछ दिनों के लिए बाधित कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक नियंत्रण नहीं रख पाएगा.

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ट्रंप ने होर्मुज को 'गार्जियन ऑफ द स्ट्रेट' कहकर अमेरिका का नियंत्रण घोषित किया. 20% टोल लेने की बात कही. उन्होंने नौसैनिक ब्लॉकेड भी दोबारा लगाया. समुद्री युद्ध में ईरान की ताकत काफी कम हो चुकी है. अमेरिका नई ड्रोन तकनीक से आगे है. होर्मुज पर अमेरिका का प्रभावी नियंत्रण है, लेकिन पूर्ण शांति तभी आएगी जब दोनों पक्ष बातचीत करेंगे.

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