पाकिस्तान अपने ही इलाके में हवाई हमले क्यों कर रहा है? क्या है 'ऑपरेशन शाबान'

पाकिस्तान ने अपने ही प्रांत में 'ऑपरेशन शाबान' शुरू किया है. हवाई और जमीनी कार्रवाई में एक हफ्ते में 105 से ज्यादा अलगाववादी मारे गए हैं. इस अभियान में सुरक्षा बलों ने हमलों के जवाब में कार्रवाई तेज कर दी है.

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पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान के चमन बॉर्डर के पास तैनात टैंक. (File Photo: AFP) पाकिस्तान के प्रांत बलूचिस्तान के चमन बॉर्डर के पास तैनात टैंक. (File Photo: AFP)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

पाकिस्तान इन दिनों अपने ही प्रांत बलूचिस्तान में बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चला रहा है. ऑपरेशन शाबान नाम से शुरू इस कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर और बलूचिस्तान पुलिस हवाई हमलों समेत जमीनी ऑपरेशन कर रही है. एक हफ्ते में 105 से ज्यादा अलगाववादियों के मारे जाने की खबर है. सवाल उठ रहा है कि पाकिस्तान अपने ही क्षेत्र में इतनी भारी बमबारी क्यों कर रहा है?  

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7 जुलाई को बलूचिस्तान में ऑपरेशन शाबान शुरू किया गया. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे अलगाववादी संगठनों ने हाल में कई हमले किए थे. खासतौर पर क्वेटा जिले में एक पुलिस चौकी पर हमला हुआ, जिसमें 9 अधिकारियों की मौत हो गई. 

इसके अलावा 18 जवानों की हत्या और अपहरण की घटनाएं भी हुईं. इन हमलों के जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पूरे प्रांत में सर्च ऑपरेशन, जमीनी कार्रवाई और हवाई हमले शुरू कर दिए. अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, 7 जुलाई से अब तक 71 से ज्यादा अलगाववादी मारे गए हैं. 

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कुछ रिपोर्ट्स में कुल मौतों की संख्या 105 बताई जा रही है. पाकिस्तान का कहना है कि ये कार्रवाई आतंकवादियों और अलगाववादियों के ठिकानों को नष्ट करने के लिए की जा रही है.

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बलूचिस्तान की समस्या क्यों गहरी है?

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है. यहां प्राकृतिक संसाधनों (खनिज, गैस, सोना) की बहुतायत है, लेकिन स्थानीय लोग विकास से बचे हुए हैं. बलूच राष्ट्रवादी और अलगाववादी संगठन लंबे समय से पाकिस्तानी सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार बलूचिस्तान की संपदा का दोहन कर रही है, जबकि स्थानीय लोगों को कुछ नहीं मिल रहा. 

लगभग दो दशकों से बलूचिस्तान में अशांति जारी है. बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे कई गुट सक्रिय हैं. ये संगठन कभी-कभी चीन के प्रोजेक्ट्स (CPEC) और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर भी हमले करते हैं. हाल के महीनों में हिंसा बढ़ी है, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने सख्त रुख अपनाया है.

ऑपरेशन शाबान की खासियत

यह अभियान सिर्फ जमीनी नहीं, बल्कि हवाई हमले भी हो रहे हैं. पाकिस्तानी एयर फोर्स ने संदिग्ध ठिकानों पर बमबारी की. फ्रंटियर कोर (FC) और बलूचिस्तान पुलिस के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं. सुरक्षा बलों का दावा है कि उन्होंने कई आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया है. 

हालांकि, स्थानीय बलूच संगठन और मानवाधिकार कार्यकर्ता इस अभियान की आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि इसमें निर्दोष नागरिक भी मारे जा रहे हैं और जबरन गायब किए जा रहे हैं. पाकिस्तानी सरकार इन आरोपों को खारिज करती है और कहती है कि कार्रवाई सिर्फ आतंकवादियों के खिलाफ है.

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इस अभियान के पीछे के कारण  

  • हालिया हमले: BLA और अन्य गुटों द्वारा सुरक्षा बलों पर लगातार हमले बढ़ गए थे. पुलिस चौकी पर हमला और जवानों की हत्या ने सरकार को मजबूर किया.  
  • सुरक्षा चिंता: बलूचिस्तान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यहां अस्थिरता चीन के निवेश को भी प्रभावित करती है.  
  • राजनीतिक दबाव: पाकिस्तानी सेना और सरकार बलूचिस्तान में नियंत्रण बनाए रखना चाहती है.  
  • आंतरिक सुरक्षा: देश के अन्य हिस्सों में भी आतंकवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए बलूचिस्तान में सख्ती जरूरी समझी गई.

यह अभियान बलूचिस्तान की स्थिति को और जटिल बना सकता है. अगर निर्दोष लोगों की मौत हुई तो स्थानीय गुस्सा बढ़ेगा, जिससे और ज्यादा युवा अलगाववादी गुटों में शामिल हो सकते हैं. दूसरी ओर, अगर सुरक्षा बल सफल रहे तो कुछ समय के लिए हिंसा कम हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें हैं. मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. बलूचिस्तान का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है.

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ऑपरेशन शाबान पाकिस्तान की अपनी जमीन पर चलाया जा रहा सैन्य अभियान है, जो बलूच अलगाववादियों के बढ़ते हमलों का जवाब है. इसमें हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई दोनों शामिल हैं. एक हफ्ते में 100 से ज्यादा मौतें बताई जा रही हैं. 

यह अभियान बलूचिस्तान की पुरानी समस्या को फिर से उजागर करता है - विकास, संसाधनों का बंटवारा और अलगाववाद. पाकिस्तान को सिर्फ सैन्य समाधान नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक समाधान भी ढूंढने होंगे. मौजूदा स्थिति में बलूचिस्तान अशांत बना हुआ है. आगे के दिनों में और अपडेट आने की उम्मीद है. 

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