हूतियों के खिलाफ... सऊदी-PAK-तुर्की के मिलिट्री चीफ मिलेंगे, होगा बड़ा फैसला

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत सैन्य प्रमुखों की आपात बैठक बुला रहे हैं. 24 सितंबर के हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यह कदम उठाया गया. समझौते में एक पर हमला सभी पर हमला माना गया है.

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सऊदी फोर्सेस की गाड़ी को जलाने के बाद उसे देखते हूती. (Photo: Reuters) सऊदी फोर्सेस की गाड़ी को जलाने के बाद उसे देखते हूती. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:19 PM IST

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान अपने सैन्य प्रमुखों की एक जरूरी बैठक करने जा रहे हैं. यह बैठक नए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत हो रही है. समझौते के अनुसार किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाता है. 24 सितंबर को हूती समूह की तीव्र मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यह कदम उठाया गया है. 

इन हमलों में सऊदी अरब के महत्वपूर्ण इलाकों के ऊपर इंटरसेप्शन हुए और तेल सुविधाओं तथा पवित्र शहर के पास नुकसान के दावे भी किए गए. यह समझौते का पहला जवाब है जब किसी सदस्य देश पर खतरा मंडराया. तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने हमलों की निंदा की. 

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सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती ने सैनिकों से राज्य की रक्षा के लिए बलिदान देने की अपील की और इसे पवित्र कर्तव्य बताया. मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हाल ही में बना नया सुरक्षा गठबंधन है. इसमें सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान शामिल हैं. इसका मूल सिद्धांत यह है कि एक सदस्य पर हमला पूरे समूह पर हमला माना जाएगा. 

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इससे तीनों देश एक-दूसरे की सुरक्षा में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हूती हमलों ने इस समझौते को पहली बार असल परीक्षा की स्थिति में ला खड़ा किया है. बैठक में सैन्य प्रमुख चर्चा करेंगे कि कैसे संयुक्त प्रतिक्रिया दी जाए और भविष्य में ऐसे खतरों से कैसे निपटा जाए.  

हूती हमले यमन से जुड़े संघर्ष का हिस्सा रहे हैं. मिसाइल और ड्रोन के जरिए दूर तक हमला करने की क्षमता ने क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती दी है. सऊदी अरब के तेल सुविधाओं और पवित्र स्थलों के पास हमलों के दावे संवेदनशील हैं क्योंकि ये आर्थिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान हैं.  

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धार्मिक और राजनयिक प्रतिक्रिया

सऊदी ग्रैंड मुफ्ती का बयान महत्वपूर्ण है- सैनिकों से राज्य की रक्षा के लिए कुर्बानी देने को कहा. इस्लामी दुनिया में पवित्र शहरों की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है. विदेश मंत्रियों के संयुक्त रुख से साफ है कि तीनों देश हूती कार्रवाई को अस्वीकार करते हैं और सऊदी अरब के आत्मरक्षा अधिकार का समर्थन करते हैं.  

यह बैठक सिर्फ सैन्य स्तर की नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी देती है. इससे पता चलता है कि नए समझौते को गंभीरता से लिया जा रहा है. तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों का शामिल होना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है.  

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हूती हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ा दिया है. तेल सुविधाओं पर खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित कर सकता है. मक्का समझौते के तहत सैन्य प्रमुखों की बैठक से संयुक्त रणनीति बनने की उम्मीद है. इसमें सूचना साझाकरण, संयुक्त अभ्यास या रक्षा सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं.  

यह घटना मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था में नए गठबंधनों की भूमिका को रेखांकित करती है. तीनों देश मिलकर प्रतिक्रिया देकर न सिर्फ सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत करना चाहते हैं बल्कि समझौते की विश्वसनीयता भी साबित करना चाहते हैं. आने वाले दिनों में बैठक के नतीजे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. कुल मिलाकर यह कदम हूती खतरे के खिलाफ सामूहिक जवाब की दिशा में बढ़ाया गया है.
 

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