BRCIS के बीच भारत को रूस का ऑफर, सुखोई-30 में एडवांस इंजन लगाने प्रस्ताव

रूस ने भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए एडवांस्ड इंजन 177S देने की पेशकश की है, जो 14.5 टन तक थ्रस्ट प्रदान करता है और पुराने AL-31F/FP इंजन के समान आकार और वजन में है.

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भारतीय वायुसेना का मुख्य लड़ाकू विमान सुखोई-30 MKI. (Photo- ITG) भारतीय वायुसेना का मुख्य लड़ाकू विमान सुखोई-30 MKI. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:37 AM IST

रूस ने भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए एडवांस्ड इंजन इजदेलिये 177S (Izdeliye 177S) देने की पेशकश की है.

मॉस्को के साथ मौजूदा सहयोग और भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के आधार पर ये नया इंजन बिना किसी बड़े रीडिजाइन के विमानों की क्षमता को नई शक्ति देगा. 14.5 टन तक का थ्रस्ट देने वाला ये इंजन पुराने AL-31F/FP के बराबर वजन और आकार में तैयार किया गया है. बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच पांचवीं पीढ़ी के Su-57E लड़ाकू विमान पर जारी चर्चाओं के बीच ये महत्वपूर्ण रक्षा प्रस्ताव सामने आया है.

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ईंधन की खपत होगी कम

प्रस्तावित 177S इंजन मौजूदा सुखोई विमानों की क्षमता में बड़ा इजाफा कर सकता है. ये पावरप्लांट 14.5 टन तक का दमदार थ्रस्ट प्रदान करता है. खास बात ये है कि इसका आकार और वजन पुराने AL-31F/FP इंजन के बिल्कुल समान रखा गया है. इससे सुखोई के मौजूदा विमानों में इसे आसानी से इंटीग्रेट किया जा सकता है. इसके अलावा ये इंजन विभिन्न ऑपरेटिंग मोड में 7% कम ईंधन खपत करता है.

6,000 घंटे की लाइफ

दावों के मुताबिक, इस नए इंजन का रिसोर्स 6,000 घंटे तक पहुंचता है जो इसके लंबे वक्त तक संचालन को सुनिश्चित करता है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पहले से ही लाइसेंस के तहत AL-31FP इंजनों का निर्माण और रखरखाव कर रही है. ऐसे में 177S इंजन भारत के घरेलू एयरोस्पेस विकास में अगला बड़ा चरण साबित हो सकता है. इससे देश के अंदर ही तकनीकी दक्षता को नई ऊंचाई मिलेगी.

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Su-57E और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत

दरअसल, ये अहम प्रस्ताव ऐसे वक्त में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों पर निरंतर बातचीत जारी है. दोनों देशों के बीच पांचवीं पीढ़ी के Su-57E लड़ाकू विमान को लेकर भी उच्च स्तरीय चर्चा चल रही है. सुखोई इंजन का ये नया सहयोग दोनों देशों के बीच पांचवीं पीढ़ी के विमानन संबंधों और रक्षा साझेदारी को और ज्यादा व्यापक बनाएगा.

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