सेवानिवृत्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण खुलासा किया. उन्होंने बताया कि 10 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान ने डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए भारत से तत्काल युद्धविराम की मांग की थी. लेकिन भारत ने जानबूझकर जवाब में देरी की. दोपहर तक इंतजार कराया. कारण यह था कि भारत की योजनाबद्ध हमलों में से आधे बाकी थे.
जनरल चौहान ने स्पष्ट कहा कि भारत अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने के बाद ही संघर्ष विराम मानने के लिए तैयार था. यह खुलासा ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति को समझने का महत्वपूर्ण मौका देता है. इस ऑपरेशन की शुरुआत 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में हुई थी, जिसमें 25 पर्यटक मारे गए थे.
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भारत ने पहले चरण में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाया. पाकिस्तान ने जवाब में ड्रोन और मिसाइलें दागीं, लेकिन ज्यादातर को भारतीय डिफेंस सिस्टम ने बेकार कर दिया. इसके बाद भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर वार शुरू किए.
पाकिस्तान की घबराहट
जनरल चौहान के अनुसार, 9 मई की रात से 10 मई दोपहर तक भारत ने पाकिस्तान के 11 सैन्य ठिकानों और एयरबेस पर कई लहरों में हमले किए. इनमें हैंगर, रडार साइट्स और कई लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त हुए. नूर खान (रावलपिंडी), रहीम यार खान और भोलारी जैसे ठिकानों को इतना नुकसान हुआ कि उनकी आज भी मरम्मत हो रही है.
पाकिस्तान ने करीब आठ घंटे के अंदर फोन किया क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि अगर संघर्ष जारी रहा तो नुकसान और तेज तथा गहरा होगा. सुबह 9:30 बजे युद्धविराम की पेशकश आने के बावजूद भारत ने उसे तुरंत स्वीकार नहीं किया. जनरल चौहान ने कहा कि दोपहर तक इंतजार इसलिए किया गया ताकि जीत और अधिक निर्णायक हो सके.
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10 बजे और फिर 1 बजे नई लहर के हमले किए गए. इसके बाद ही संघर्ष विराम पर सहमति बनी. उन्होंने जोर दिया कि भारत का उद्देश्य साफ संदेश देना था कि पाकिस्तान का कोई भी सैन्य प्रतिष्ठान भारतीय बलों की पहुंच से बाहर नहीं है. जनरल चौहान ने एक अहम बात रेखांकित की.
उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसके सैन्य कमांडरों की उस क्षमता में थी जिससे वे भारतीय और पाकिस्तानी दोनों हमलों के प्रभाव का आकलन दुश्मन से कहीं तेज कर सकते थे. बेहतर बैटलफील्ड ट्रांसपेरेंसी के कारण भारत को पता था कि उसके हमलों से क्या हासिल हुआ और पाकिस्तान के हमलों का क्या असर रहा. इससे फैसले तेजी से लिए जा सके.
पाकिस्तान की कोशिश थी कि वह भारत की तरह गहराई में और तेज हमले कर सके. लेकिन भारत ने पहले ही कई रडार नष्ट कर दिए थे. एयरफील्ड्स पर हमले शुरू कर दिए थे. मुख्य ठिकानों के रनवे क्षतिग्रस्त होने से पाकिस्तान के लिए सॉर्टीज निकालना मुश्किल हो गया. जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान ने सुबह 9:30 बजे इसलिए संपर्क किया क्योंकि वायु शक्ति का दबाव असहनीय हो गया था. उसे लगा कि अब बात करना बेहतर है, वरना स्थिति और बिगड़ जाएगी.
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निर्णायक जीत का लक्ष्य
पूर्व सीडीएस ने साफ कहा कि भारत आधी योजनाएं पूरी होने से पहले रुकना नहीं चाहता था. उन्होंने बताया कि 9 मई को पाकिस्तान की तरफ से आ रही बयानबाजी में यह दावा था कि वह 48 घंटे में भारत को सबक सिखा देगा. लेकिन वास्तविकता इसके उलट निकली. पाकिस्तान को लगा कि उसके हमलों ने अपेक्षित असर डाल दिया है.
आगे बढ़ने से बड़े नुकसान का खतरा है. भारत ने इस घबराहट का फायदा उठाते हुए अपने बाकी लक्ष्यों को पूरा किया. यह खुलासा दिखाता है कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं बल्कि सावधानीपूर्वक सैन्य रणनीति का परिणाम था. भारत ने आतंकी शिविरों से शुरू करके सैन्य ठिकानों तक पहुंचा और हर चरण में नियंत्रण बनाए रखा. पाकिस्तान की तरफ से बार-बार युद्धविराम की मांग इस बात का संकेत थी कि दबाव बढ़ चुका था.
जनरल चौहान के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि आधुनिक संघर्ष में सूचना की श्रेष्ठता और तेज फैसला लेने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है. भारत ने न सिर्फ हमले किए बल्कि उनके प्रभाव का सही आकलन कर आगे की रणनीति तय की. पाकिस्तान को यह संदेश गया कि सीमा पार आतंकवाद का समर्थन महंगा पड़ सकता है. सैन्य प्रतिष्ठान भी सुरक्षित नहीं हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भी ये खुलासे सैन्य इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो रहे हैं. यह याद दिलाता है कि मजबूत इरादे, स्पष्ट लक्ष्य और बेहतर तैयारी के साथ सीमित संघर्ष में भी निर्णायक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं. भारत ने पाकिस्तान को इंतजार कराकर अपनी शर्तों पर संघर्ष विराम हासिल किया.
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