गड़बड़ गोला-बारूद से 62 करोड़ का नुकसान, धनुष प्रोजेक्ट पर भी PAC ने उठाए सवाल

PAC ने रक्षा मंत्रालय पर 62.10 करोड़ रुपये के गड़बड़ गोला-बारूद के नुकसान का आरोप लगाया है. तोपखाने की खरीद में दशकों की देरी से सेना की तैयारियां प्रभावित हो रही है. धनुष तोप पर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल गैप उजागर हुई है.

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नासिक में एक्सरसाइज तोपची में धनुष गन को दागते सैनिक. (File Photo: PTI) नासिक में एक्सरसाइज तोपची में धनुष गन को दागते सैनिक. (File Photo: PTI)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 23 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:32 PM IST

संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) ने एक बार फिर रक्षा मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाई है. PAC की 49वीं रिपोर्ट (18वीं लोकसभा, 2026-27) में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल द्वारा सेना को दिए गए गड़बड़ गोला-बारूद की जगह नए माल सप्लाई करने पर 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान उजागर किया गया है. समिति ने आर्टिलरी गन्स की खरीद में दशकों की देरी को भी सेना की ऑपरेशनल तैयारी के लिए बड़ा खतरा बताया है. 

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धनुष तोप जैसे स्वदेशी प्रोजेक्ट की उत्पादन समस्याओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. PAC ने पांच प्रमुख सिफारिशें की हैं जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, स्किल डेवलपमेंट, बेहतर निर्णय प्रक्रिया और समयबद्ध उत्पादन शामिल हैं. यह रिपोर्ट आत्मनिर्भर भारत के रक्षा लक्ष्यों को हासिल करने में आने वाली असल चुनौतियों को सामने लाती है.

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गड़बड़ गोला-बारूद से 62 करोड़ का घाटा

PAC ने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल द्वारा सप्लाई किए गए गड़बड़ को बदलने पर हुए 62.10 करोड़ रुपये के नुकसान को गंभीर बताया. ऐसी खामियां न सिर्फ पैसे की बर्बादी हैं बल्कि सेना के गोला-बारूद स्टॉक की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं. समिति ने रक्षा मंत्रालय से मांग की है कि सप्लाई चेन को सख्त SOPs और समयसीमा के साथ मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं.

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20 साल की आर्टिलरी खरीद देरी, सेना पुरानी तोपों के सहारे

1986 में बोफोर्स से 155mm/39 कैलिबर तोपें खरीदी गई थीं. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी हुआ था. 1989 के बैन के बाद नई ऊंची कैलिबर वाली तोपें खरीदने की कोशिश 1990 के दशक में हुई लेकिन जरूरतों का फैसला न हो पाने और विक्रेताओं के कम रिस्पॉन्स से प्रक्रिया रुक गई. 

PAC के अनुसार मंत्रालय को नई तोप प्रणाली खरीदने और शामिल करने में दो दशक लग गए. इससे आर्मी में भारी कमी आई और पुरानी तोपों का इस्तेमाल जारी रहा जिनकी फायरपावर सीमित है. समिति ने कहा कि MoD को स्टॉक की नियमित समीक्षा, कैपेबिलिट गैप्स की पहचान और उभरते खतरों के अनुसार समय पर खरीद का मजबूत तंत्र बनाना चाहिए.

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धनुष तोप पर इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पादन की खामियां

स्वदेशी 155mm/45 कैलिबर धनुष तोप प्रोजेक्ट को PAC ने सराहा लेकिन उत्पादन में आई देरी पर नाराजगी जताई. समिति ने कहा कि प्रोडक्शन मेथडोलॉजी धीरे-धीरे विकसित हुई क्योंकि भारत में पहले कभी ऐसी एडवांस तोप नहीं बनाई गई थी. मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की जरूरत के अनुरूप नहीं था. 

PAC MoD के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई. उसने सिफारिश की कि ऐसे प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले घरेलू क्षमताओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी जांच होनी चाहिए ताकि देरी और लागत बढ़ोतरी रोकी जा सके. घरेलू निर्माताओं को ज्यादा R&D सपोर्ट देने पर जोर दिया गया.

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स्किल और क्षमता की कमी: विशेषज्ञता की दरकार

रिपोर्ट में बैलिस्टिक एक्सपर्टीज, गन इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड साइटिंग सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने वाली तकनीकी कमी को देरी का बड़ा कारण बताया गया. हालांकि बाद में स्वदेशी प्रयासों से इन गैप्स को पूरा किया गया लेकिन PAC ने कहा कि इन्हें प्रोजेक्ट मंजूरी के समय ही पहचान लिया जाना चाहिए था.
 
समिति ने IITs और टेक संस्थानों में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए स्पेशलाइज्ड कोर्स शुरू करने और DPSU कर्मियों के नियमित अपस्किलिंग का सुझाव दिया. इससे भारत वैश्विक स्तर के स्टैंडर्ड को मैच कर सकेगा.

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PAC ने स्वीकार किया कि धनुष तोप ने बोफोर्स के पार्ट्स की कॉमनलिटी के कारण रखरखाव में मदद की. लेकिन उत्पादन में देरी से आर्टिलरी डिवीजन की ऑपरेशनल तैयारी प्रभावित हुई. समिति ने MoD की निर्णय प्रक्रिया में ढांचागत बदलाव, बेहतर सप्लाई चेन मैनेजमेंट और वेंडर्स के लिए सख्त टाइमलाइंस की मांग की.

धनुष प्रोजेक्ट को OFB के एपेक्स लेवल और आर्मी के Technical Oversight Group (TOG) द्वारा मॉनिटर किया गया था फिर भी कई डेडलाइंस मिस हो गईं. PAC ने मार्च 2027 तक विस्तारित समयसीमा में प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने को कहा. AWEIL को प्रोएक्टिव रहकर व्यवधानों का पहले से अनुमान लगाने की सलाह दी गई.

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आत्मनिर्भर भारत में चुनौतियां

भारत आर्टिलरी आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है क्योंकि भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं. PAC ने चेतावनी दी कि उत्पादन में देरी से डिजाइन ऑब्सोलीट हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि रक्षा क्षेत्र में देरी देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं.

PAC की 5 प्रमुख सिफारिशें: रास्ता दिखाती रिपोर्ट

  • स्टॉक समीक्षा और कैपेबिलिटी गैप्स  की समय पर पहचान.  
  • घरेलू क्षमताओं का पहले आकलन कर प्रोजेक्ट शुरू करना.  
  • स्किल डेवलपमेंट कोर्स और DPSU अपस्किलिंग.   
  • निर्णय प्रक्रिया में सुधार और सप्लाई चेन मजबूती.  
  • मॉनिटरिंग को और प्रभावी बनाना तथा समयसीमा का सख्त पालन.

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सुरक्षा को प्राथमिकता देने का समय

PAC की 49वीं रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है. दोषपूर्ण गोला-बारूद से 62 करोड़ का नुकसान और आर्टिलरी खरीद की दशकों की देरी चिंताजनक है. धनुष जैसे प्रोजेक्ट्स स्वदेशी क्षमता बढ़ाने वाले हैं लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल और प्लानिंग की कमियां उन्हें कमजोर कर रही हैं. 

सरकार को इन सिफारिशों को तेजी से लागू करना चाहिए. अगर रक्षा उत्पादन में सुधार हुआ तो भारतीय सेना मजबूत बनेगी और आत्मनिर्भरता का सपना हकीकत बनेगा. भू-राजनीतिक चुनौतियों के इस दौर में समय पर आधुनिक हथियार हासिल करना राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी जरूरत है.

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