ईरान की अब खैर नहीं... ट्रंप भेज रहे दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप

ट्रंप ईरान पर परमाणु डील के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं. पेंटागन ने दूसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात करने को कहा है. अगर बातचीत फेल हुई तो हमला संभव है. पहला कैरियर पहले से मौजूद है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तनाव चरम पर है. क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है.

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ये है अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H. W. Bush. (Photo: Getty) ये है अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H. W. Bush. (Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी करने को कहा है. यह कदम ईरान पर संभावित हमले की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को परमाणु समझौते के लिए मजबूर करना चाहते हैं. 

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क्या हुआ है?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पेंटागन ने दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप (जिसमें कैरियर, विध्वंसक जहाज और लड़ाकू विमान शामिल होते हैं) को मिडिल ईस्ट के लिए तैयार रहने को कहा है. अभी तैनाती का अंतिम आदेश नहीं दिया गया, लेकिन यह कुछ घंटों में हो सकता है.

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यह दूसरा कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश हो सकता है, जो अभी अमेरिकी पूर्वी तट पर ट्रेनिंग कर रहा है. पहला कैरियर USS अब्राहम लिंकन पहले से ही मिडिल ईस्ट क्षेत्र में मौजूद है. अगर दूसरा कैरियर भेजा गया, तो लगभग एक साल बाद पहली बार क्षेत्र में दो अमेरिकी कैरियर होंगे.

ट्रंप क्या कह रहे हैं?

राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वे ईरान के साथ बातचीत पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अगर बातचीत फेल हुई तो सैन्य कार्रवाई के लिए दूसरा कैरियर भेज सकते हैं. ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ा रहे हैं ताकि वह अपना परमाणु कार्यक्रम रोककर नया समझौता करे. वे कहते हैं कि ईरान को पुराने समझौते (2015 JCPOA) से बेहतर डील करनी होगी.

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क्यों हो रहा है यह सब?

  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम: ईरान यूरेनियम को हथियार बनाने लायक स्तर तक समृद्ध कर रहा है, जिससे अमेरिका और इजरायल चिंतित हैं.
  • ट्रंप प्रशासन ईरान पर मैक्सिमम प्रेशर नीति अपना रहा है – प्रतिबंध, सैन्य तैनाती और धमकी.
  • अगर बातचीत फेल हुई, तो अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला कर सकता है. इसके लिए कैरियर से F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट इस्तेमाल होंगे.
  • दूसरा कैरियर भेजने से अमेरिका की हवाई ताकत दोगुनी हो जाएगी, जो लंबी लड़ाई के लिए जरूरी है.

अमेरिका-ईरान तनाव की पुरानी कहानी

2018 में ट्रंप ने पुराना परमाणु समझौता (JCPOA) तोड़ दिया और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए. उसके बाद ईरान ने अपना कार्यक्रम तेज कर दिया. 2025-2026 में ट्रंप फिर सत्ता में आए और नई बातचीत शुरू की, लेकिन ईरान कड़े रुख पर है. हाल ही में इजरायल-ईरान तनाव भी बढ़ा है. अमेरिका इजरायल की रक्षा के लिए भी सैन्य तैनाती कर रहा है.

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क्या होगा आगे?

  • अगर तैनती का आदेश आया, तो दूसरा कैरियर 2-3 हफ्तों में मिडिल ईस्ट पहुंचेगा.
  • यह सिर्फ तैयारी है, हमला तय नहीं है. अमेरिका दिखाना चाहता है कि वह गंभीर है.
  • दो कैरियर होने से अमेरिका की स्थिति मजबूत होगी, लेकिन युद्ध की स्थिति बहुत खतरनाक हो सकती है.

अमेरिका ईरान को परमाणु डील के लिए मजबूर करने के लिए सैन्य ताकत दिखा रहा है. दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी तनाव को और बढ़ा रही है. फिलहाल बातचीत का मौका है, लेकिन अगर फेल हुई तो मिडिल ईस्ट में बड़ा संघर्ष हो सकता है. 

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