जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच महत्वपूर्ण रक्षा समझौते हुए. इनमें ब्रह्मोस के साथ अस्त्र Mk1 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की खरीद पर सैद्धांतिक सहमति शामिल थी. अब अंतिम शर्तों पर बातचीत चल रही है.
इंडोनेशियाई इंजीनियर अपनी Su-30MK2 और Su-27SKM जेट्स पर अस्त्र मिसाइल की फिटिंग और अनुकूलता की जांच कर रहे हैं. यह भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक के निर्यात में बड़ा कदम है. इंडोनेशिया अस्त्र का पहला विदेशी खरीदार बनने जा रहा है. अस्त्र मिसाइल DRDO द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा बनाई गई है.
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यह सक्रिय रडार होमिंग वाली बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल है. निर्यात संस्करण की रेंज करीब 110 किलोमीटर बताई जाती है. इंडोनेशिया फिलहाल रूसी R-77 मिसाइल इस्तेमाल करता है, जिसकी रेंज 70-80 किलोमीटर है. अस्त्र इससे काफी आगे लक्ष्य भेद सकती है. इससे इंडोनेशियाई वायुसेना की क्षमता मजबूत होगी.
रडार इंटीग्रेशन की मुख्य चुनौती
सबसे बड़ी तकनीकी बाधा रडार सिस्टम में अंतर है. भारतीय Su-30MKI पर एन011एम बार्स रडार लगा है, जो पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे वाला है. एक साथ चार लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है. इंडोनेशिया के Su-30MK2 पर एन001वीईपी पल्स-डॉपलर रडार है. यह पुराना सिस्टम है और एक समय में सिर्फ दो लक्ष्यों को ट्रैक कर पाता है.
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अस्त्र को इस रडार के साथ पूरी तरह एकीकृत करना होगा, तभी इसकी पूरी रेंज का फायदा उठाया जा सकेगा. सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपग्रेड की जरूरत पड़ेगी. भारत डायनामिक्स लिमिटेड इस काम में मदद कर सकता है. Su-30MK2 चीनी संस्करण से लिया गया है, जबकि भारतीय एमकेआई खास भारतीय जरूरतों के हिसाब से विकसित है. इसलिए एकीकरण आसान नहीं है, लेकिन दोनों देश रूसी मूल के विमान चलाते हैं, इसलिए सहयोग संभव है. सफलता मिलने पर अन्य सु-३० ऑपरेटिंग देशों के लिए भी रास्ता खुल सकता है.
यह सौदा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देता है. इंडोनेशिया रूसी मिसाइलों पर निर्भरता कम करना चाहता है. अस्त्र सस्ता और सिद्ध हथियार है. इंटीग्रेशन सफल रहा तो इंडोनेशियाई वायु सेना की हवा से हवा में लड़ाई की क्षमता बढ़ जाएगी. अंतिम करार और संख्या अभी तय होनी बाकी है, लेकिन दोनों देशों के इंजीनियर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं. यह भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा.
ऋचीक मिश्रा