पहली बार इंडिया टुडे टीवी ने दर्शकों को एक सिम्युलेटर आधारित रीक्रिएएशन दिखाया है. 15 सितंबर को उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के पीएनएस हुनैन के बीच हुई टक्कर की घटना पर आधारित है. यह दृश्य वास्तविक फुटेज नहीं बल्कि उदाहरण के लिए रीक्रिएट गया है.
भारतीय सूत्रों के अनुसार भारतीय युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था जब पाकिस्तानी जहाज तेज गति से करीब आया. सिम्युलेटर में युद्धपोत के ब्रिज का माहौल दोबारा बनाया गया है. इसमें कैप्टन और उनकी टीम दूसरे जहाज की हलचल पर नजर रखती है. उसकी दिशा का आकलन करती है. खतरनाक स्थिति बनने पर प्रतिक्रिया देती है. यह दृश्य बताता है कि समुद्र में पल भर में बदलने वाली परिस्थितियों में कैसे फैसले लिए जाते हैं.
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प्रशिक्षण वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करता है
जेन टेक्नोलॉजीज के निदेशक रिटायर्ड कैप्टन संजय कुमार बताते हैं कि नौसेना कर्मियों को बार-बार चुनौतीपूर्ण और जटिल परिदृश्यों का सामना करवाया जाता है ताकि वे दबाव में सही फैसला ले सकें. सिमुलेशन का उद्देश्य अधिकारी को वास्तविकता के जितना करीब संभव हो उतनी स्थितियों में रखना है. उसे स्थिति का आकलन करना होता है. सही निर्णय लेना होता है. दबाव में उसे लागू करना होता है.
सिर्फ किसी एक घटना के लिए प्रशिक्षण नहीं दिया जाता बल्कि स्थितिजन्य जागरूकता बनाए रखने और तेजी से बदलती परिस्थितियों में सही प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित की जाती है. बार-बार अभ्यास इसलिए किया जाता है कि वास्तविक स्थिति आने पर प्रतिक्रिया प्रशिक्षण से स्वतः निकल आए. ब्रिज पर घबराने या उलझन में पड़ने का समय नहीं होता.
धैर्य कभी न खोएं
जेन टेक्नोलॉजीज से जुड़े पूर्व पनडुब्बी अधिकारी रिटायर्ड कमांडर अंकित रावल, प्रशिक्षण के एक महत्वपूर्ण पहलू पर जोर देते हैं. वे कहते हैं कि चुनौतीपूर्ण या उत्तेजक स्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना जरूरी है. पनडुब्बी के रूप में सिखाया जाता है कि कभी धैर्य न खोएं. कोई आपको चुनौती दे या उकसाए तो भी शांत, संयमित और मिशन पर केंद्रित रहना होता है. जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के समुद्री वातावरण में गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
दूसरे व्यक्ति की हरकतें आपके मन की स्थिति को प्रभावित न करने दें. प्रशिक्षण सिखाता है कि शांत रहें. स्थिति का आकलन करें और फिर उचित कार्रवाई करें. भावनात्मक नियंत्रण बनाए रखना समुद्री संचालन में बहुत महत्वपूर्ण होता है.
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नौसेना ब्रिज सिम्युलेटर के अंदर
विशेष सिम्युलेटर फुटेज दर्शकों को युद्धपोत के ब्रिज के अंदर ले जाता है. यहां नौसेना अधिकारी नेविगेशन, निगरानी, संचार और निर्णय लेने का अभ्यास करते हैं. हाई क्वालिटी वाले ये सिमुलेशन क्रू को बार-बार कठिन स्थितियों का अनुभव कराते हैं बिना वास्तविक जोखिम के.
रीक्रिएशन दिखाता है कि कमांडिंग अधिकारी को लगातार अपने चारों ओर की तस्वीर बनानी होती है. जब कोई दूसरा जहाज दिशा बदलता है या दूरी कम करता है तो समय पर फैसला लेना पड़ता है. ऐसे प्रशिक्षण से प्रक्रियाएं, संचार और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है.
जेन टेक्नोलॉजीज की सिमुलेशन विशेषज्ञता
यह सिम्युलेटर तकनीक एआरआई सिमुलेशन की है जो जेन टेक्नोलॉजीज की सहायक कंपनी है. यह दशकों से रक्षा और अन्य क्षेत्रों के लिए सिमुलेशन और प्रशिक्षण समाधान विकसित कर रही है. एआरआई के पास नौसेना ब्रिज ऑपरेशंस सिम्युलेटर और सामरिक प्रशिक्षण प्रणालियां हैं जो वास्तविक वातावरण की नकल करती हैं. तकनीक नौसेना कर्मियों को जटिल परिदृश्यों का बार-बार अभ्यास करने देती है ताकि वे समुद्र में ऐसी चुनौतियों का सामना करने से पहले प्रक्रियाओं से परिचित हो जाएं.
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वास्तविक परीक्षा से पहले प्रशिक्षण
इंडिया टुडे का यह रीक्रिएएशन नौसेना संचालन के मूल सिद्धांत को दिखाता है. जब जटिल स्थिति कुछ सेकंड में सामने आती है तो उसके पीछे की तैयारी वर्षों की होती है. युद्धपोत के ब्रिज से लेकर जमीन पर हाई क्वालिटी वाले सिम्युलेटर तक भारतीय नौसेना कर्मी स्थितिजन्य जागरूकता बनाए रखने, प्रक्रियाओं का पालन करने, अपनी प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखने और दबाव में फैसले लेने का प्रशिक्षण लेते हैं.
भले ही स्थिति अप्रत्याशित या उत्तेजक हो. यह प्रशिक्षण न सिर्फ तकनीकी कौशल बल्कि मानसिक मजबूती भी देता है. समुद्र में सुरक्षा और सफलता के लिए ऐसे अभ्यास अपरिहार्य हैं. सिम्युलेटर आधुनिक नौसेना की तैयारी का अहम हिस्सा बन चुके हैं जो जोखिम कम करते हुए दक्षता बढ़ाते हैं.
शिवानी शर्मा