भारत और चीन के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों के मुद्दे लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का सबसे संवेदनशील हिस्सा रहे हैं. भारत हमेशा से इस बात पर जोर देता रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है. सीमा की स्थिति सीधे दोनों देशों के बड़े रिश्तों को प्रभावित करती है.
अगर सीमा पर तनाव रहता है तो व्यापार, राजनीतिक संवाद और अन्य सहयोग भी प्रभावित होते हैं. 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई 'भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र' (WMCC) की 36वीं बैठक में इसी बात को दोहराया गया.
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इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी पक्ष की अगुवाई विदेश मंत्रालय की बाउंड्री एंड ओशनिक अफेयर्स विभाग की महानिदेशक हौ यानची ने की. दोनों पक्षों ने खुली और स्पष्ट चर्चा की तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की.
भारतीय पक्ष ने फिर से स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि बचे हुए मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों का इस्तेमाल जारी रखा जाएगा. इनमें WMCC, स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और अन्य तंत्र शामिल हैं.
इन विषयों पर भी होगी चर्चा
24वें विशेष प्रतिनिधि (SR) वार्ता के नतीजों के आधार पर दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, तंत्र निर्माण और सीमा पार सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की. भारत ने सीमा पार नदियों पर विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की अगली बैठक जल्द बुलाने की जरूरत दोहराई.
चीन से अपस्ट्रीम परियोजनाओं की तकनीकी जानकारी साझा करने पर जोर दिया. यह मुद्दा भारत के लिए जरूरी है क्योंकि ऊपरी इलाकों में चीनी प्रोजेक्ट निचले क्षेत्रों में पानी के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं.
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यह बैठक 2020 के गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे सुधरते संबंधों का हिस्सा है. पिछले वर्षों में गश्त व्यवस्था पर समझौते और अन्य संवाद तंत्रों को फिर से सक्रिय किया गया था. WMCC जैसी बैठकें तनाव कम करने और विश्वास बढ़ाने का माध्यम बनी हुई हैं.
सीमा विवाद का पूरा समाधान अभी बाकी है, लेकिन दोनों पक्ष मौजूदा तंत्रों के जरिए स्थिति को नियंत्रित रखने पर सहमत दिख रहे हैं. भारत का रुख साफ है कि सीमा पर शांति के बिना व्यापक संबंध आगे नहीं बढ़ सकते. आने वाले समय में 25वें विशेष प्रतिनिधि वार्ता और अन्य बैठकों से स्थिति और स्पष्ट होगी.
पाकिस्तान-तुर्की समझौते पर नजर
हम पश्चिम एशिया संघर्ष के घटनाक्रमों पर लगातार करीब से नजर रख रहे हैं. जहां तक इस समझौते का सवाल है, हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता दोनों के नजरिए से इसके प्रभावों की समीक्षा कर रहे हैं. भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. इस दिशा में सभी जरूरी कदम उठाएगा.
गीता मोहन