केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के पास स्थित भारतीय वायु सेना गोल्फ कोर्स की जमीन पर ध्यान केंद्रित किया है. आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय यानी MoHUA ने इस प्रमुख संपत्ति को वापस लेने की मांग की है. सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारियों को सरकार के इरादे की जानकारी दे दी गई है.
हालांकि अभी तक कोई औपचारिक बेदखली नोटिस जारी नहीं किया गया है. जमीन सौंपने की समय सीमा भी स्पष्ट नहीं है. यह गोल्फ कोर्स एयर फोर्स स्टेशन दिल्ली का हिस्सा है जहां वायु सेना की आधिकारिक और आवासीय सुविधाएं भी हैं. पास में ही सफदरजंग एयरपोर्ट है जहां बीएसएफ के हेलीकॉप्टर और अन्य विमानन संपत्तियां रखी जाती हैं.
यह कदम लोक कल्याण मार्ग और आसपास के इलाके में प्राइम जमीन वापस लेने के बड़े अभियान का हिस्सा है. भूमि और विकास कार्यालय यानी एलएंडडीओ इस काम को अंजाम दे रहा है. सरकार का लक्ष्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और ऊंची कीमत वाली सरकारी जमीन का बेहतर और सार्वजनिक उपयोग सुनिश्चित करना है.
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अगस्त में दिल्ली रेस क्लब को उसके 53 एकड़ के परिसर से बेदखल किया जा चुका है. सरकार ने इसे सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जरूरी बताया था. भारतीय पोलो एसोसिएशन को भी जयपुर पोलो ग्राउंड से हटाया गया. दिल्ली जिमखाना क्लब की 27 एकड़ जमीन के खिलाफ भी बेदखली की प्रक्रिया शुरू की गई है जो फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही है. सरकार ने इन मामलों में सार्वजनिक शासन और रक्षा बुनियादी ढांचे की जरूरत का हवाला दिया है.
पुराने प्रयास और वर्तमान स्थिति
यह अभियान नया नहीं है. साल 2017 में भी एलएंडडीओ ने पांच संपत्तियों को लेकर बेदखली नोटिस जारी किए थे जिनमें एयर फोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, जयपुर पोलो ग्राउंड और ओल्ड विलिंगडन कैंप शामिल थे. लेकिन उस समय प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई. अब सरकार फिर से सक्रिय हुई है और वायुसेना के उपयोग में आ रही जमीन तक पहुंच रही है.
गोल्फ कोर्स की जमीन वापस लेने के बाद उसका क्या उपयोग होगा यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है. सूत्रों का कहना है कि इसे सार्वजनिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि शहर के बीचोंबीच स्थित महंगी जमीन का अधिकतम लाभ मिले.
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लोक कल्याण मार्ग दिल्ली का अत्यंत संवेदनशील और प्रतिष्ठित इलाका है क्योंकि यहां प्रधानमंत्री का आवास है. ऐसे में सुरक्षा, शासन और रक्षा से जुड़ी जरूरतों को प्राथमिकता देना स्वाभाविक है. वायुसेना के लिए यह जमीन खेल और मनोरंजन का साधन है लेकिन सरकार इसे ज्यादा जरूरी सार्वजनिक या सुरक्षा कार्यों के लिए उपयुक्त मान रही है.
अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है इसलिए स्थिति पर नजर रखना होगा. अगर जमीन वापस ली गई तो वायुसेना को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है. कुल मिलाकर यह कदम सरकारी जमीन के कुशल प्रबंधन और रणनीतिक महत्व वाले इलाकों में नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है.
शिवानी शर्मा