धनबाद का वासेपुर सोमवार को एक बार फिर गोलीबारी से गूंज उठा. इस गोलीकांड को लेकर अलग-अलग कई दावे सामने आए हैं. जबकि पुलिस की ओर से अभी हमलावरों की पहचान और हमले की अंतिम वजह की पुष्टि नहीं हुई है. तमाम जानकारी के मद्देनजर ये बात सामने आ रही है कि घटना के पीछे वासेपुर में लंबे समय से चले आ रहे गैंग के विवाद की कड़ी की जांच की जा रही है, लेकिन किसी एक गैंग को जिम्मेदार ठहराना अभी जांच पूरी होने से पहले जल्दबाजी होगी.
क्या हुआ था?
सोमवार सुबह करीब 11 बजे भूली मोड़ के पास फहीम खान के भाई नसीम उर्फ शानू खान कुछ लोगों के साथ मौजूद थे. इसी दौरान लाल रंग की बाइक पर सवार दो हमलावर वहां पहुंचे और शानू को निशाना बनाकर गोलियां चलाने लगे. अचानक हुई फायरिंग से इलाके में अफरातफरी मच गई और दुकानों के शटर गिरने लगे. हमलावर गोलीबारी के बाद बाइक से फरार हो गए.
इस फायरिंग में शानू खान के अलावा सद्दाम नामक युवक और एक महिला भी घायल हुई हैं. शानू को गोली लगी, जबकि स्थानीय दुकान चलाने वाले शाहम, सद्दाम को भी गोलियां लगीं और एक महिला फायरिंग की चपेट में आ गई. पुलिस के मुताबिक घायलों को अस्पताल ले जाया गया और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई.
मौके से मिले 8 खोखे, 2 जिंदा कारतूस
पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच की. अलग-अलग रिपोर्टों में बरामद खोखों की संख्या को लेकर मामूली अंतर है. कुछ रिपोर्टों में 8 खोखे और 2 जिंदा कारतूस मिलने की बात कही गई है, जबकि धनबाद सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव ने आजतक/इंडिया टुडे से बातचीत में 7 खर्च किए गए कारतूस बरामद होने की जानकारी दी। CCTV फुटेज और फोरेंसिक साक्ष्यों की मदद से हमलावरों की पहचान करने की कोशिश चल रही है.
शानू खान पर पहले भी हो चुका है हमला
यह पहली बार नहीं है जब शानू खान पर हमला हुआ है. करीब एक साल पहले अलीनगर के पास भी उन पर फायरिंग हुई थी, हालांकि उस हमले में वह बच गए थे. एक रिपोर्ट के मुताबिक 1 दिसंबर 2024 को भूली मोड़ ऑटो स्टैंड के पास भी शानू को निशाना बनाकर फायरिंग की घटना हुई थी और हमलावरों की पिस्टल में गोली फंसने के बाद वह बच गए थे. पुलिस अब पुराने हमले और सोमवार की घटना के बीच किसी संभावित कड़ी की भी जांच कर रही है.
प्रिंस खान गैंग पर शक क्यों?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम प्रिंस खान के भाई बंटी खान की हालिया गिरफ्तारी और उसके बाद वासेपुर में हुई पुलिस परेड है. पुलिस ने बंटी खान को कोलकाता से गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार वह विदेश भागने की तैयारी में था. गिरफ्तारी के बाद उसे धनबाद लाकर वासेपुर और आसपास के इलाकों में पूछताछ और निशानदेही के लिए ले जाया गया था.
रिपोर्टों के मुताबिक, इसी दौरान बंटी खान के साथ मारपीट भी हुई. बताया जा रहा है कि फहीम खान के बेटे इकबाल खान के समर्थकों और परिजनों की ओर से बंटी के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी. इस वारदात के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हुई कि शानू खान पर हुआ हमला उसी गैंग संघर्ष की अगली कड़ी हो सकता है. लेकिन पुलिस ने फिलहाल बंटी की गिरफ्तारी और शानू पर फायरिंग के बीच सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है.
फहीम खान के परिवार का आरोप?
फहीम खान के बेटे इकबाल खान ने प्रिंस खान और उसके परिवार से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक इकबाल ने दावा किया कि शानू की गतिविधियों और भूली मोड़ पर उनकी मौजूदगी की रेकी की गई और इसके बाद शूटरों ने हमला किया. उन्होंने प्रिंस खान, उसके भाइयों और परिवार के कुछ सदस्यों पर साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है.
हालांकि, ये इकबाल खान के आरोप हैं, पुलिस द्वारा पुष्टि किए गए तथ्य नहीं. पुलिस अभी CCTV, मोबाइल-तकनीकी साक्ष्य, फोरेंसिक सामग्री और पुराने आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड को मिलाकर जांच कर रही है. इसलिए फिलहाल प्रिंस खान या उसके किसी सहयोगी को इस शूटआउट का आरोपी बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा.
घायल की भूमिका भी जांच के घेरे में
फायरिंग में घायल सद्दाम के बारे में बताया गया है कि वह पहले प्रिंस खान से जुड़े रंगदारी नेटवर्क के मामले में जेल जा चुका है. एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में उसे रंगदारी के पैसों के कथित प्रबंधन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था. सोमवार को वह दुकान पर मौजूद था और फायरिंग की चपेट में आ गया. यह जानकारी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इससे यह नतीजा नहीं निकलता कि सद्दाम किसी मौजूदा गैंग की गतिविधि में शामिल था.
आखिर क्यों हुआ हमला?
फिलहाल जांच में तीन प्रमुख एंगल दिखाई दे रहे हैं. पुरानी आपराधिक रंजिश, फहीम खान और प्रिंस खान से जुड़े गुटों का पुराना विवाद और हालिया बंटी खान गिरफ्तारी-परेड के बाद पैदा हुआ तनाव. शानू पर पहले हो चुके हमले को देखते हुए पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या सोमवार की घटना किसी पुराने टारगेटेड अटैक की अगली कड़ी है.
लेकिन अभी सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि पुलिस ने हमले के पीछे किसी एक व्यक्ति या गैंग का नाम आधिकारिक तौर पर तय नहीं किया है. CCTV फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शूटर कौन थे, उन्हें किसने भेजा और शानू खान को ही निशाना बनाने की वजह क्या थी.
एक लाइन में पूरी कहानी
बंटी खान की गिरफ्तारी और वासेपुर में उसकी पुलिस परेड के बाद गैंगों के बीच तनाव की चर्चा तेज हुई, और कुछ दिनों बाद भूली मोड़ पर फहीम खान के भाई शानू खान पर हमला हो गया. फहीम परिवार इसे प्रिंस खान गुट से जोड़कर आरोप लगा रहा है, लेकिन पुलिस की जांच अभी इस कनेक्शन की पुष्टि के स्तर तक नहीं पहुंची है.
कौन है फहीम खान?
फहीम खान धनबाद के वासेपुर का कुख्यात अपराधी है, जिसका नाम पिछले कई दशकों से हत्या, रंगदारी और गैंगवार से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है. फहीम खान का नाम वासेपुर में अपराध की दुनिया से 1980 के दशक से जुड़ा बताया जाता है. उसके पिता शफी खान की 1983 में हत्या हुई थी. इसके करीब तीन साल बाद 1986 में उसके बड़े भाई शमीम खान की धनबाद कोर्ट परिसर में हत्या कर दी गई. इन घटनाओं के बाद फहीम खान के अपराध की दुनिया में आने की बात रिपोर्टों में दर्ज है.
इसके बाद 1990 और 2000 के दशक में फहीम खान का नाम वासेपुर में हत्या, रंगदारी और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े कई मामलों में सामने आया. रेलवे ठेकेदार इरफान खान और धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या, ठेकेदार संजय सिंह पर गोलीबारी और साबिर आलम की हत्या के प्रयास जैसे मामलों में फहीम का उल्लेख मिलता है. हालांकि इन सभी मामलों को एक समान रूप से दोषसिद्ध नहीं माना जा सकता. क्योंकि किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आरोप और अदालत से हुई दोषसिद्धि अलग-अलग बातें हैं.
सगीर हत्याकांड में उम्रकैद
फहीम खान के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक मामलों में सगीर हत्याकांड है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सत्र अदालत ने 15 जून 1991 को इस मामले में फैसला दिया था. बाद में झारखंड हाई कोर्ट ने 2009 में फहीम खान को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल 2011 को हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था.
यानी फहीम खान को केवल 'गैंगस्टर' कहे जाने के आधार पर नहीं, बल्कि सगीर हत्याकांड में न्यायिक रूप से दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा मिली है. यही उसके खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण पुष्ट न्यायिक तथ्य है.
20 साल से जेल में बंद फहीम खान
फहीम खान लंबे समय से जेल में है. मार्च 2026 की झारखंड हाई कोर्ट से संबंधित रिपोर्ट के मुताबिक, उसने 20 साल से ज्यादा समय जेल में बिताया था. उसकी ओर से सजा में छूट और रिहाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया चली. सरकार की ओर से उसके रिहा होने से समाज की शांति प्रभावित होने की आशंका जताए जाने का उल्लेख भी अदालत से जुड़े मामले में मिलता है.
जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने फहीम खान की रिहाई से जुड़े मामले में हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने माना था कि उसके मामले में सजा में छूट के लिए 1984 की नीति लागू होगी, न कि 2007 की संशोधित नीति.
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से क्या है कनेक्शन?
फहीम खान का नाम अनुराग कश्यप की चर्चित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से भी जोड़ा जाता है. कई जगह फिल्म के किरदार फैजल खान को फहीम खान से प्रेरित बताया गया है. लेकिन फिल्म एक काल्पनिक सिनेमाई प्रस्तुति है, इसलिए फिल्म की कहानी या उसके किरदारों को फहीम खान के वास्तविक जीवन का दस्तावेज मानना सही नहीं होगा.
गैंग की कमान किसके हाथ?
फहीम खान के जेल जाने के बाद उसके परिवार और उससे जुड़े लोगों के बीच गैंग के संचालन को लेकर बदलाव हुए हैं. अब उसके बेटे इकबाल खान और भांजे प्रिंस खान का नाम सामने आता है. बाद में दोनों पक्षों के बीच रंगदारी और पैसों के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ने की बात सामने आई है.
यही विवाद आगे चलकर फहीम खान गुट और प्रिंस खान गुट के बीच टकराव की चर्चाओं का आधार बना. हालांकि अलग-अलग आपराधिक घटनाओं को इसी गैंग संघर्ष का परिणाम मानने से पहले संबंधित मामले की पुलिस जांच और न्यायिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है.
आज फहीम खान का नाम फिर चर्चा में
फहीम खान का नाम अभी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उसके भाई शानू खान पर वासेपुर में फायरिंग हुई है. इस घटना को लेकर फहीम और प्रिंस खान से जुड़े गुटों के पुराने विवाद का एंगल जांच में चर्चा में है. लेकिन शानू खान पर हुए ताजा हमले के पीछे किसने हमला कराया, इसकी अंतिम पुलिस पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.
इसके अलावा 29 जनवरी 2004 को फहीम खान के वासेपुर स्थित परिवार पर AK-47 से हुए हमले का मुकदमा भी हाल में चर्चा में है. इस मामले में अदालत ने 23 सितंबर 2026 को फैसला सुनाने की तारीख तय की है. उस हमले में फहीम खान के बॉडीगार्ड की मौत हुई थी.
परवेज़ सागर