ठाणे में ह्यूमन एग्स की अवैध बिक्री के मामले में ED की छापेमारी, 40 से ज्यादा महिलाओं के शोषण का शक

ठाणे के बदलापुर में इंसानी अंडाणुओं की अवैध निकासी और बिक्री के सनसनीखेज मामले में ED ने छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है. इस मामले में एजेंसी को 40 से ज्यादा महिलाओं के शोषण का शक है, तीन महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद इस केस की जांच तेज हो गई. पढ़ें पूरी कहानी.

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इंसानी अंडाणुओं की अवैध बिक्री का ये हैरान करने वाला मामला है (फोटो-ITG) इंसानी अंडाणुओं की अवैध बिक्री का ये हैरान करने वाला मामला है (फोटो-ITG)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:53 PM IST

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में इंसानी अंडों यानी ह्यूमन एग (Human Eggs या Ovum) की अवैध निकासी और बिक्री के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को कार्रवाई की. जांच एजेंसी ने बदलापुर में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. यह मामला महिलाओं को पैसों का लालच देकर उनके अंडाणु निकलवाने और फिर उन्हें व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए बेचने से जुड़ा है.

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इससे पहले ठाणे पुलिस ने फरवरी में बदलापुर ईस्ट में चल रहे इस कथित अवैध नेटवर्क का खुलासा किया था. अब इस मामले में वित्तीय लेन-देन और पूरे नेटवर्क की जांच के दायरे में आने की संभावना है.

ठाणे पुलिस ने फरवरी में कार्रवाई करते हुए इस रैकेट से जुड़े होने के आरोप में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया था. इनमें स्थानीय स्तर पर इस नेटवर्क को संचालित करने की आरोपी सुलक्षणा गाडेकर (Sulakshana Gadekar) भी शामिल थी.

जांच में सामने आया था कि यह गिरोह आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं को निशाना बनाता था. उन्हें अंडाणु निकलवाने के बदले 25,000 से 30,000 रुपये तक देने का लालच दिया जाता था. जांचकर्ताओं को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए 40 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया गया.

जांच के दौरान महिलाओं की सेहत और सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले भी सामने आए. अधिकारियों के मुताबिक, एक महिला से कथित तौर पर 33 बार अंडाणु निकलवाए गए. यह मामला प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी प्रक्रियाओं में जरूरी चिकित्सकीय निगरानी और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आशंका पैदा करता है.

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जांच में आरोप है कि महिलाओं को अंडाणु निकालने की प्रक्रिया से पहले उचित चिकित्सकीय निगरानी के बिना दवाएं और इंजेक्शन दिए जाते थे. इस नेटवर्क में शामिल लोगों और चिकित्सा केंद्रों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुलक्षणा गाडेकर अपने घर से इस गतिविधि को संचालित करती थी. वहां ओव्यूलेशन को बढ़ावा देने वाले इंजेक्शन रखे जाते थे और कथित तौर पर महिलाओं को उचित चिकित्सकीय निगरानी के बिना दिए जाते थे. इसके बाद महिलाओं की सोनोग्राफी की मदद से अंडाणु निकालने की प्रक्रिया कराए जाने का आरोप है.

जांच के अनुसार, महिलाओं को बाद में उन IVF और मेडिकल सेंटरों में भेजा जाता था, जिनकी इस नेटवर्क से कथित सांठगांठ की जांच की जा रही है. वहां ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों द्वारा अंडाणु निकाले जाने और उन्हें व्यावसायिक बिक्री के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है.

यह मामला सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 के कथित उल्लंघन से भी जुड़ा है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस कानून के तहत अंडाणु दान के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं और दान के बदले आर्थिक लाभ देने पर रोक है. कानून में अंडाणु दान की आवृत्ति और उससे जुड़ी चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए भी नियामक प्रावधान हैं.

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जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित रैकेट में इन नियमों का किस तरह उल्लंघन किया गया. मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है.

पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है. अधिकारियों का ध्यान उन एजेंटों और मेडिकल पेशेवरों पर है, जिनके जरिए महिलाओं को इस नेटवर्क तक लाए जाने और अंडाणु निकालने की प्रक्रिया कराए जाने का आरोप है.

ED की बदलापुर में तलाशी इसी मामले से जुड़ी कार्रवाई का हिस्सा है. जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों, इसमें शामिल लोगों और कथित व्यावसायिक गतिविधियों का पता लगाने में जुटी हैं. फिलहाल मामले में आगे की जांच और कार्रवाई का इंतजार है.

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