महाराष्ट्रः एटीएस चीफ ने कहा- मनसुख हिरेन हत्याकांड में सचिन वाज़े अहम साजिशकर्ता

जयजीत सिंह ने बताया कि घटना स्थल पर कोई सबूत नहीं मिला. 8 मार्च को, एटीएस ने वाज़े का बयान दर्ज किया. वाज़े ने अपने बयान में सभी आरोपों से इनकार कर दिया. उसने कहा कि वो मनसुख हिरेन को नहीं जानता और उसने कभी स्कॉर्पियो का इस्तेमाल नहीं किया.

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ATS चीफ जयजीत सिंह ने मीडिया को केस के बारे में जानकारी दी ATS चीफ जयजीत सिंह ने मीडिया को केस के बारे में जानकारी दी

मुस्तफा शेख

  • मुंबई,
  • 23 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 9:58 PM IST
  • मनसुख हिरेन मर्डर केस की जांच कर रही है ATS
  • 6 मार्च को एटीएस के हवाले किया गया था केस
  • ATS चीफ ने कहा- हाथ लगे कई अहम सबूत

महाराष्ट्र एटीएस के प्रमुख जयजीत सिंह मंगलवार को मीडिया से मुखातिब हुए. दरअसल, 6 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन की हत्या का मामला जांच के लिए एटीएस को सौंपा गया था. एटीएस ने इस मामले में सभी दस्तावेजों की छानबीन के साथ ही मनसुख हिरेन की पत्नी विमला हिरेन का बयान भी दर्ज किया है. विमला हिरेन ने अपने बयान में आरोप लगाया कि सचिन वाज़े ने उनके पति की हत्या कर दी होगी. इसी के मुताबिक एटीएस ने 7 मार्च को हत्या, सबूत नष्ट करने और आपराधिक साजिश रचने की एफआईआर दर्ज की. एटीएस की मानें तो इस पूरे केस में सचिन वाज़े ही अहम साजिशकर्ता है.

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जयजीत सिंह ने बताया कि घटना स्थल पर कोई सबूत नहीं मिला. 8 मार्च को, एटीएस ने वाज़े का बयान दर्ज किया. वाज़े ने अपने बयान में सभी आरोपों से इनकार कर दिया. उसने कहा कि वो मनसुख हिरेन को नहीं जानता और उसने कभी स्कॉर्पियो का इस्तेमाल नहीं किया. एटीएस सचिन वाज़े के बयान को सबूतों के साथ गिन रही है. इस मामले में उसकी सही भूमिका की जांच की जा रही है. 

एटीएस चीफ ने ऐसे सिम कार्ड का खुलासा भी किया है, जो अपराध में इस्तेमाल किए गए थे. सचिन वाज़े के निर्देश पर मुंबई में सट्टेबाजी का कारोबार करने वाले एक बुकी नरेश ने गुजरात के एक परिचित से सिम हासिल करने में मदद की थी. ये सिम गुजरात में पंजीकृत एक कंपनी के नाम से खरीदे गए थे.

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नरेश गोर ने सचिन वाज़े के निर्देश पर विनायक शिंदे को ये सिम कार्ड दिए थे. इसके लिए शिंदे को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया. शिंदे पहले से ही एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. वो कोविड महामारी के कारण पैरोल पर बाहर आया हुआ था. आपको बता दें कि कई कैदियों को जेलों में भीड़ कम करने के लिए पैरोल पर रिहा किया गया था.

जयजीत सिंह ने कहा कि शिंदे ने हिरेन से संपर्क किया और उसे 4 मार्च को अपने घर से बाहर बुलाया. एटीएस के पास सबूत हैं कि शिंदे हिरेन की हत्या के समय वहां मौजूद था. आरोपी शिंदे को क्राइमसीन रिक्रिएट करने के लिए फिर से मौका-ए-वारदात पर ले जाया गया.

बुकी नरेश गोर ने गुजरात से 14 सिम कार्ड हासिल किए थे, जिसमें से कुछ सिम एक्टिव हो गए थे. वही  सिम शिंदे को दे दिए गए थे. शिंदे ने वो सिम इस साजिश में शामिल अन्य आरोपियों को दिए थे. पता चला है कि इस क्राइम में इस्तेमाल किए गए कुछ सिम और मोबाइल फोन नष्ट कर दिए गए हैं.

जांच के अनुसार, अपराध में इस्तेमाल की गई एक संदिग्ध वोल्वो कार को ठाणे लाया गया है. अपराध करने के लिए कार का उपयोग कैसे किया गया था, यह जानने के लिए वाहन को फोरेंसिक लैब, कलिना भेजा जाएगा. जांच के बाद और लोगों की गिरफ्तारी किए जाने की संभावना है.

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इस मामले में कई संदिग्ध हैं, लेकिन एटीएस आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने की प्रक्रिया में लगी है. अभियुक्त ने कुछ सीसीटीवी फुटेज को नष्ट कर दिए हैं, जो इस केस में सबूत हो सकते थे. अब तक कई गवाहों के बयान एटीएस ने दर्ज किए हैं. कुछ गवाहों के लिए सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है.

आरोपी सचिन वाज़े एनआईए की हिरासत में है. एटीएस को उसकी कस्टडी की जरूरत है और इसके लिए ATS ने प्रोडक्शन वारंट हासिल कर लिया है. जयजीत सिंह का कहना है कि एटीएस इस मामले के पीछे की पूरी सच्चाई का पता लगाएगी. इसके लिए एटीएस की कई यूनिट चौबीसों घंटे काम कर रही हैं.

पाटण से एक शख्स गिरफ्तार
मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में मुंबई एटीएस की टीम गुजरात में छानबीन कर रही है. नरेश गोर को गिरफ्तार करने के बाद एटीएस की टीम गुजरात के पाटण शहर जा पहुंची. एटीएस ने पाटण से किशोर ठक्कर नाम के एक शख़्स को हिरासत में लिया है. इस शख्स को सचिन वाज़े केस की जांच के सिलसिले में हिरासत में लिया गया है. अब एटीएस के अधिकारी उससे पूछताछ कर रहे हैं.

 

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