कभी आपने सोचा है जब किसी का क़त्ल होता है, किसी की संदिग्ध मौत होती है या कोई ख़ुदकुशी करता है. मामला पुलिस के पास पहुंचता है. FIR दर्ज होती है. फिर अदालत में चार्जशीट दाखिल होती है. तो उस एक क़त्ल, उस एक संदिग्ध मौत या एक ख़ुदकुशी के लिए सीधे-सीधे कानून की एक धारा लगाने की बजाय एक साथ कई धाराएं लगाई जाती हैं. अब जैसे भोपाल की ट्विशा और उसकी मौत तो याद होगी आपको. ट्विशा की लाश ससुराल के अंदर फंदे से झूलती मिली थी.
पहले भोपाल पुलिस ने जांच की फिर केस सीबीआई के पास पहुंचा. सामने आरोपी के तौर पर एक तो पति था ही, दूसरी खास आरोपी थी सास. खास इसलिए क्योंकि सास ख़ुद कभी जज थी. अब जज रही उन्हीं सास गिरिबाला सिंह और उनके बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह के ख़िलाफ सीबीआई ने भोपाल की एक अदालत में मां-बेटे के ख़िलाफ आरोपी पत्र यानि चार्जशीट दाख़िल कर दी है.
दरअसल, शुरुआत में ट्विशा की मौत को क़त्ल बताया जा रहा था. घरवालों ने भी यही इल्ज़ाम लगाए थे. फिर भोपाल पुलिस ने भी अपनी लापरवाही के चलते ट्विशा की मौत की वजह को लेकर केस और बिगाड़ दिया. इन्हीं सबके बीच 13 मई की जो पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई उस पर कोई यकीन करने को तैयार नहीं था. क्योंकि रिपोर्ट एक तरफ ट्विशा की मौत को ख़ुदकुशी भी बता रही थी और दूसरी तरफ जिस्म पर जख़्मों के निशान भी दिखा रही थी.
इसी उलझन को दूर करने के लिए दो चीज़ें हुईं. एक ट्विशा की मौत के केस से भोपाल पुलिस बाहर हो गई. जांच सीबीआई को मिल गई. परिवार के आरोपों के बाद 24 मई को एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने दोबारा पोस्टमार्टम किया. वो पोस्टमार्टम एम्स के एक्सपर्ट्स डॉक्टरों के पैनल ने किया. जिसमें ट्विशा की मौत को एंटी-मॉर्टम हैंगिंग से हुई Asphyxia और आत्महत्या की प्रकृति का बताया गया.
क़त्ल और खुदकुशी के बीच का राज़ अब इसी दूसरी रिपोर्ट पर आकर ठहर गया. एम्स के डॉक्टरों के पैनल ने सील बंद लिफ़ाफ़े में ये रिपोर्ट भोपाल में कोर्ट को सौंपी और इसी के साथ ये सच सामने आया कि ट्विशा को मारा नहीं गया था. बल्कि उसने ख़ुदकुशी की थी. CBI के अनुसार, फोरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट में ट्विशा के भीतर निराशा, लगातार मानसिक नुकसान और सहयोग की कमी के संकेत मिले.
अब डॉक्टरों के आगे सीबीआई को ये पता करना था कि ट्विशा ने खुदकुशी क्यो की? क्या उसे खुदकुशी के लिए मजबूर किया गया था? अगर हां, तो क्यों? तो सीबीआई ने इन्हीं सवालों के ईर्द-गिर्द अपनी जांच शुरु की और फिर जांच खत्म होते ही सारी कहानी चार्जशीट में लिख डाली. हालाकि 636 पन्नों की पूरी की पूरी चार्जशीट सामने नहीं आई है लेकिन चार्जशीट में जो अहम बाते हैं उनका ख़ुलासा हो चुका है.
सीबीआई के मुताबिक शादी के बाद से ही जज रही सास गिरिबाला सिंह और वकील बेटा समर्थ सिंह लगातार ट्विशा पर जुल्म ढाते थे. कभी दहेज के लिए, कभी औलाद के लिए, कभी उसकी पर्सनल लाइफ के लिए तो कभी करियर को लेकर. इन्हीं सब चीजों से तंग आकर 12 मई की रात ट्विशा ने भोपाल के अपने इसी ससुराल में छत पर फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी.
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