राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े फर्जी बीपीएड डिग्री मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने मध्य प्रदेश की एक यूनिवर्सिटी के कुलपति समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच में विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों से डिग्री तैयार करने में कथित गड़बड़ी सामने आई है.
मामला 25 दिसंबर 2022 को आयोजित शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है. SOG के मुताबिक, अभ्यर्थी भारमल राम ने आवेदन में मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी एवं मेडिकल साइंस से प्राप्त बीपीएड डिग्री लगाई थी. जांच में आरोप सामने आया कि भारमल राम ने परीक्षा में अपने स्थान पर डमी अभ्यर्थी को बैठाकर परीक्षा पास कराई और इसके बाद सरकारी शारीरिक शिक्षक के पद पर नौकरी हासिल कर ली. शिकायत मिलने के बाद SOG ने मामले की जांच शुरू की.
SOG ने कोर्ट से सर्च वारंट लेकर विश्वविद्यालय में तलाशी ली. वहां से रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा जब्त किया गया. इनकी फॉरेंसिक फाइनेंशियल एक्सपर्ट से जांच कराई गई. जांच में सामने आया कि भारमल राम के नाम से विश्वविद्यालय में दो अलग-अलग फीस संबंधी लेजर अकाउंट बनाए गए थे. ऑडिट में इन लेजर अकाउंट की प्रविष्टियों में भी गड़बड़ी मिली. कई एंट्रियां बाद की तारीख में बनाए जाने का तथ्य सामने आया, जबकि संबंधित परीक्षा का परिणाम 21 अक्टूबर 2022 को जारी होना बताया गया था. SOG के अनुसार, रिकॉर्ड की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं.
एसओजी की जांच यहीं नहीं रुकी. विश्वविद्यालय में बीपीएड की 100 सीटें अनुमोदित थीं. शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से पहले राज्य के बाहर से बीपीएड करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या असामान्य रूप से अधिक पाए जाने पर SOG को शक हुआ. जांच में कुल 66 अभ्यर्थियों द्वारा इसी विश्वविद्यालय की बीपीएड डिग्री प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई.
अब इन सभी अभ्यर्थियों की डिग्रियों और उनसे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है. SOG ने इस मामले में श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय के कुलपति मुकेश तिवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को गिरफ्तार किया है. मूल अभ्यर्थी भारमल राम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके खिलाफ चालान न्यायालय में पेश किया जा चुका है. तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया गया.
SOG के मुताबिक, विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य संबंधित अभ्यर्थियों की डिग्रियों की गहन जांच जारी है. जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यानी 66 अभ्यर्थियों की डिग्रियों की जांच इस मामले को और बड़ा रूप दे सकती है. मामले में पुलिस थाना SOG जयपुर में प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है.
शरत कुमार