दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय बेकाबू हो गए, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प शुरू हो गई. पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के 200 से अधिक जवान और अधिकारी घायल हुए हैं. घायलों में कांस्टेबल से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ का एक बड़ा हिस्सा अचानक उग्र हो गया, इसके बाद पथराव और बैरिकेड तोड़ने जैसी घटनाएं हुईं.
सब-इंस्पेक्टर श्रीनिवास शर्मा इस हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए. वह प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस स्थित एसबीआई मुख्यालय के पास ड्यूटी पर तैनात थे. शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने अचानक पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए और उन्हीं बैरिकेड को पुलिसकर्मियों की तरफ फेंकना शुरू कर दिया. इसी दौरान एक बैरिकेड उनके पैर पर आकर लगा, जिससे उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया.
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनिवास शर्मा ने बताया कि हालात यहीं नहीं थमे. उनके मुताबिक, जब पुलिस एक राजनेता और उनके समर्थकों को सुरक्षित तरीके से वहां से बाहर ले जा रही थी, तभी भीड़ दोबारा उग्र हो गई. शर्मा का आरोप है कि इस दौरान उन्हें फिर से निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ मारपीट की, उन्हें जबरन घसीटा और इस हमले में उन्हें कई और चोटें आईं. उनका कहना है कि भीड़ के हमले के कारण उनके पैर की हड्डी भी टूट गई.
उस दिन संसद मार्ग इलाके में ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल राजेंद्र ने भी हमले का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि वह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाल रहे थे, तभी प्रदर्शनकारियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. राजेंद्र के मुताबिक, करीब पांच मिनट तक उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई. इस हमले में उनकी आंख के पास, सिर और कमर पर गंभीर चोटें आईं हैं.
हेड कांस्टेबल राजेंद्र ने बताया कि हालात इतने खराब हो गए थे कि अपनी जान बचाने के लिए उन्हें पास में खड़ी एक पुलिस वैन के नीचे रेंगकर छिपना पड़ा. उन्होंने कहा कि वह वहीं छिपे रहे और बाद में साथी पुलिसकर्मियों के मौके पर पहुंचने के बाद ही सुरक्षित बाहर निकल सके. उनका कहना है कि अगर समय पर मदद नहीं मिलती, तो हालात और गंभीर हो सकते थे.
डीबीजी रोड थाने में तैनात हेड कांस्टेबल नवीन ओला भी संसद मार्ग क्षेत्र में सुबह सात बजे से ड्यूटी पर मौजूद थे. उन्होंने बताया कि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन समय बीतने के साथ भीड़ का रवैया लगातार आक्रामक होता गया. उनके मुताबिक, दोपहर करीब 12:30 बजे, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, तभी भीड़ के एक हिस्से ने अचानक पथराव शुरू कर दिया.
नवीन ओला ने बताया कि पथराव में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी और माथे पर तीन से चार टांके लगाने पड़े. उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और आगे न बढ़ने की अपील कर रही थी, लेकिन भीड़ किसी भी अपील को सुनने के लिए तैयार नहीं थी. उनके अनुसार, देखते ही देखते स्थिति पूरी तरह हिंसक हो गई और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.
उधर, डीसीपी (नॉर्थ) राजा बंथिया के साथ पुलिस मुख्यालय के पास तैनात इंस्पेक्टर आशीष दुबे भी इस हिंसा में घायल हो गए. उन्होंने बताया कि जैसे ही भीड़ के एक हिस्से ने पुलिस पर पथराव शुरू किया, हालात तेजी से बिगड़ गए. इस दौरान उनकी आंख के नीचे, कमर और पैर में चोटें आईं हैं. आशीष दुबे ने आरोप लगाया कि भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज भी की. उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान इस तरह की हिंसा बेहद दुखद और चिंताजनक है.
पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है. हिंसा, पथराव और पुलिसकर्मियों पर हमले में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों, वीडियो फुटेज और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. आपको बता दें कि जंतर मंतर और आस-पास के इलाकों में प्रदर्शन को देखते हुए भारी तादाद में पुलिस और अर्ध सैनिक बल तैनात किए गए हैं.
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